सम्पत्ति बंटवारे को लेकर कोई एक ‘नया नियम’ नहीं, बल्कि पैतृक संपत्ति में बेटियों के समान अधिकार (हिन्दू उत्तराधिकार अधिनियम 2005) और हालिया अदालती फैसलों से बदलाव आए हैं, जो संपत्ति के बंटवारे को और स्पष्ट करते हैं, खासकर परिवार के सदस्यों (महिला-पुरुष) के अधिकारों को सुरक्षित रखते हुए और प्रक्रिया को तेज करने के लिए, जिसमें अपंजीकृत (unregistered) बंटवारे को भी कुछ शर्तों के साथ स्वीकार्यता मिली है और ‘वन-डे’ बंटवारे जैसी तेज प्रक्रियाएं (UP में) भी शुरू हुई हैं। 1 जनवरी 2026 से रजिस्ट्री नियमों में भी बदलाव आए हैं, जो इसे डिजिटल और पारदर्शी बना रहे हैं।
मुख्य बदलाव और नियम:
- बेटियों के समान अधिकार (Hindu Succession Act, 2005):
- पैतृक संपत्ति में बेटियों का जन्म से ही बेटों के बराबर अधिकार है, चाहे उनका जन्म 2005 से पहले हुआ हो या बाद में, यह सुप्रीम कोर्ट के विनीता शर्मा मामले (2020) के फैसले से स्पष्ट है।
- पारिवारिक समझौता (Family Settlement):
- सुप्रीम कोर्ट ने फैसला दिया है कि पारिवारिक सहमति से हुआ अपंजीकृत (unregistered) बंटवारा भी अदालत में मान्य हो सकता है, यदि सभी पक्षकार सहमत हों और उसमें शामिल हों।
- यह परिवार के सदस्यों के बीच विवादों को सुलझाने और शांति बनाए रखने का एक तरीका है।
- बंटवारे के बाद अधिकार:
- एक बार संपत्ति का कानूनी रूप से बंटवारा हो जाने के बाद, वह हिस्सा व्यक्तिगत संपत्ति बन जाता है और उस पर मालिक पूर्ण अधिकार रखता है (बेचना, दान करना, वसीयत करना)।
- तेज और डिजिटल प्रक्रिया (UP में ‘वन-डे’ डिविजन):
- उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में ‘वन-डे’ प्रॉपर्टी डिवीजन की प्रक्रिया शुरू हुई है, जहाँ सभी वारिसों की सहमति और सही दस्तावेजों के साथ एक दिन में बंटवारा और रजिस्ट्री हो सकती है।
- भूमि अभिलेखों का डिजिटलीकरण और ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से रजिस्ट्री प्रक्रिया को तेज़ और पारदर्शी बनाया जा रहा है।
- नए संपत्ति कानून (2026):
- 1 जनवरी 2026 से जमीन-मकान की रजिस्ट्री और बंटवारे के नियमों में बड़े बदलाव लागू किए गए हैं, जिसका उद्देश्य बुजुर्गों और महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित करना है।
भारत सरकार ने 1 जनवरी 2026 से संपत्ति (Property) से जुड़े कानूनों में ऐतिहासिक बदलाव लागू किए हैं। ये नए नियम जमीन, मकान, दुकान और प्लॉट की रजिस्ट्री से लेकर बंटवारे तक की प्रक्रिया को पूरी तरह बदल देंगे। इन बदलावों का उद्देश्य पारिवारिक विवादों को कम करना और बुजुर्गों व महिलाओं के अधिकारों को सुरक्षित करना है।
1. माता-पिता की सेवा न करने पर वापस ली जा सकेगी संपत्ति
नए कानून के तहत बुजुर्ग माता-पिता के हितों की रक्षा के लिए सख्त प्रावधान किए गए हैं।
- नियम: यदि बच्चे अपने माता-पिता की सेवा या देखभाल नहीं करते हैं, तो माता-पिता द्वारा बच्चों को दी गई या उनके नाम ट्रांसफर की गई संपत्ति (गिफ्ट डीड) को कानूनी रूप से वापस लिया जा सकता है।
