गाजा संकट: अमेरिका भी मान गया, कूटनीति से समाधान नहीं, इजरायल ने शुरू किए भीषण हमले

 तेल अवीव

कतर में सोमवार को 60 मुस्लिम देशों की मीटिंग हुई, जिसमें इजरायल के खिलाफ प्रस्ताव पारित हुआ। वहीं उसी समय इजरायल में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो मौजूद थे। उन्होंने इजरायल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के साथ कई घंटे तक मीटिंग की और मीडिया से बात की। इस दौरान उन्होंने साफ किया कि गाजा में जारी जंग का कोई कूटनीतिक समाधान होने की उम्मीद नहीं दिखती। उन्होंने कहा कि हमास एक आतंकी और बर्बर संगठन है। वह जब तक सरेंडर नहीं करेगा, तब तक फिलिस्तीन के मसले पर किसी समाधान की उम्मीद करना बेमानी होगा।

उनका यह स्टैंड अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से एकदम उलट है, जिन्होंने पिछले दिनों कहा था कि जल्दी ही गाजा में जंग समाप्त होगी। मार्को रुबियो के बयान से स्पष्ट है कि गाजा में अब इजरायल और आक्रामक हो सकता है क्योंकि उसे अमेरिका की ओर से समर्थन हासिल है। यही नहीं इजरायल ने गाजा पर हमले करना शुरू भी कर दिया है। सोमवार देर रात से ही इजरायल की ओर से गाजा पर हमले जारी हैं। रुबियो ने कहा कि हम चाहते हैं कि जंग समाप्त हो, लेकिन हमास एक आतंकी संगठन है, जो सरेंडर नहीं कर रहा है। उसके सरेंडर किए बिना गाजा में जंग का कोई कूटनीतिक समाधान निकलने की उम्मीद बेहद कम है।

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उन्होंने कहा कि हमास का घोषित लक्ष्य इजरायल की बर्बादी है। उसने लगातार कई हमले इजरायल पर किए हैं। इसलिए उसके खात्मे के साथ ही समाधान संभव है। फिलहाल गाजा में भीषण हमलों का दौर जारी है। इजरायल की चेतावनी के बाद से हजारों लोग गाजा छोड़कर निकल रहे हैं। इसी को लेकर रुबियो ने चेतावनी दी है कि हमास के पास कुछ दिन का ही वक्त बचा है। वह सीजफायर डील को स्वीकार कर ले या फिर गाजा पर इसी तरह बमबारी जारी रहेगी। इजरायल ने तो ऑपरेशन शुरू भी कर दिया है। हालांकि इजरायल के लिए भी राह आसान नहीं है। एक तरफ मुस्लिम देश एकजुट हैं तो वहीं यूरोप के कई मुल्क भी इजरायल के खिलाफ हैं।

अब लग्जमबर्ग का भी कहना है कि वह संयुक्त राष्ट्र आम सभा में फिलिस्तीन को मान्यता देने के प्रस्ताव का समर्थन करेगा। इससे पहले ब्रिटेन, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया जैसे देश भी ऐसा प्रस्ताव रख चुके हैं। बता दें कि रुबियो ने इजरायल की यात्रा के बाद अब कतर का दौरा किया है। वहीं कतर के पीएम इस्लामिक देशों की मीटिंग से पहले अमेरिका गए थे। माना जा रहा है कि अमेरिकी दखल के चलते ही कतर शांत है और मध्यस्थता की मीटिंग जारी रखने पर सहमत है। वहीं नेतन्याहू का कहना है कि कतर पर हमले से पहले उन्होंने डोनाल्ड ट्रंप को जानकारी दी थी, लेकिन उनकी ओर से रोका नहीं गया।

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