कागज़ों में सुधार, ज़मीन पर भ्रष्टाचार?

मंत्री का रिश्तेदार बताने वाले अफसर की दबंगई, RTI आदेशों की खुलेआम अवहेलना
बड़वानी
मध्यप्रदेश का शिक्षा विभाग कागज़ों में भले ही सुधारों के दावे करता हो, नई-नई योजनाओं का ढोल पीटता हो, मगर ज़मीनी हकीकत इससे बिल्कुल उलट नज़र आती है। योजनाएँ बनती हैं, मॉनिटरिंग के दावे होते हैं, पीठ थपथपाई जाती है, पर स्कूलों और दफ्तरों की सच्चाई बदहाल ही बनी हुई है।

सरकार अपनी ही योजनाओं की जमीनी सच्चाई देखने में नाकाम साबित हो रही है। इसका ताज़ा उदाहरण बड़वानी जिले में पदस्थ जिला परियोजना समन्वयक प्रमोद शर्मा हैं, जो स्वयं को मंत्री का रिश्तेदार बताकर पत्रकारों,जनप्रतिनिधियों और कर्मचारियों पर रोब जमाते फिरते हैं।

मामला सिर्फ दबंगई तक सीमित नहीं है, बल्कि सूचना के अधिकार कानून की खुली अवहेलना का है। RTI के तहत मांगी गई जानकारी आज तक आवेदक को नहीं दी गई, जबकि उसी कार्यालय से राशि जमा कराने के पत्र भी जारी हुए और आवेदक द्वारा राशि जमा भी कर दी गई। इसके बावजूद जानकारी रोकना साफ तौर पर कानून का मज़ाक उड़ाना है।

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जब आईटीआई के कार्यकर्ता ने मजबूर होकर प्रथम अपील जिला पंचायत बड़वानी में की, तो प्रथम अपीलीय अधिकारी के आदेशों को भी जिला परियोजना अधिकारी प्रमोद शर्मा ने हवा में उड़ा दिया। मुख्य कार्यपालन अधिकारी काजल चावला के आदेश कि आपको 30/1 /2026 को जिला पंचायत कार्यालय मे मेरे समक्ष 4:00 बजेजानकारी लेकर प्रस्तुत होवे उसके बावजूदउनके आदेशों कि धजिया उड़ा दी गई और उपस्थिति भी नहीं हुए! हद तो तब हो गई जब आवेदक स्वयं प्रथम अपीलीय अधिकारी के कार्यालय पहुँचा, वहाँ भी सिर्फ अगली तारीख का झुनझुना थमाकर मामला टाल दिया गया।

जिला पंचायत सीईओ काजल चावला सवालों के घेरे में
बड़ा सवाल यह है कि—

  • क्या जिला पंचायत सीईओ काजल चावला आवेदक को निशुल्क जानकारी दिला पाएंगी?
  • क्या जमा किया गया शुल्क वापस करने का आदेश जारी होगा?
  • यदि आदेश जारी हुआ, तो क्या उसका पालन भी कराया जाएगा या वह भी फाइलों में दफन हो जाएगा?
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अगर जिला प्रशासन ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो यह मामला सिर्फ RTI उल्लंघन नहीं बल्कि अफसरशाही की तानाशाही का उदाहरण बन जाएगा।
अब देखने वाली बात यह होगी कि जिला पंचायत प्रशासन अपने ही आदेशों की इज्जत बचा पाता है या फिर दबंग अफसरों के सामने व्यवस्था फिर बेबस नजर आएगी।