नहीं रहे अंग्रेजों के जमाने के जेलर, 84 साल की उम्र में असरानी ने दुनिया से कहा अलविदा

पॉपुलर एक्टर गोवर्धन असरानी का 20 अक्टूबर को निधन हो गया। वो 84 साल के थे। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, फेफड़ों में पानी भरने की वजह से असरानी चार दिन से हॉस्पिटल में भर्ती थे और यही उनकी मौत का कारण बना। वहीं अब उनका अंतिम संस्कार सांताक्रूज के शांतिनगर स्थित श्मशान में किया गया। उनके यूं चले जाने से पूरी इंडस्ट्री में शोक की लहर दौड़ उठी है। अपने निधन से कुछ घंटे पहले ही उन्होंने सोशल मीडिया पर अपने फैंस को दिवाली की शुभकामनाएं दी थीं।

 

असरानी पिछले पांच दिनों से आरोग्य निधि अस्पताल में फेफड़ों की समस्या के चलते भर्ती थे. एक्टर के मैनेजर बाबुभाई थीबा ने असरानी के निधन की पुष्टी करते हुए बताया है कि उनकी तबीयत कई दिनों से खराब थी और वो अस्पताल में भर्ती थे.

 

कौन थे असरानी?

गोवर्धन असरानी का जन्म राजस्थान के जयपुर में हुआ था। उन्होंने पांच दशकों से भी ज्यादा के करियर में 350 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। गोवर्धन ने साल 1970 में फिल्म में अपने करियर की शुरुआत की। हालांकि, उन्हें असली पहचान फिल्म ‘मेरे अपने’ से मिली। असरानी ने 1975 की क्लासिक फिल्म ‘शोले’ में सनकी जेलर की भूमिका निभाकर दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बनाई थी। हालांकि, फिल्म में उनका स्क्रीन टाइम कम था, लेकिन उनका अभिनय, खासकर उनका ‘हम अंग्रेजों के जमाने के जेलर हैं’ वाला डॉयलाग यादगार बन गया।

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उन्होंने एक दशक के अंदर सबसे ज्यादा हिंदी फिल्मों में कैरेक्टर एक्टर और कॉमिक एक्टर के रूप में काम किया है, 1970 के दशक में 101 और 1980 के दशक में 107 फिल्मों में अभिनय किया। फिल्मों के अलावा उन्हें टेलीविजन पर भी उतना ही प्यार मिला, खासकर दूरदर्शन के 1985 के धारावाहिक नटखट नारद में नारद की भूमिका के लिए।

 

असरानी ने जीता था ये खास अवॉर्ड

असरानी हिंदी सिनेमा में, खासकर 1970 और 1980 के दशक की हर फिल्मों में नजर आते थे। खासकर कॉमिक फिल्मों में, उन्हें ऋषिकेश मुखर्जी, बासु चटर्जी, बीआर चोपड़ा और केआर राव जैसे निर्देशकों का पसंदीदा बना दिया। उन्होंने 2000 के दशक में डेविड धवन और प्रियदर्शन जैसे फिल्म निर्माताओं के साथ काम करते हुए, कॉमेडी की अगली पीढ़ी में भी अपना जादू चलाया। उन्होंने ‘हेराफेरी’, ‘जो जीता वही सिकंदर’ और ‘घरवाली बाहरवाली’ जैसी हिट फिल्मों में अभिनय किया था। उन्होंने ‘आज की ताजा खबर’ और ‘बालिका बधू’ दोनों के लिए बेस्ट कॉमिक एक्टर का फिल्मफेयर पुरस्कार जीता था।

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असरानी ने इस फिल्म से किया था डेब्यू

असरानी के यूं अचानक चले जाने से आम लोगों के साथ-साथ फिल्मी सितारे भी सदमे में हैं. उन्होंने अपने करियर में सैकड़ों फिल्मों में काम किया. असरानी का जन्म 1 जनवरी 1941 को जयपुर में हुआ था. उन्होंने जयपुर के सेंट जेवियर्स स्कूल से पढ़ाई की थी. इसके बाद राजस्थान कॉलेज से ग्रैजुएशन भी किया था. साल 1967 में फिल्म हरे कांच की चूड़ियां से असरानी ने सिनेमा की दुनिया में कदम रखा था. इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा.

 

असरानी का परिवार

असरानी ने मंजू बंसल से साल 1973 में शादी की थी. असरानी का एक बेटा भी है, जिनका नाम नवीन असरानी है और वो अहमदाबाद में डेंटिस्ट हैं. असरानी के पिता कार्पेट की दुकान चलाया करते थे. उनकी तीन भाई और चार बहने थीं. असरानी उन चुनिंदा कलाकारों में से थे, जिन्होंने फिल्मी दुनिया में 50 साल से भी ज्यादा तक काम किया.

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असरानी ने कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ली

असरानी ना केवल एक एक्टर थे, बल्कि एक राजनेता भी रहे. उन्होंने 2004 में कांग्रेस पार्टी की सदस्यता ली और लोकसभा चुनावों में सक्रिय रूप से हिस्सा लिया. लेकिन बॉलीवुड में उनकी शुरुआत आसान नहीं थी. उन्होंने जया भादुड़ी की फिल्म ‘गुड्डी’ से डेब्यू किया, जो हिट रही और उनकी एक्टिंग को सराहा गया. फिर भी, उनका संघर्ष खत्म नहीं हुआ.

 

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