सिर्फ शब्द नहीं, जिम्मेदारी भी: रायसेन की मासूम बेटी को 10 लाख की सहायता, शिवराज ने परिभाषित किया ‘मामा’ का अर्थ

रायसेन 
“मामा” यह शब्द भरोसे, अपनत्व और बिना शर्त संरक्षण की भावभूमि है। भारतीय समाज में “मामा” वह होता है, जिसके आंगन में बच्चा बेफिक्र हँसता है, जिसके कंधे पर सिर रखकर रो सकता है और जिसे देखकर मन को यह तसल्ली मिलती है कि कोई अपना है, हर हाल में साथ खड़ा रहेगा। राजनीति में जब कोई जननेता इस शब्द से पहचाना जाने लगे, तब उसके पीछे संवेदनशील व्यवहार, समय पर लिया गया संज्ञान और पीड़ा में डूबे परिवार के साथ खड़े होने का साहस होता है। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान के लिए “मामा” शब्द वर्षों से यही अर्थ रचता आया है और एक बार फिर उन्होंने अपने आचरण से इसे जीवंत कर दिया है।

रायसेन की जघन्य घटना और समाज की अंतःचेतना
रायसेन जिले के गौहरगंज में छह साल की मासूम बच्ची के साथ हुई जघन्य दुष्कर्म की घटना ने पूरे समाज को झकझोर दिया था। ऐसी घटनाएँ निश्‍चित ही एक परिवार तक सीमित नहीं रहती, यह पूरे समाज की अंतस्‍चेतना को घायल कर देती हैं। अक्सर देखा गया है कि शुरुआत में सहानुभूति की लहर उठती है, लोग साथ खड़े होते हैं, किंतु समय बीतते ही पीड़ित परिवार अकेला पड़ जाता है। दर्द, डर और भविष्य की अनिश्चितताओं के बीच तब उसको सहारा देने कोई सामने नहीं आता। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसी कड़वी सच्चाई को महसूस किया और केवल दुख जताकर रुकने के बजाय उसे जिम्मेदारी में बदल दिया।

See also  उज्जैन में 27 अगस्त को होगा द्वितीय वैश्विक आध्यात्मिक पर्यटन सम्मेलन रूहmantic

संवेदना से जिम्मेदारी तक का कदम
घटना पर संज्ञान लेते हुए उन्होंने अपनी संवेदनाएँ सार्वजनिक रूप से प्रकट कीं और यह स्पष्ट किया कि पीड़िता बेटी का भविष्य सुरक्षित होना चाहिए। इसी भाव से प्रेरित होकर उन्होंने 10 लाख रुपए की सहायता राशि पीड़ित परिवार को सौंपी। उल्‍लेखित है, यह सहायता किसी सरकारी योजना या निधि से नहीं दी गई है, उनके माध्‍यम से आपसी सहयोग से जुटाई गई, ताकि यह संदेश जाए कि संवेदना मन से उपजती है और वह मन किसी एक का नहीं संपूर्ण हिन्‍दू समाज का है।

दीर्घकालिक सुरक्षा और भविष्य की गारंटी
अब यह राशि बच्ची के नाम से उसके खाते में डिपॉजिट की जाएगी। जब वह 18 वर्ष की होगी, तब यह राशि बढ़कर लगभग 18 लाख रुपए हो जाएगी। यही नहीं, इसी फंड से समय-समय पर उसकी शिक्षा और अन्य आवश्यक खर्च भी पूरे होते रहेंगे। निश्‍चित ही कहा जाएगा कि इस प्रकरण में यह सिर्फ आर्थिक मदद तक सीमित रहनेवाला विषय न होकर एक दीर्घकालिक भरोसा है कि यह बेटी अकेली नहीं है, उसका भविष्य किसी अंधेरे में नहीं छोड़ा गया है, संपूर्ण समाज उसके साथ खड़ा है।

See also  मुख्यमंत्री डॉ. यादव दो दिनों में विभिन्न कार्यक्रमों में हुए शामिल

नेतृत्व की संवेदनशील सोच
शिवराज सिंह चौहान ने इस अवसर पर जो बात कही, वह समाज के लिए आईना भी है और मार्गदर्शन भी। उन्होंने कहा कि विकट परिस्थितियों में समाज कुछ समय तक साथ रहता है, लेकिन बाद में परिवार अकेला पड़ जाता है। उन्होंने यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि इस परिवार पर शिक्षा और जीवनयापन का अतिरिक्त बोझ न आए, और बेटी को आगे बढ़ने के लिए हर संभव सहारा मिले। ऐसे में कहना यही होगा कि यही वह सोच है, जो एक प्रशासक या नेता को “मामा” बनाती है।

कानूनी कार्रवाई और प्रशासनिक तत्परता
यह भी एक तथ्‍य है कि घटना के पश्‍चात प्रदेश की मोहन सरकार में कानूनी पक्ष पर भी प्रशासन ने तत्परता दिखाई। नवंबर 2025 में घटी इस घटना के आरोपी सलमान को भोपाल से गिरफ्तार किया गया। 27 नवंबर की आधी रात जब पुलिस उसे रायसेन ले जा रही थी, तब भोपाल से लगभग 30 किलोमीटर दूर कीरत नगर के पास पुलिस वाहन का टायर पंक्चर हो गया। मौके का फायदा उठाकर आरोपी ने एसआई की पिस्टल छीन ली। इसके बाद उसे रायसेन ले जाते समय एक शॉर्ट एनकाउंटर में वह घायल हुआ। यह पूरा घटनाक्रम दर्शाता है कि कानून व्यवस्था ने आरोपी को पकड़ने और न्याय की प्रक्रिया आगे बढ़ाने में कोई ढिलाई नहीं बरती।

See also  नेशनल हाईवे पर तैनात होंगे गौ रक्षक दल, सड़क दुर्घटनाओं को रोकने की पहल

सत्ता, संरक्षण और नैतिक जिम्मेदारी
वहीं, कानून की कार्रवाई के समानांतर समाज का नैतिक कर्तव्य भी होता है पीड़ित के साथ खड़े होने का। शिवराज सिंह चौहान का यह कदम उसी नैतिक जिम्मेदारी का विस्तार है। उन्होंने फिर यही बताया है कि सत्ता का अर्थ सिर्फ शासन भर करना नहीं होता है, संरक्षण भी है। नेतृत्व का मतलब निर्णय लेने तक सीमित होना नहीं है, बल्कि उस दर्द को भी महसूस करना है जो समाज जीवन में निरंतर घट रहे हैं।

“मामा” की राजनीति और भरोसे की नींव
आज जब समाज असंवेदनशीलता की शिकायत करता है, तब ऐसे उदाहरण उम्मीद जगाते हैं। “मामा” का यह रूप हमें राजनीति के उदात्‍त अर्थ समझा रहा है। सिर्फ नीतियाँ नहीं, टूटे भरोसे की बहाली भी हर राजनेता का कार्य है। रायसेन की वह मासूम बेटी शायद अभी इन बातों को न समझ पाए, किंतु इतना तय मानिए कि जब वह बड़ी होगी और अपने सपनों की उड़ान भरेगी, तब अवश्‍य ही उसके जीवन की नींव में यह भरोसा शामिल होगा कि किसी ने उसके अंधेरे समय में हाथ थामा था, वह उसका अपना, प्रदेश का “मामा” शिवराज मामा हैं।