- सुप्रीम कोर्ट का फैसला: न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि संपत्ति का हस्तांतरण केवल कागजी कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह बच्चों की जिम्मेदारी से भी जुड़ा है। “मेंटेनेंस एंड वेलफेयर ऑफ पेरेंट्स एंड सीनियर सिटीजन एक्ट” के तहत ट्रिब्यूनल को ऐसे बच्चों को घर से बेदखल करने का अधिकार भी दिया गया है।
2. पिता की संपत्ति पर बेटे का अधिकार और रहने की अनुमति
बेटों के अधिकारों को लेकर चली आ रही पुरानी धारणाओं पर अब कानूनी स्पष्टता आ गई है।
- स्व-अर्जित संपत्ति: यदि पिता ने अपनी मेहनत की कमाई से घर बनाया है या जमीन खरीदी है, तो बेटा उस पर अपना कानूनी हक नहीं जता सकता।
- रहने का अधिकार: बेटा अपने माता-पिता के घर में केवल तब तक रह सकता है जब तक माता-पिता की अनुमति हो। अनुमति वापस लेने पर बेटे को घर खाली करना होगा, चाहे वह शादीशुदा हो या नहीं।
3. भाइयों के बीच जमीन के बंटवारे की नई प्रक्रिया
पारिवारिक संपत्ति और भाइयों के बीच होने वाले विवादों को खत्म करने के लिए सरकार ने बंटवारे के नियमों को सरल बना दिया है।
- सहमति की जरूरत नहीं: अब यदि कोई हिस्सेदार संयुक्त जमीन (Joint Property) में से अपना हिस्सा अलग करना चाहता है, तो उसे अन्य हिस्सेदारों की अनिवार्य सहमति की आवश्यकता नहीं होगी। वह सीधे आवेदन कर अपना हिस्सा अलग करवा सकता है।
- डिजिटल रिकॉर्ड: इस प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने के लिए जमीन के रिकॉर्ड का डिजिटलीकरण किया गया है, जिससे धोखाधड़ी की गुंजाइश खत्म हो गई है।
4. बेटियों के अधिकार और दामाद की स्थिति पर स्पष्टता
महिलाओं के संपत्ति अधिकारों को और अधिक मजबूत किया गया है।
- बेटियों का हक: अब बेटियों को माता-पिता की संपत्ति में बेटों के बराबर ही कानूनी अधिकार प्राप्त हैं। शादी के बाद भी बेटी का अपने पिता की संपत्ति पर हक बरकरार रहता है।
- दामाद का अधिकार: दामाद का अपने ससुराल की संपत्ति पर कोई कानूनी हक नहीं होता, जब तक कि ससुर ने कानूनी तौर पर संपत्ति उसके नाम न की हो।
5. जमीन अधिग्रहण और उचित मुआवजे का नया नियम
सरकार द्वारा विकास कार्यों (सड़क, रेलवे आदि) के लिए अधिग्रहित की जाने वाली जमीन के नियमों को और अधिक सख्त बनाया गया है।
- उचित मुआवजा: अब बिना उचित और पूर्ण मुआवजा दिए किसी भी व्यक्ति को उसकी जमीन से बेदखल नहीं किया जा सकता।
- पारदर्शिता: अधिग्रहण की प्रक्रिया अब मानवीय और पारदर्शी होगी, जिसमें प्रभावित परिवार के पुनर्वास का भी ध्यान रखा जाएगा।
निष्कर्ष और सलाह
ये नए नियम 1 जनवरी 2026 से पूरे देश में प्रभावी हो चुके हैं। यदि आपके नाम पर कोई भी अचल संपत्ति है, तो इन नियमों को समझना आपके लिए अनिवार्य है ताकि भविष्य में किसी भी कानूनी पेचीदगी से बचा जा सके।
चेक बाउंस, जाने क्यों होता है, ऐसा होने पर कितने दिनों की सज़ा और जुर्माना का प्रावधान है