चिंता जताने के बावजूद पाकिस्तान को IMF ने दिए 1.2 अरब डॉलर, जारी हुआ नया राहत पैकेज

इस्लामाबाद

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने पाकिस्तान की आर्थिक अस्थिरता और सुधारों में कमी पर चिंता जताने के बावजूद देश को 1.2 अरब डॉलर की नई किस्त जारी कर दी है। यह राशि पाकिस्तान की विदेशी मुद्रा भंडार को मजबूत करने और महंगाई को नियंत्रित करने में सहायक होगी, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम दीर्घकालिक सुधारों के बिना जोखिम भरा हो सकता है।

IMF ने पाकिस्तान को 1.2 अरब डॉलर की तीसरी किस्त जारी करने की घोषणा की। यह धनराशि उन दो कार्यक्रमों के तहत दी गई है, जिनका उद्देश्य देश में आर्थिक सुधारों को समर्थन देना और जलवायु परिवर्तन के प्रभावों को कम करना है। इस ताजा किस्त के साथ वाशिंगटन स्थित संस्था द्वारा इस्लामाबाद को अब तक कुल 3.3 अरब डॉलर जारी किए जा चुके हैं।

आईएमएफ के उप प्रबंध निदेशक नाइजल क्लार्क ने एक बयान में कहा कि पाकिस्तान द्वारा लागू किए गए सुधारों ने हालिया झटकों के बावजूद मैक्रोइकॉनॉमिक स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने विशेष रूप से इस वर्ष की मॉनसून बाढ़ों का उल्लेख किया, जिनमें सितंबर तक 1,000 से अधिक लोगों की जान चली गई थी।

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क्लार्क ने कहा कि पाकिस्तान सरकार द्वारा प्राथमिक राजकोषीय संतुलन लक्ष्य को हासिल करने की प्रतिबद्धता, साथ ही बाढ़ प्रभावितों को जरूरी आपात सहायता प्रदान करना, उनकी वित्तीय विश्वसनीयता को मजबूत करने की दिशा में एक सकारात्मक संकेत है।

हालांकि, आईएमएफ अधिकारी ने सरकार से आर्थिक डेटा कलेक्शन में सुधार, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के निजीकरण और निवेश को बढ़ावा देने जैसे प्रमुख सुधारों की गति तेज करने का आग्रह भी किया।
गंभीर आर्थिक संकट में फंसा पाकिस्तान

पाकिस्तान पिछले कई वर्षों से लंबे आर्थिक और राजनीतिक संकट से जूझ रहा है। विदेशी कर्ज पर भारी निर्भरता रखने वाला देश 2023 में डिफॉल्टर होने से बाल-बाल बचा। तब 2024 में आईएमएफ द्वारा 7 अरब डॉलर के बेलआउट पैकेज की मंजूरी मिली थी।

दक्षिण एशियाई यह देश अर्जेंटीना और यूक्रेन के बाद आईएमएफ का तीसरा सबसे बड़ा देनदार है। वित्तीय मोर्चे पर राहत पाने के लिए पाकिस्तान ने जनवरी 2024 में विश्व बैंक से 10 वर्षों के लिए 20 अरब डॉलर के वित्तीय पैकेज पर भी समझौता किया था।

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आईएमएफ की ताजा किश्त से पाकिस्तान को विदेशी मुद्रा भंडार को स्थिर रखने और सुधार प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में कुछ राहत मिलने की उम्मीद है, लेकिन आर्थिक विशेषज्ञों के अनुसार वास्तविक आर्थिक सुधारों को तेज़ी से लागू किए बिना स्थिति में स्थायी सुधार की संभावना अभी सीमित है।