फाइटर जेट को मिलेगा देसी दिल! साफरान के साथ स्वदेशी इंजन प्रोजेक्ट क्यों है गेमचेंजर?

नई दिल्ली

भारत हमेशा से अपने फाइटर जेट इंजन को स्वदेशी बनाने की कोशिश कर रहा है, ताकि अमेरिका या अन्य देशों पर निर्भरता खत्म हो. हाल ही में फ्रांस की कंपनी साफरान (Safran) के साथ 120 kN थ्रस्ट वाले इंजन के विकास का समझौता हुआ है, जो एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) के लिए बनेगा. 

यह प्रोजेक्ट 61,000 करोड़ रुपये का है. 10 साल में पूरा होगा. आइए, समझतें हैं कि यह प्रोजेक्ट भारत के लिए कितना महत्वपूर्ण है? 

भारत की इंजन समस्या: विदेशी निर्भरता

भारत के फाइटर जेट्स जैसे तेजस, सुखोई-30 और राफेल में ज्यादातर इंजन विदेशी हैं. तेजस में GE F404 (अमेरिका) और सुखोई में AL-31FP (रूस) लगे हैं. कावेरी इंजन प्रोजेक्ट 1980 के दशक से चल रहा है, लेकिन यह 90-100 kN थ्रस्ट नहीं दे पाया.

कावेरी को तेजस से अलग कर दिया गया. अब इसका डेरिवेटिव वर्जन ड्रोन (Ghatak UCAV) के लिए इस्तेमाल हो रहा है. कावेरी पर 35 साल और 400 मिलियन डॉलर खर्च हुए, लेकिन तकनीकी चुनौतियां (जैसे सिंगल क्रिस्टल ब्लेड और थर्मल कोटिंग) ने इसे रोक दिया.

See also  बांग्लादेश की टेस्ट में सबसे बड़ी जीत:अफगानिस्तान को 546 रन से हराया, शांतो ने दोनों पारियों में शतक जमाए ढाका3 घंटे पहले इंटरनेशनल क्रिकेट के टेस्ट इतिहास में यह किसी भी टीम की तीसरी सबसे बड़ी जीत है। - Dainik Bhaskar इंटरनेशनल क्रिकेट के टेस्ट इतिहास में यह किसी भी टीम की तीसरी सबसे बड़ी जीत है। बांग्लादेश ने अफगानिस्तान को इकलौते टेस्ट मैच में 546 रनों से हराया। ये बांग्लादेश की टेस्ट में सबसे बड़ी जीत है, जबकि इंटरनेशनल टेस्ट इतिहास में किसी भी टीम की रनों के लिहाज से तीसरी सबसे बड़ी जीत है। इससे पहले इंग्लैंड ने 1928 में ऑस्ट्रेलिया को 675 रनों से हराया था, जबकि 1934 में ऑस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 562 रनों से हराया था। बांग्लादेश के खिलाफ दूसरी पारी में मिले 662 रनों के टारगेट का पीछा करने उतरी अफगानिस्तान की टीम 115 रन ही बना सकी। अफगानिस्तान ने चौथे दिन आखिरी 5 विकेट 35 रन के अंदर गंवा दिए। बांग्लादेश की ओर से नजमुल हुसैन शांतो ने दोनों पारियों में शतक लगाए। इसके अलावा बांग्लादेश की ओर से शोरीफुल इस्लाम और एबोदत हुसैन ने दोनों पारियों में 5-5 विकेट लिए। इससे पहले बांग्लादेश ने टॉस हार कर पहले बल्लेबाजी करते हुए पहली पारी में 382 रन और दूसरी पारी में 4 विकेट पर 425 रन बनाने के बाद पारी घोषित कर दी। वहीं अफगानिस्तान ने पहली पारी में 146 और दूसरी पारी में 115 रन बनाए।

इस निर्भरता से समस्या बढ़ी. 2021 में GE F404 इंजन की डिलीवरी में देरी हुई, जिससे तेजस Mk1A प्रोडक्शन रुका. रूस-यूक्रेन युद्ध ने AL-31FP की सप्लाई प्रभावित की. AMCA (5th जेनरेशन स्टील्थ फाइटर) के लिए 110-120 kN इंजन चाहिए, जो स्वदेशी न होने से देरी हो रही है. साफरान प्रोजेक्ट इसी समस्या का समाधान है.

