बिलासपुर रेलवे और जिला प्रशासन के बीच पिछले 60 घंटे से अपने अंतिम संस्कार के लिए मृतक प्रताप बर्मन का शव संघर्ष कर रहा है। परिजन शव की मांग लगातार कर रहे हैं लेकिन जिला प्रशासन अपने शर्तों पर अभी भी अड़ा हुआ है। जिला प्रशासन ना हीं मृतक के परिजनों की मांग की पूरी कर रहा है और ना हीं उनके पार्थिव शरीर को उन्हें सौंप रहा है। मृतक की पत्नी प्रशासन के सामने कई बार चीख चीख कर लाश उनके हवाले कर देने की बात कह रही है, लेकिन प्रशासन सुनने को तैयार नहीं है।
परिजनों के पास तमाम ऐसे साक्ष्य हैं जिसमें छत्तीसगढ़ शासन ने नियमों से हटकर पीड़ित परिवार को मुआवजा राशि दी है। लेकिन यहां पर घोर लापरवाही बरती गई है। जिसकी वजह से ठेका कर्मी प्रताप बर्मन की जान गई है। ऐसी स्थिति में नियमों को ताक में रहकर निर्णय दिया जा सकता है। लेकिन छत्तीसगढ़ सरकार की मनसा कुछ और ही है इसकी वजह से पीड़ित परिवार को पिछले 8 दिनों से सड़क पर संघर्ष करना पड़ रहा है। प्रशासन बीच-बीच में आती है और घिसा पिटा आश्वासन सुनाकर पीड़ित को मनाने का प्रयास करते हैं। किन्तु मृतक की पत्नी खुशबू बर्मन पढ़ी-लिखी और समझदार है। वो प्रशासन के वादों को अच्छी तरह से समझ रही है। जिसके कारण प्रशासन का बार-बार प्रयास असफल हो जा रहा है। फिलहाल शव बिलासपुर जिला चिकित्सालय के पोस्टमार्टम केंद्र में सुरक्षित रखा गया है।