पामगढ़ विधानसभा चुनाव में मुकाबला तो हर बार की तरह राष्ट्रीय पार्टियों के बीच है लेकिन सबसे चिंता की करने वाली बात है इन पार्टियों में इस बार आस्तीन के सांप की संख्या भी बहुत ज्यादा है। कहीं यही इन प्रत्याशियों को हर का मुख ना दिखा दे।
विशेष सूत्रों के अनुसार से बात निकाल कर सामने आई है कि सुबह शाम प्रत्याशियों के साथ घूमने उनका प्रचार वाले भरोसेमंद कार्यकर्ता रात के अंधेरे में ही कुछ और खेल खेलते नजर आ रहे हैं। जिससे मतदाताओं में भी भ्रम की स्थिति निर्मित हो गई है। इस कारण से वे सही प्रत्याशियों का चयन ही नहीं कर पा रहे हैं। मतदाताओं का सीधा संपर्क विधायक से न होकर अक्सर उनके प्रतिनिधियों से ही रहता है | जिनसे उनका हमेशा मेलजोल रहता है | जबकि विधायक या बड़े नेताओं को उन तक पहुँचाना संभव नहीं होता है| जनता अपनी समस्याओं को लेकर आसपास के ही प्रतिनिधियों के पास ही जाते हैं| ऐसे में प्रतिनिधि अगर मतदाताओं को सुबह कुछ और रात में कुछ और बात कहते हैं तो मतदाता भ्रम में आना स्वाभाविक हैं।
इस बार के विधानसभा चुनाव में यही देखने को मिल रहा है| प्रत्याशियों के पीछे झंडा लेकर जिंदाबाद के नारे लगाने वाले लोगों का तासीर समझ पाना किसी के बस की बात नहीं है | क्योकि की हर दुसरे दिन किसी अलग पार्टियों को झंडा उठाते हैं | मतदाता भी एक व्यक्ति को अलग-अलग दिन अलग-अलग पार्टियों के प्रचार में शामिल होता देखते हैं|
बहरहाल अब पाला प्रत्याशियों के हाथों से निकलकर कार्यकर्ताओं के हाथ में चला गया है| अब देखना है की कार्यकर्ता अपनी मेहनत और ईमानदारी से अपने प्रत्याशी के पक्ष में वोट दिलाते हैं की नहीं ?