साफरान प्रोजेक्ट: क्या है और कैसे काम करेगा?

साफरान (फ्रांस की कंपनी, जो राफेल के M88 इंजन बनाती है) के साथ यह प्रोजेक्ट 22 अगस्त 2025 को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने घोषित किया. यह 120 kN थ्रस्ट वाला टर्बोफैन इंजन AMCA Mk2 के लिए बनेगा. लागत 7 बिलियन डॉलर (लगभग 61,000 करोड़ रुपये) है. 100% टेक्नोलॉजी ट्रांसफर होगा.

समझौते की मुख्य बातें

    10 साल का विकास: 2035 तक इंजन तैयार. AMCA के साथ एकीकृत.
    सह-विकास: GTRE (DRDO का लैब) और साफरान मिलकर डिजाइन करेंगे.
    स्वदेशी निर्माण: भारत में ही इंजन बनेंगे, जिसमें सिंगल क्रिस्टल ब्लेड, थर्मल बैरियर कोटिंग और एडवांस्ड कॉम्बस्टर जैसी तकनीकें शामिल.
    निर्यात संभावना: AMCA के साथ निर्यात बढ़ेगा, क्योंकि स्वदेशी इंजन से लागत कम होगी.

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रक्षा मंत्रालय ने साफरान को चुना क्योंकि इसका प्रस्ताव सबसे फायदेमंद था. अमेरिका की GE और ब्रिटेन की Rolls-Royce भी दौड़ में थे, लेकिन साफरान ने 100% ट्रांसफर और कावेरी से लिंकेज का वादा किया. साफरान पहले कावेरी पर सहयोग कर चुकी है (2016 में €1 बिलियन का ऑफर).

साफरान प्रोजेक्ट का महत्व: आत्मनिर्भर भारत के लिए मील का पत्थर

यह प्रोजेक्ट भारत के रक्षा क्षेत्र के लिए क्रांतिकारी है. इसके फायदे…

विदेशी निर्भरता खत्म: कावेरी की असफलता के बाद भारत GE, Safran और Rolls-Royce पर निर्भर था. अब AMCA, TEDBF और भविष्य के फाइटर जेट्स के लिए स्वदेशी इंजन मिलेगा. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि यह 5th जेनरेशन फाइटर के लिए बड़ा कदम है.

AMCA प्रोग्राम को गति: AMCA (5th जेनरेशन स्टील्थ फाइटर) 2035 तक तैयार होगा. पहले GE F414 इंजन इस्तेमाल होगा, लेकिन साफरान इंजन से AMCA Mk2 स्वदेशी बनेगा. लागत 15,000 करोड़ रुपये की और 5 प्रोटोटाइप बनेंगे.

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तकनीकी आत्मनिर्भरता: इंजन सबसे जटिल भाग है. साफरान से 100% ट्रांसफर मिलने से भारत सिंगल क्रिस्टल ब्लेड, लेजर ड्रिलिंग और हॉट-एंड कोटिंग जैसी तकनीक सीखेगा. कावेरी का अनुभव (49 kN थ्रस्ट) साफरान प्रोजेक्ट को मदद करेगा.

आर्थिक और निर्यात लाभ: इंजन 40% लागत होता है. स्वदेशी इंजन से AMCA सस्ता बनेगा. निर्यात बढ़ेगा. HAL और GTRE को नया बिजनेस मिलेगा. MSMEs को भी अवसर.

रणनीतिक सुरक्षा: युद्ध या प्रतिबंध के समय विदेशी इंजन की सप्लाई रुक सकती है. स्वदेशी इंजन से भारत सुरक्षित रहेगा.

चुनौतियां और भविष्य

प्रोजेक्ट में चुनौतियां हैं: फंडिंग (केवरी पर 35 साल में $400 मिलियन खर्च, लेकिन असफल), तकनीकी जटिलताएं और समय (10 साल). लेकिन साफरान का अनुभव (M88 इंजन) मदद करेगा. कावेरी डेरिवेटिव इंजन अब ड्रोन (Ghatak UCAV) के लिए इस्तेमाल हो रहा है. भविष्य में कावेरी 2 (90-110 kN) और कावेरी 3 (125 kN) साफरान से प्रेरित होंगे. 2025 में साफरान हैदराबाद में मेंटेनेंस सेंटर खोलेगा.