Johar36garh (Web Desk)| छत्तीसगढ़ पुलिस नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चला रही है. पिछले 2 महीने के अंदर पुलिस ने नक्सलियों के शहरी नेटवर्क की कमर तोड़कर रख दी है. 12 मई तक पुलिस ने 11 लोगों को गिरफ्तार किया था और 14 मई को करोड़ों का कारोबारी निशांत जैन हत्थे चढ़ा था. लेकिन जो पुलिसवाले ‘लाल आतंक’ को बैकफुट पर लाने के लिए दिन-रात एक किए हुए हैं, लेकिन खबर है कि उन्हीं में से कुछ गद्दारी कर नक्सलियों की ही मदद कर रहे हैं.
खबर है कि नक्सलियों को कारतूस सप्लाई करने के मामले में सुकमा पुलिस के दो जवान भी शामिल हैं. शनिवार को ही पुलिस ने शहरी नेटवर्क का खुलासा करते हुए 700 जिंदा कारतूस के साथ चार सप्लायरों को गिरफ्तार किया था. इस पूरे मामले में एएसआई और आर्मरर को भी हिरासत में लिया गया है और उनसे भी पूछताछ की जा रही है. नक्सलियों की सप्लाई चेन में इनकी अहम भूमिका होने की बात कही जा रही है.
पूर्व में भी एएसआई और आर्मरर द्वारा नक्सलियों को कारतूस और दूसरी जरूरी सामग्री सप्लाई किया गया है. हालांकि पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने नक्सलियों को कारतूस की सप्लाई करने में जवानों की भूमिका से इनकार किया है.
कांकेर जिले में नक्सल मामलों में हुए खुलासे में शहरी नेटवर्क के तार सुकमा से जुड़ते मिले हैं. मोबाइल ट्रेसिंग कर पुलिस ने ऐसे जवानों पर नजर रखने लगी थी. इसी बीच गुप्त सूचना मिली थी कि नक्सलियों को गोलियों की सप्लाई होने वाली है. इसके मद्देनजर एक विशेष टीम का गठन किया गया. जिसकी कमान स्वयं पुलिस अधीक्षक शलभ सिन्हा ने संभाल रखी थी.
जानकारी के मुताबिक 3-4 जून को एएसआई और सप्लायरों के बीच कारतूस सप्लाई की योजना बनी. सप्लायर लगातार एएसआई के संपर्क में थे. पुलिस भी जवान और सप्लायर का फोन ट्रेस कर रही थी. 4 तारीख की सुबह करीब 4 बजे शहर के मलकानगिरी चौक पर मिलने का प्लान बनाया. प्लान के मुताबिक सप्लायर चारपहिया वाहन में सुकमा पहुंचे और मलकानगिरी चौक पर जवान का इंतजार कर रहे थे. इसी बीच पुलिस की विशेष टीम ने सप्लायरों को घेराबंदी कर धरदबोचा. इसके बाद कारतूस का बैग लेकर पहुंचे एएसआई को भी पुलिस ने पकड़ लिया. पुलिस ने मौके से दो सप्लायर और एक एएसआई को हिरासत में लिया और आरमोरर को इंदिरा कॉलोनी स्थित उसके घर उठाया.
लगातार पुलिस की कार्रवाई में शहरी नेटवर्क का खुलासा हुआ है. कांकेर में कुछ माह पहले सप्लायरों से पूछताछ में सुकमा के कुछ पुलिसकर्मियों के शामिल होने की जानकारी मिली. इसके बाद से सुकमा पुलिस एएसआई पर नजर बनाए हुई थी. एएसआई की संदिग्ध गतिविधियों के कारण पुलिस का शक यकीन में बदल गया. एएसआई का फोन ट्रेस किया गया जिसमें एएसआई लगातार नक्सल सप्लायरों के संपर्क में था. कारतूस की बड़ी खेप आर्मरर के सहयोग से सप्लायारों तक पहुंच रही थी.