4.75 लाख आधार कार्ड रद्द, अलग-अलग लोगों की एक जैसी बायोमेट्रिक जानकारियां

JJohar36garh News|कैग ने सुझाव दिया है कि बायोमेट्रिक सेवाएं देने वालों के लिए सख्त नियम कानून बने और इन एजेंसियों पर गलतियों के लिए जुर्माने के भी प्रावधान हो। वहीं, UIDAI को तकनीक की समीक्षा के लिए सुझाव दिया गया

भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण यानि यूआईडीएआई की तरफ से बनाए जा रहे आधार के कामकाज पर सवाल उठाए हैं। कैग ने कहा कि कार्ड बनाने की प्रक्रिया में दोहराव बड़ी दिक्कत है। कैग रिपोर्ट में बताया गया है कि नवंबर 2019 तक 4.75 लाख आधार रद्द करने पड़े थे, क्योंकि अलग-अलग लोगों की बायोमेट्रिक जानकारियां समान हो गईं।

सख्त नियम कानून की जरूरत
कैग की तरफ से सुझाव दिया गया है कि बायोमेट्रिक सेवाएं देने वालों के लिए सख्त नियम कानून बने। इन एजेंसियों पर गलतियों के लिए जुर्माने के भी सख्त प्रावधान की जरूरत है। वहीं, यूआईडीएआई को अपनी तकनीक की समीक्षा करने के लिए भी सुझाव दिया गया है। ताकि लोगों को इससे होने वाली मुश्किलों से बचाया जा सके।

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बच्चों के आधार पर सवाल
कैग ने बच्चों के लिए जारी किए जाने वाले आधार कार्ड को लेकर कहा है कि ये कार्ड अभिभावकों की बायोमेट्रिक पहचान से बनते हैं। यहां कुछ नया नहीं होता है। ऐसे में ये आधार अधिनियम के सिद्धांत से मेल नहीं खाता है।

यूआईडीएआई ने बाल आधार पर गैर जरूरी 310 करोड़ रुपये का खर्च भी किया है। साथ ही 2020-21 के लिए अतरिक्त 288 करोड़ रुपये का भी प्रावधान है जिसकी समीक्षा की जरूरत है। कैग के मुताबिक यूआईडीएआई को पांच साल से छोटे बच्चों के आधार के लिए दूसरा विकल्प देखनेकी जरूरत है।