पामगढ़ में खुला पत्ता, कशमकश में मतदाता, बसपा, कांग्रेस और बीजेपी के नेताओं में छाई ख़ामोशी

आगामी विधान सभा चुनाव को लेकर तीनों बड़ी पार्टियों ने पामगढ़ में अपना पत्ता खोल दिया है| तीनों पार्टियों से प्रत्याशियों के नाम सामने आने के बाद पामगढ़ के मतदाता कशमकश में नज़र आ रहे हैं| पामगढ़ के इतिहास में छत्तीसगढ़ बनने के बाद कोई पार्टी ने लगातार जीत हासिल नही की है| पामगढ़ विधानसभा के लिए इस बार बीजेपी ने बसपा से असंतुष्ट होकर आए नेता संतोष लहरे को मौका दिया है| तो वही कांग्रेस ने 2013 में बनाए गए प्रत्यासी शेषराज हरवंश को मैदान में उतारा है| बसपा अपने मौजूदा विधायक इंदु बंजारे के साथ पहले से ही मैदान में जुटी हुई है| हालाकि पामगढ़ विधानसभा को बसपा का गढ़ माना जाता है| लेकिन सच्चाई ये भी है की छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद बसपा ने भी लगातार जीत हासिल नहीं की है | एक-एक दफे कांग्रेस और बीजेपी ने जीता जबकि 2 बार बसपा ने जीत हासिल की है|  आईए पामगढ़ की जनता से बातचीत के बाद मिले सारांश से समझने की कोशिश करते हैं अब तक के हुए चुनाव की रणनीति क्या थी |

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2003 में हुए पहले विधान सभा चुनाव में पामगढ़ में रिकॉर्ड 75.63 प्रतिशत वोटिंग हुई| जो अब तक के चुनाव में सबसे अधिक है| इस चुनाव में 31.37 प्रतिशत वोट के साथ कांग्रेस के महंत राम सुंदर दास ने जीत हासिल की थी| कहा जाता है इस जीत के पीछे तत्कालीन मुख्यमंत्री अजित जोगी का चेहरा सामने था |  इस चुनाव में बसपा के दाऊ राम रत्नाकर को 26.43 और बीजेपी के शकुन्तला को 26.09 प्रतिशत वोट मिले थे|  जबकि 7.26 प्रतिशत वोट अन्य प्रत्यासियों के खाते में गए थे |  इसके बाद हुए अब तक के चुनाव में यह प्रतिशत नहीं पहुँच पाया है|  साथ ही इस जीत के बाद कांग्रेस के किसी प्रत्यासी ने जीत हासिल नहीं की और न ही इस वोट के प्रतिशत तक पहुँच पाया|

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2008 के विधानसभा चुनाव में कुल 65.39 प्रतिशत मतदान हुआ | जिसमें बसपा ने 12.85 प्रतिशत वोट की बढ़ोतरी करते हुए 39.28 प्रतिशत वोट लेकर धमाकेदार वापसी करते हुए दूज राम बौद्ध ने बाजी मारी| साथ ही पामगढ़ को बसपा के गढ़ होने का अहसास कराया | जबकि कांग्रेस 31.37 से गिरकर 21.06 प्रतिशत में आ गई | जो सीधे तीसरे पायदान पर चला गया| जबकि बीजेपी ने 7.27 प्रतिशत की बढ़ोतरी करते हुए 33.36 प्रतिशत वोट के साथ दूसरे नंबर पर आ गई | इस बार जिला पंचायत सदस्य रहे अम्बेश जांगड़े को मैदान में उतारा था|  कहा जाता है इस चुनाव में कांग्रेस ने छत्तीसगढ़ी लोक गायक गोरेलाल बर्मन को चुनाव में उतारा था | किन्तु पामगढ़ की जनता ने उन्हें बाहरी प्रत्यासी के रूप में देखते हुए स्वीकार नहीं किया| जिसकी वजह से बसपा और बीजेपी का वोट प्रतिशत बढ़ा गया| लेकिन कांग्रेस को 10.31 प्रतिशत वोट का नुकसान हुआ |

