कारोबारियों के लिए डबल गुड न्यूज़: अमेरिका से ट्रेड डील मंजूर, सरकार ने भी दी राहत

नई दिल्‍ली
 भारतीय कारोबारियों और निर्यातकों को एक ही दिन में दो-दो खुशखबरी मिली है. पहले तो अमेरिका के साथ ट्रेड डील लगभग कन्‍फर्म होने की खबर आई, जिससे टैरिफ 50 से घटकर 15 तक आ सकता है. अब सरकार ने भी निर्यातकों को मिलने वाली टैक्‍स व शुल्‍क में छूट का दायरा बढ़ाने का फैसला किया है. इसके तहत निर्यातकों के लिए दो योजनाओं आरओडीटीईपी और आरओएससीटीएल के तहत अधिसूचित दरों की समीक्षा के लिए पूर्व सचिव नीरज कुमार गुप्ता की अध्यक्षता में एक समिति भी बनाई है.

सरकार अभी निर्यात किए जाने वाले उत्‍पादों पर शुल्क एवं टैक्‍स की छूट योजना (आरओडीटीईपी) उन कर, व शुल्क को लौटाने (रिफंड) का प्रावधान करती है जो निर्यातकों द्वारा वस्तुओं के विनिर्माण एवं वितरण की प्रक्रिया में खर्च किए जाते हैं. इनका कंपेनसेशन केंद्र, राज्य या स्थानीय स्तर पर किसी अन्य तंत्र के तहत नहीं किया जाता है. अब इस योजना को मार्च 2026 तक बढ़ा दिया गया है. वर्तमान आरओडीटीईपी दरें 0.3 से 4.3 फीसदी के बीच हैं.

See also  RBI की बड़ी कार्रवाई: इस बैंक से ग्राहक सिर्फ 10,000 रुपए ही निकाल पाएंगे

कपड़ा निर्यातकों के लिए अलग योजना
परिधान यानी कपड़ा निर्यातकों के लिए साल 2021 में राज्य एवं केंद्रीय कर एवं शुल्क में छूट (आरओएससीटीएल) योजना की घोषणा की गई थी. इसके तहत उन्हें अपने निर्यात पर केंद्रीय एवं राज्य करों में छूट मिलती है. आरओएससीटीएल योजना के तहत, परिधानों के लिए छूट की अधिकतम दर 6.05 प्रतिशत है, जबकि सिले हुए (मेड-अप) कपड़ों के लिए यह 8.2 प्रतिशत तक है. परिधान और सिले हुए कपड़े जैसे घरेलू वस्त्र इस योजना के अंतर्गत आते हैं.

दरों को निर्धारित करने पर बात करेगी समिति
सरकारी आदेश के अनुसार, समिति के दो सदस्य सीमा शुल्क एवं केंद्रीय उत्पाद शुल्क के पूर्व प्रधान मुख्य आयुक्त एस.आर. बरुआ और केंद्रीय उत्पाद एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) के पूर्व सदस्य विवेक रंजन हैं. इसमें कहा गया कि समिति प्रशासनिक मंत्रालयों, निर्यात संवर्धन परिषदों, जिंस बोर्ड, व्यापार निकायों और अन्य हितधारकों के साथ बातचीत करेगी ताकि आरओएससीटीएल और आरओडीटीईपी दरों पर उनके विचार हासिल किए जा सकें.

See also  झटके में 6.40 लाख करोड़ की कमाई, आज बाजार ने निवेशकों को कर दी मौज!

मौजूदा तरीकों की होगी समीक्षा
समिति के सदस्‍य निर्यातित उत्पाद पर लगने वाले केंद्रीय, राज्य व स्थानीय स्तर पर शुल्क/कर/उपकर की गणना के लिए तौर-तरीके तय करेगी जिसमें निर्यातित उत्पाद के उत्पादन में प्रयुक्त वस्तुओं एवं सेवाओं पर पूर्व चरण के लिए वसूले गए अप्रत्यक्ष कर भी शामिल होंगे. समिति घरेलू शुल्क क्षेत्रों विशेष आर्थिक क्षेत्रों और अग्रिम प्राधिकरण धारकों से निर्यात के लिए आरओडीटीईपी और आरओएससीटीएल योजनाओं के तहत अधिकतम दरों की सिफारिश करेगी. समिति अपनी मुख्य रिपोर्ट 31 मार्च 2026 तक सरकार को सौंप देगी.

क्‍या होगा इसका फायदा
इन योजनाओं के तहत स्थानीय कर के वापस मिलने (रिफंड) से वैश्विक बाजारों में भारतीय कारोबारियों को प्रतिस्पर्धा बढ़ाने में मदद मिलती है. इस साल अप्रैल-सितंबर के दौरान निर्यात 3.02 प्रतिशत बढ़कर 220.12 अरब डॉलर हो गया, जबकि आयात 4.53 प्रतिशत बढ़कर 375.11 अरब डॉलर रहा है. फिलहाल भारत का व्यापार घाटा 154.99 अरब डॉलर है, जिसे नीचे लाने के लिए ही सरकार प्रोत्‍साहन योजनाएं चलाती है.

See also  पेट्रोल-डीजल और LPG पर बढ़ सकती है महंगाई, गीता गोपीनाथ की चेतावनी से बढ़ी चिंता