संघर्ष से सफलता तक : बालिका गृह की बेटियों ने जीता अंतर्राष्ट्रीय शतरंज चैंपियनशिप में स्वर्ण

भोपाल
भोपाल के बालिका गृह की कुछ खास बच्चियाँ गौरव की प्रतीक बन गई हैं। इन बच्चियों ने ‘फर्स्ट एशियन चेस फॉर फ्रीडम चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक हासिल किया और यह साबित कर दिया कि हालात चाहे जैसे भी हों, हौसले अगर बुलंद हों तो कोई भी सपना अधूरा नहीं रहता।

शुक्रवार को इन चैम्पियन बच्चियों ने महिला एवं बाल विकास मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया से मुलाकात की, तो माहौल भावनाओं से भर गया। आँखों में चमक, चेहरे पर आत्मविश्वास और मन में कुछ कर दिखाने की आग, हर बच्ची की मुस्कान एक नई कहानी कह रही थी। मंत्री सुश्री निर्मला भूरिया ने बच्चियों को बधाई दी और कहा कि ये सिर्फ एक जीत नहीं, ये समाज के लिए एक संदेश है कि हर बच्ची, चाहे वह किसी भी परिस्थिति में जन्मी हो, अगर उसे अवसर मिले तो वह सितारों को छू सकती है।उन्होंने बच्चियों का न केवल हौसला बढ़ाया बल्कि यह भी भरोसा दिलाया कि उनके सपनों को साकार करने के लिए सरकार हरसंभव मदद करेगी। सुश्री भूरिया ने कहा कि ये बेटियाँ अब सिर्फ बालिका गृह की बच्चियाँ नहीं रहीं। अब वे प्रेरणा बन चुकी हैं, उन लाखों बच्चों के लिए, जो अपने जीवन को एक नई दिशा देना चाहते हैं।

See also  रीवा के राजस्व विभाग में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर: बिना किसी सरकारी आदेश के बदल दिया गया किसान की जमीन का नक्शा, RTI में हुआ सनसनीखेज खुलासा सिरमौर/रीवा। मध्य प्रदेश के रीवा जिले के तहसील सिरमौर अंतर्गत ग्राम पिपरी में राजस्व अभिलेखों के साथ गंभीर छेड़छाड़ और 'डिजिटल फर्जीवाड़े' का एक बड़ा मामला सामने आया है। यहाँ एक किसान की निजी भूमि का नक्शा बिना किसी आवेदन, बिना किसी सक्षम न्यायालय के आदेश और बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के कंप्यूटर रिकॉर्ड (पोर्टल) पर बदल दिया गया है। क्या है पूरा मामला? ग्राम पिपरी निवासी आशीष मिश्रा (पिता श्री सम्पत प्रसाद मिश्रा) ने अपनी आराजी क्रमांक 88/1 एवं 88/2 के नक्शे में हुई संदिग्ध तरमीम (संशोधन) को लेकर सूचना के अधिकार (RTI) के तहत जानकारी मांगी थी। महीनों के चक्कर लगवाने और प्रथम अपील के बाद जो जवाब विभाग से मिला, उसने राजस्व विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। RTI में विभाग ने खुद स्वीकारी 'अंधेरगर्दी': लोक सूचना अधिकारी एवं नायब तहसीलदार वृत्त बैकुण्ठपुर ने अपने लिखित प्रतिवेदन (पत्र क्रमांक 292/2026 दिनांक 06/02/2026) में स्वीकार किया है कि: कंप्यूटर नक्शे में तो तरमीम (बदलाव) दिख रहा है, लेकिन मूल पटवारी नक्शा शीट (Field Map) में इसका कोई रिकॉर्ड नहीं है। राजस्व अभिलेखों (खसरा आदि) में इस तरमीम से संबंधित कोई भी प्रविष्टि दर्ज नहीं है। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विभाग को यह भी नहीं पता कि यह बदलाव किस वर्ष में हुआ और किस अधिकारी के आदेश से किया गया। यानी बिना किसी फाइल और बिना किसी आदेश के रातों-रात कंप्यूटर पर नक्शा बदल दिया गया। पीड़ित का आरोप: "राजस्व अमले की मिलीभगत से हुआ खेल" पीड़ित आशीष मिश्रा का कहना है कि उन्होंने इसके लिए दो बार आवेदन दिए और कई बार अधिकारियों के चक्कर काटे। उन्होंने आरोप लगाया कि पटवारी और संबंधित राजस्व कर्मचारियों ने निजी स्वार्थ के चलते अभिलेखों में कूट-रचना (Forgery) की है। पीड़ित ने अब एसडीएम सिरमौर से मांग की है कि इस अवैध तरमीम को तत्काल निरस्त किया जाए और उन दोषियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज की जाए जिन्होंने सरकारी पोर्टल के डेटा के साथ छेड़छाड़ की है। अधिकारियों की चुप्पी: बिना आदेश के नक्शा बदलने का यह मामला जिले में चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस 'डिजिटल सेंधमारी' को सुधारता है या फिर मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। पीड़ित ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द न्याय नहीं मिला तो वे उच्च न्यायालय (High Court) की शरण लेंगे। संपर्क हेतु (Contact Info): आशीष मिश्रा (पीड़ित) ग्राम पिपरी, तहसील सिरमौर, रीवा मोबाइल: 8959446240

आयुक्त महिला बाल विकास श्रीमती सूफिया फारुकी वली ने कहा कि इन बच्चों को प्रोत्साहन देना, इनका सबसे बड़ा सम्मान है। मिशन वात्सल्य की टीम के मोटिवेशन के साथ इन बच्चियों ने लगन और मेहनत से ये अपार सफलता प्राप्त की है। उन्होंने बच्चियों को बधाई देते हुए कहा कि आपने जीवन की निराशा को आशा में बदलकर अपने भविष्य को गढ़ा है।

उल्लेखनीय है कि 1st एशियन चेस फॉर फ्रीडम चैंपियनशिप ऑनलाइन चैंपियनशिप है। इसमें चार महाद्वीपों के 15 देशों ने भाग लिया। इंडियन ऑयल की परिवर्तन प्रिजन टू प्राइम के तहत इन बच्चियों को चेस खेल का प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षक श्री अभिजीत कुंटे ने बताया कि पहली बार जब मैं इन बच्चियों को प्रशिक्षण देने गया तो सब डरी सहमी थी, पर इनके जज्बे को सलाम है। इनकी लगातार 3-6 महीने की मेहनत ने इन्हें चैंपियन बना दिया है। श्री कुंटे ने कहा कि अब बालिकाएं अक्टूबर में वर्ल्ड चैंपियनशिप में भाग लेंगी।

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इस मुलाक़ात में बच्चियों ने बताया कि कैसे शतरंज ने उन्हें धैर्य, रणनीति और आत्मविश्वास सिखाया। वे चाहती हैं कि आने वाले समय में वे और भी बड़ी प्रतियोगिताओं में भाग लें और देश के लिए खेलें। उनकी देखभाल में जुटे प्रशिक्षकों और बाल संरक्षण अधिकारियों की आँखों में भी गर्व और संतोष था, मानो उनके प्रयासों को आज असली मुकाम मिला हो।