पामगढ़ : भाजपा की बैठक में दंगल, मूकदर्शक बने बड़े पदाधिकारी, पूर्व विधायक के खिलाफ हुई शिकायत

जांजगीर जिला के पामगढ़ में हुई भाजपा की विधानसभा स्तरीय संयुक्त मोर्चा की बैठक उस वक्त अखाड़े में तब्दील हो गया, जब एक जिला स्तरीय कार्यकर्ता ने मंच पर आसीन बड़े-बड़े पदाधिकारियों को अपना इस्तीफा देने पहुंचा| पदाधिकारियों ने उसे अपनी बात रखने को कहा| वह अपनी दर्द सुना रहा था की इसी दौरान पूर्व विधायक नाराज हो गए और विवाद शुरू हो गया| देखते ही देखते मामला मारपीट तक पहुँच गया| जबकि मंच पर तमाम बड़े-बड़े पदाधिकारी मौजूद थे, जो मूकदर्शक बने रहे| नाराज सदस्य ने इसकी शिकायत प्रदेशाध्यक्ष से की है| हालांकि बंद कमरे में हुए इस घटना के संबंध में कोई खुलकर बोलने से परहेज कर रहे हैं, लेकिन प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों से की शिकायत इस घटना की कहानी कह रही है|

घटना से दुखी होकर भाजपा के अजा मोर्चा के जिला कार्य समिति सदस्य रोहित घृतलहरे ने पूर्व संसदीय सचिव पर मारपीट का आरोप लगाते हुए इसकी शिकायत भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरुण साव से की है। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया है कि 13 जून को पामगढ़ के सतनाम भवन में विधानसभा स्तरीय संयुक्त मोर्चा की बैठक थी। बैठक में जिलाध्यक्ष गुलाब सिंह चंदेल, पूर्व सांसद कमला देवी पाटले, पूर्व संसदीय सचिव अंबेश जांगड़े, सक्ती के पूर्व विधायक डा. खिलावन साहू एवं अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे। इस बीच जब अजा मोर्चा के जिला कार्य समिति सदस्य रोहित घृतलहरे ने अपना व अपनी पत्नी शांता घृतलहरे का इस्तीफा देने मंच में उपस्थित नेताओं के पास पहुंचे थे | जिस पर नेताओं ने उन्हें अपनी बात रखने को कहा। वह अपनी पीढ़ा बता रहे थे इस दौरान पूर्व संसदीय सचिव अंबेश जांगड़े ने उनके साथ मारपीट की मंचासीन नेता मूकदर्शक बने रहे। किसी तरह मामला शांत हुआ| जिसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष अरूण साव से की है। इस शिकायत की कापी उन्होंने क्षेत्रिय संगठन महामंत्री अजय जामवाल, प्रदेश संगठन महामंत्री पवन साय, प्रदेश महामंत्री केदार कश्यप, विजय शर्मा और ओपी चौधरी को भी भेजी है।

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दरअसल पूरा मामला 2015 में हुए जिला पंचायत चुनाव को लेकर हुआ| रोहित लहरे ने बैठक के बाद बताया कि पार्टी में हो रही उपेक्षा की वजह से उन्होंने इस्तीफा देने का मन बनाया था। जब उनकी पत्नी भाजपा से अधिकृत होकर पामगढ़ क्षेत्र क्रमांक 6 से जिला पंचायत चुनाव लड़ी थी तब पामगढ़ क्षेत्र में भाजपा का विधायक होने के बाद भी चुनाव के दौरान एक दिन भी नहीं निकले और न ही उनका फोन रिसीव करते थे। उन्होंने यहां तक आरोप लगाया कि कई भाजपा नेताओं ने कांग्रेस समर्थित उम्मीदवार का साथ दिया। इसके कारण उनकी पत्नी चुनाव हार गई।