पत्रकारों को रेल यात्रा की रियायतें पुनः बहाल हों, सांसद नीरज डांगी ने राज्यसभा में उठाया मामला

आबूरोड/सिरोही.

सांसद नीरज डांगी ने राज्यसभा में शून्यकाल के दौरान देश के लोकतांत्रिक ढांचे के चौथे स्तंभ-पत्रकारिता से संबंधित, संवेदनशील एवं जनहित से सीधे जुड़े विषय की ओर ध्यान आकर्षित किया। सांसद डांगी ने बताया कि कोविड-19 महामारी से पूर्व भारतीय रेल की ओर से पत्रकारों को दी जा रही यात्रा रियायतें महामारी के दौरान स्थगित की गई थीं।

सांसद डांगी ने बताया कि महामारी के दौरान स्थगित करना उस समय की परिस्थितियों में एक अस्थायी एवं व्यावहारिक निर्णय था, लेकिन खेद का विषय है कि देश में सामान्य स्थिति बहाल होने, सभी आर्थिक एवं सामाजिक गतिविधियां सुचारू रूप से प्रारंभ होने तथा अन्य श्रेणियों को दी गई रियायतें फिर लागू होने के बावजूद पत्रकारों की यह महत्वपूर्ण सुविधा आज तक बहाल नहीं की गई है। सांसद डांगी ने कहा कि पत्रकार केवल समाचार संकलन तक सीमित नहीं रहते, बल्कि वे देश के दूर-दराज़, दुर्गम एवं संवेदनशील क्षेत्रों में जाकर आम नागरिकों की समस्याओं, सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन, आपदाओं, सामाजिक असमानताओं तथा लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं की निष्पक्ष रिपोर्टिंग करते हैं। कई बार उन्हें सीमित संसाधनों, जोखिमपूर्ण परिस्थितियों और समयबद्ध दबावों में कार्य करना पड़ता है। ऐसे में भारतीय रेल की ओर से दी जाने वाली यात्रा रियायतें किसी प्रकार का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि उनके कर्तव्यों के निर्वहन में सहायक एक आवश्यक सुविधा रही हैं।

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लोकतांत्रिक मूल्यों की भावना के अनुरूप नहीं
सांसद डांगी ने कहा कि पत्रकारों को यात्रा रियायतों से वंचित रखना अप्रत्यक्ष रूप से उनकी कार्यक्षमता को सीमित करता है और यह स्थिति लोकतांत्रिक मूल्यों की भावना के अनुरूप नहीं कही जा सकती। विशेष रूप से छोटे एवं स्वतंत्र पत्रकार, ग्रामीण एवं क्षेत्रीय मीडिया से जुड़े संवाददाता इस निर्णय से सर्वाधिक प्रभावित हुए हैं। लोकतंत्र सशक्त, जीवंत और उत्तरदायी लोकतंत्र तब ही रह सकता है जब उसकी आवाज़ निर्भय, स्वतंत्र और निर्बाध हो।

सांसद डांगी ने सरकार से मांग की है कि कोविड-19 महामारी से पूर्व भारतीय रेल की ओर से पत्रकारों को प्रदान की जा रही सभी यात्रा रियायतों को तत्काल प्रभाव से पुनः बहाल किया जाए। मान्यता प्राप्त पत्रकारों के लिए एक स्पष्ट, पारदर्शी एवं स्थायी नीति का निर्माण किया जाए, जिससे भविष्य में किसी भी आपात स्थिति में उनके अधिकारों एवं सुविधाओं की अनावश्यक समाप्ति ना हो। यह भी सुनिश्चित किया जाए कि इस नीति का लाभ वास्तविक एवं सक्रिय पत्रकारों तक सरल प्रक्रिया के माध्यम से पहुंचे।

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