2013 के विधानसभा चुनाव में कुल 72.12 प्रतिशत मतदान हुआ| इस चुनाव के परिणाम ने सभी को चौका दिया| इस चुनाव में बीजेपी के अम्बेश जांगड़े ने बाजी मारी, जिसकी किसी ने कल्पना नहीं की थी| यह पामगढ़ के इतिहास में बीजेपी की पहली जीत थी| बीजेपी ने इस चुनाव में 35.72 प्रतिशत वोट रहा| जो पिछले चुनाव से मात्र 2.36 प्रतिशत अधिक था| जबकि बसपा के दूज राम बौद्ध को 9.96 प्रतिशत वोट की भारी गिरावट हुई और उन्हें 29.32 प्रतिशत वोट ही मिले| कांग्रेस ने शेषराज हरवंश को प्रत्यासी बनाया था| हालाकि की इस बार 6.87 प्रतिशत का लाभ कांग्रेस को मिला लेकिन जीत के लिए ये काफी नहीं था और वे 27.93 प्रतिशत वोट लेकर तीसरे स्थान पर रही| कहा जाता है की पामगढ़ की जनता गरीबों के हितों को समझेगी यही सोचकर बसपा के गरीब कहे जाने वाले दूज राम बौद्ध को विधायक बनाया था, लेकिन जनता के इस विश्वास में वे खरा नहीं उतर पाए और 9.96 प्रतिशत का भारी नुकसान बसपा को उठाना पड़ा| साथ ही एक वजह ये भी माना जाता है की बसपा के पूर्व विधायक और छत्तीसगढ़ के कद्दावर नेता दाऊ राम रत्नाकर पार्टी के निष्कासन के बाद बगावती तेवर अपनाते हुए अपने प्रत्यासी को मैदान में उतारे थे| हालाकि वह मैदान में ज्यादा दम नहीं दिखा पाएं और महज 0.88 प्रतिशत वोट ही जुटा पाए| वही बीजेपी के जीत के पीछे कांग्रेस के बाहरी प्रत्यासी को भी एक बड़ी वजह माना जाता है|

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2018 के विधानसभा चुनाव में कुल 70.8 प्रतिशत मतदान हुआ | इस चुनाव में एक बार फिर बसपा ने अपने वोट प्रतिशत को बढ़ाते हुए जीत हासिल की| इस बार बसपा को 36.32 प्रतिशत वोट मिला जिससे इंदु बंजारे को सफलता मिली| पिछले चुनाव की तुलना में बसपा ने 7 प्रतिशत वोट की रिकवरी की| वही बीजेपी के मौजूदा विधायक अम्बेश जांगड़े को इस बार करारी हार का सामना करना पड़ा| उसे इस बार 23.68 प्रतिशत वोट मिले| जो पिछले चुनाव से 12.04 प्रतिशत वोट कम रहा और सीधे तीसरे पायदान पर चला गया|  कांग्रेस की आंधी के बीच भी दोबारा प्रत्यासी बनाए गए गोरेलाल बर्मन पामगढ़ की जनता को संतुष्ट नहीं कर पाए और दुसरे स्थान पर रहे| हलाकि की पिछले चुनाव की अपेक्षा 6.18 प्रतिशत वोट की बढ़ोतरी के साथ 34.11 प्रतिशत वोट मिले थे|  इस बार जीत अंतर मात्र 2.21 प्रतिशत रहा यानि मात्र 3061 वोट था| कहा जाता है की पामगढ़ में कांग्रेस की आंधी को रोकने में छत्तीसगढ़ के प्रथम मुख्यमंत्री अजीत जोगी का हल था| इस चुनाव में बसपा और नवनिर्मित क्षेत्रीय पार्टी जनता कांग्रेस का गठबंधन था| वही बीजेपी विधायक अम्बेश जांगड़े को संसदीय सचिव बनाए जाने के बाद भी क्षेत्र में अपना विश्वास कायम नहीं रख पाए| जिसकी वजह से उन्हें सीधे 12.04 प्रतिशत वोट नुकसान उठाना पड़ा था|

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इस बार कांग्रेस ने एक बार फिर पुराने प्रत्यासी शेषराज हरबंश को मैदान में उतारा है| जो पिछले 10 सालों से लगातार राजनीती में सक्रीय है| साथ ही प्रदेश स्तर में कई पदों की जिम्मेदारी भी सम्हाले हुई है| पहले चुनाव के दौरान वह राजनीति क्षेत्र में बिलकुल नई थी उन्हें चुनाव का कोई  ख़ासा अनुभव नहीं था| इस बार उनके साथ 10 सालों का अनुभव है| बीजेपी ने बसपा से असंतुष्ट होकर आए ग्राम पंचायत स्तर के नेता संतोष लहरे को मौका दिया है| कई बार वे जनपद सदस्य रह चुके है|  इन्हे पंचायत स्तर में चुनाव जितने का खासा अनुभव है| विधानसभा में पहली बार हाथ आजमा रहे हैं| वहीँ बसपा ने अपने मौजूदा महिला विधायक इंदु बंजारे पर अपना विश्वास कायम रखा है|  इनके पास एक जिला पंचायत और विधायक बनने का अनुभव है| अब देखना है की अपने किले को बचा पाने में कामयाब हो पाएंगी की नही|

इस विधानसभा में किसका पल्ला भारी रहेगा ये तो आने वाला समय ही बताएगा, लेकिन तीनों प्रत्याशियों को लेकर जनता के बीच कशमकश बनी हुई है| सभी दलों के नेताओं में अभी ख़ामोशी छाई हुई है| किसी को समझ नहीं आ रह है|  इस बार मतदाताओं को रिझाने में स्थानीय प्रत्यासी कामयाब रहेंगे की प्रदेश की राजनीति हवा में पामगढ़ की फ़िजा बह जाएगी|