बिहार के बाद अब बंगाल में भी SIR लागू, चुनाव आयोग ने वोटर वेरिफिकेशन का आदेश दिया

नई दिल्ली

बिहार के बाद अब बंगाल में भी चुनाव आयोग ने मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया शुरू कर दी है. चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव को पत्र लिखकर इस बारे में सूचित किया है और राज्य के निर्वाचन अधिकारियों से मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण की प्रक्रिया शुरू करने को कहा है. बता दें कि बिहार में मतदाता सूची पुनरीक्षण का काम अपने अंतिम चरण में है. एसआईआर प्रक्रिया के तहत राज्य में 1 अगस्त को ड्राफ्ट वोटर लिस्ट जारी कर दी गई.

इस प्रक्रिया के बाद बिहार में करीब 65 लाख मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटेंगे. इनमें ज्यादातर वे मतदाता हैं, जो अब इस दुनिया में नहीं रहे. बाकी ऐसे वोटर हैं जो स्थायी रूप से किसी दूसरे राज्य में स्थानांतरित हो चुके हैं. कुछ ऐसे मतदाता भी हैं, जिनके नाम एक से ज्यादा निर्वाचन क्षेत्रों में दर्ज था. हालांकि, विपक्ष चुनाव आयोग द्वारा मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण का विरोध कर रहा है और इसे बीजेपी के इशारे पर वोटों की चोरी करार दे रहा है. 

See also  करोड़पति हैं हरियाणा के नए CM नायब सिंह सैनी, जान लीजिए नेटवर्थ

बिहार में विशेष मतदाता सूची संशोधन (SIR) का पहला चरण पूरा
बिहार में विशेष मतदाता सूची संशोधन (SIR) का पहला चरण पूरा हो चुका है, लेकिन इस दौरान राजनीतिक दलों की ओर से एक भी आपत्ति दर्ज या सुझाव नहीं मिला है. दूसरी ओर आम वोटरों ने मतदाता सूची को दुरुस्त करने में सक्रियता दिखाई और 1,927 मामले निर्वाचन आयोग के समक्ष दाखिल किए. ये मामले योग्य मतदाताओं को सूची में शामिल करने और अयोग्य मतदाताओं को हटाने से संबंधित हैं. जबकि 10,977 आवेदन फॉर्म-6 के तहत नए वोटर जोड़ने, हटाने और अन्य घोषणा पत्र से जुड़े हैं.

बिहार में आम वोटरों ने मतदाता सूची को साफ-सुथरा करने में निभाई भूमिका
बिहार में, राजनीतिक दलों की निष्क्रियता के बीच आम वोटरों ने मतदाता सूची को साफ-सुथरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है. आयोग को प्राप्त 1,927 शिकायतें और 10,977 आवेदन इस बात का प्रमाण हैं कि आम लोग अपने मताधिकार को लेकर सजग हैं. ये आवेदन मुख्य रूप से नए मतदाताओं को जोड़ने, गलत नाम हटाने और मतदाता सूची में सुधार से संबंधित हैं. राजनीतिक दलों की इस चुप्पी ने कई सवाल खड़े किए हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि विपक्षी दलों के करीब 60,000 बूथ लेवल एजेंट्स शायद अब तक मतदाता सूची में आपत्तिजनक नाम ढूंढ नहीं पाए हैं. वहीं, चुनाव आयोग ने सभी दलों और नागरिकों से अपील की है कि वे मतदाता सूची को और सटीक बनाने में सहयोग करें. आयोग ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची को अंतिम रूप देने से पहले सभी पक्षों को पर्याप्त वक्त दिया जाएगा.

See also  परिजनों ने जबरन कराई शादी, 23 दिन बाद प्रेमिका के साथ फांसी पर झूलाता मिला युवक