टाइटैनिक का मलबा देखने गई पनडुब्बी हुई लापता, नहीं मिल पाया कोई सुराग

दुनिया के सबसे बड़े और खुबसूरत जहाजों में से एक रहे टाइटैनिक की कहानियां तो हमने बहुत सुनी हैं। लेकिन अब एक टूरिस्ट पनडुब्बी टाइटैनिक के मलबे को देखने केलिए अटलांटिक महासागर में उतरने की खबर सामने आई है। इस मामले में चौंकाने वाली बात यह है कि यह टूरिस्ट पनडुब्बी पायलट और चार टूरिस्ट के साथ महासागर में उतरी थी लेकिन अब खुद ही लापता हो गई है। इन टूरिस्ट में ब्रिटेन के अरबपति हामिश हार्डिंग भी शामिल हैं। पनडुब्बी के लापता होने के बाद से ही अमेरिका और कनाडा के द्वारा तलाशी अभियान शुरू कर दिया गया है। लेकिन अब तक कोई बड़ा सुराग हाथ नहीं लग पाया है। चलिए जानते हैं इस बारे में विस्तार से।

क्या है पूरा मामला?

गौरतलब है कि 10 अप्रैल 1912 को टाइटैनिक जहाज अपने साफ पर निकला था। लेकिन महज 4 दिन बाद यानि 14 अप्रैल को वह एक बर्फ की चट्टान से टकराकर अटलांटिक महासागर में डूब गया था। इसके बाद हाल में ही में एक पनडुब्बी ने लोगों को टाइटैनिक के डूबने की जगह दिखाने के लिए उसी जगह पर गोता मारा था। लेकिन करीब 2 घंटे के समय में ही पनडुब्बी लापता हो गई। इसके बाद से इस पनडुब्बी को ढूँढने के लिए तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। बताया जा रहा है कि पनडुब्बी पर केवल 70 घंटे की ही ऑक्सीजन बची हुई है।

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कितना होता है खर्च?

बता दें कि टाइटैनिक जहाज को देखने के लिए प्रति व्यक्ति तकरीबन दो करोड़ रुपए तक का खर्च आता है। इस मलबे तक ले जाने वाली कंपनी 8 दिन का मिशन चलाती है। जिसके तहत व्यक्ति को पनडुब्बी के माध्यम से अंदर ले जाया जाता है और पूरा सीन दिखाया जाता है।

सुनाई दी धमाकों की आवाज

कनाडाई कास्ट गार्ड वाहन का कहना है कि उसे समुद्र के बीच से धमाकों की आवाज सुनाई दी है। जिसे अभियान में एक सफलता के तौर पर देखा जा रहा है। वहीं अमेरिकी तटरक्षकों का कहना है कि सर्च टीमों के द्वारा रोबोटिक सर्च अभियान चलाया गया था, ताकि धमाकों के बारे में पता चल सके। लेकिन उन्हें धमाकों की लोकेशन के बारे में कोई खबर नहीं लग पाई है।

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