पाकिस्तान की तालिबान को धमकी: माने नहीं तो तख्तापलट होगा — सीमा पार साजिश की बू तेज़

इस्लामाबाद 
अफगानिस्तान से तनाव के बीच अब पाकिस्तान तालिबान को सत्ता परिवर्तन की गीदड़भभकी देने लगा है। पाकिस्तान ने कहा है कि अगर अफगानिस्तान सुलह के रास्ते पर नहीं आता और सुरक्षा से संबंधित उसकी सारी मांगें नहीं मानता है तो वह सत्ता परिवर्तन के लिए तैयार रहे। पाकिस्तान ने कहा है कि काबुल में सत्ता को चुनौती देने वाली ताकत का वह समर्थन करेंगा।
 
सूत्रों के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा है कि पाकिस्तान ने मध्यस्थता करने वाले तुर्की के अधिकारियों के माध्यम से तालिबान को यह धमकी दी है। बता दें कि पाकिस्तान कहता है कि अफगान धरती पर तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान को जगह ना दी जाए। वहीं अफगानिस्तान पहले ही टीटीपी से किसी भी तरह के संबंध से इनकार कर चुका है। अफगानिस्तान का कहना है कि वह अपनी धऱती का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए नहीं होने देता है। इसीलिए किसी भी तरह के लिखित समझौते पर अफगानिस्तान ने हस्ताक्षर नहीं किए।

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पूर्व राष्ट्रपतियों से संपर्क साधने लगा पाक?
पाकिस्तान को लगता है कि अफगानिस्तान को रुख उसके लिए खतरा बन गया है। शीर्ष सूत्रों के हवाले से बताया गया कि पाकिस्तान की खुफइया एजेंसियां अब अफगान की पूर्व सरकार के नेताओं से संपर्क साधने लगी हैं। इनमें पूर्व राष्ट्रपति हामिद करजाई, अशरफ गनी, अहमद मसूद जैसे नेता शामिल हं। इसके अलावा अफगानिस्तान फ्रीडम फ्रंट और नॉर्दर्न अलायंस के अब्दुल राशिद दोस्तम से भी संपर्क साधा जा रहा है। जानकारी के मुताबिक पाकिस्तान ने इन नेताओं को पनाह देने का वादा किया है ताकि वे पाकिस्तान की धऱती से अफगानिस्तान की सत्ता परिवर्तन को हवा दे सकें।

क्या है पाकिस्तान की मांग
बता दें कि तुर्की और कतर की मध्यस्थता में तीन बार पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच वार्ता हो चुकी है। हालांकि इसका कोई परिणाम नहीं निकला। इस्लामाबाद की मांग है कि तालिबान टीटीपी पर सख्त ऐक्शन ले और टीटीपी के आतंकियों को उसके हवाले कर दे। इसके अलावा टूरंड लाइन पर बफर जोन बनाया जाए।

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इसी बीच पाकिस्तान के पंजाब प्रांत की सरकार ने गैर-कानूनी अफगान निवासियों पर अपनी कार्रवाई तेज कर दी है, और सिर्फ इस महीने में ही 6,000 से ज़्यादा लोगों को अफगानिस्तान वापस भेज दिया। एक मंत्री ने यह जानकारी दी। पंजाब सरकार ने उन पाकिस्तानियों को ‘‘नकद इनाम’’ भी दिया है, जिन्होंने 13 करोड़ की आबादी वाले इस प्रांत में गैर-कानूनी तरीके से रह रहे अफगानों के बारे में जानकारी दी।