माँ-बहन ने नहीं दिया मोबाईल, बच्चा पहुंचा थाना, कराई शिकायत, देखें अनोखा मामला

आज के समय में स्मार्टफोन के बिना बच्चे खाना भी नहीं खाते, घंटों तक मोबाइल स्क्रीन पर समय बिताने के चलते कई तरह के नकारात्मक प्रभाव भी पड़ सकते हैं. कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि मोबाइल की लत बच्चों को चिड़चिड़ा बना देती है. इतना ही नहीं ज्यादा समय तक फोन चलाने की वजह से उनका दिमाग धीरे-धीरे कमजोर होने लगता है. यहां तक कि उनकी याददाश्त भी कमजोर होने लगती है. हालांकि कई बार बच्चे फोन से दूरी बर्दाश्त नहीं कर पाते और मजबूरन घर के बड़ों कड़ा रुख अपनाना पड़ता है. हाल ही में मध्य प्रदेश से एक ऐसा ही मामला सामने आया है, जहां फोन चलाने से रोकने पर बच्चा अपनी शिकायत लेकर थाने पहुंच गया.

 

मां और बहन के खिलाफ दर्ज करवाई रिपोर्ट

आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, एमपी के इंदौर में कथित तौर पर मैसेज देखने के लिए मोबाइल उठाने पर मां और बड़ी बहन ने किशोर की पिटाई कर दी. किशोर भी इसके खिलाफ थाने पहुंच गया. उसने मां और बड़ी बहन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है. मामला सिमरोल थाना क्षेत्र का है. सातवीं में पढ़ने वाला किशोर अपने दादा के साथ रहता है. वह स्कूल की छुट्टियां होने पर छोटी बहन के साथ अपनी मां के पास लालघाटी-दतौदा पहुंचा. यहां उसकी मां और बड़ी बहन रहती है. किशोर ने अपनी शिकायत में कहा है कि उसके स्कूल में मां का मोबाइल नंबर दर्ज है और स्कूल की गतिविधियों से संबंधित सारे मैसेज मां के ही मोबाइल फोन पर आते हैं.

शनिवार की रात को वह जब मां के पास पहुंचा तो उसने स्कूल की गतिविधियां जानने के लिए मां का फोन उठा लिया. किशोर की मानें तो वह मां के मोबाइल पर स्कूल का मैसेज देखना चाहता था और जानना चाहता था कि सोमवार को स्कूल जाने के लिए क्या मैसेज है. इस पर मां ने नाराजगी जताई और उसकी पिटाई कर दी. बाद में बड़ी बहन ने भी उसको पीटा. तभी छोटी बहन जो किशोर के साथ दादा के यहां रहती है, वह बचाने लगी तो मां ने उसे भी पीटा और धमकाया भी.

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मां पर लगाया गंभीर आरोप

इस पूरे घटनाक्रम के बाद किशोर ने सिमरोल थाने में अपनी मां और बड़ी बहन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई है. किशोर ने आरोप लगाया है कि मां ने मारने के लिए धारदार हथियार भी उठा लिया था. इससे पहले भी मोबाइल को लेकर बच्चों और उनके अभिभावकों के बीच विवाद होने के कई मामले सामने आ चुके हैं. कई तो ऐसे प्रकरण हैं जब बच्चों ने मोबाइल की खातिर जान तक दे दी. मनोरोग विशेषज्ञों की मानें तो बच्चों में धैर्य की कमी हो रही है, और वे अपनी इच्छा के विपरीत कोई बात सुनने को तैयार नहीं होते. ऐसे में जरूरी है कि अभिभावक भी बच्चों की भावनाओं को समझें.