बीएनएस धारा 34
निजी रक्षा में किए गए कार्य
जो अपराध अपनी रक्षा के किया जयए वह अपराध नहीं होता।
उदाहरण
भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 34 (जो पहले IPC की धारा 96 थी) ‘निजी बचाव’ या आत्मरक्षा (Right of Private Defence) के अधिकार का प्रावधान करती है। इसके अनुसार, आत्मरक्षा में किया गया कोई भी कार्य अपराध नहीं माना जाता है, चाहे वह शरीर या संपत्ति की रक्षा के लिए ही क्यों न किया गया हो।
बीएनएस सेक्शन 34 की मुख्य बातें:
- अपराध नहीं: यदि कोई व्यक्ति अपनी या किसी अन्य व्यक्ति के शरीर या संपत्ति की रक्षा करते हुए, किसी गैरकानूनी हमले के जवाब में उचित बल का प्रयोग करता है, तो वह किसी भी अपराध का दोषी नहीं होगा।
- उचित बचाव:यह अधिकार तब लागू होता है जब किसी को नुकसान पहुँचाने या संपत्ति हड़पने की कोशिश की जा रही हो।
- अनुपात (Proportionality): आत्मरक्षा में उपयोग किया जाने वाला बल खतरे के अनुपात में होना चाहिए, यानी उतना ही बल प्रयोग करें जितना आवश्यक हो।
- व्यापक दायरा: यह स्वयं के शरीर के साथ-साथ दूसरों की रक्षा (शरीर या संपत्ति) के लिए भी लागू होता है।
सरल शब्दों में, कानून आपको अपनी रक्षा करने का अधिकार देता है, और उस दौरान की गई कार्रवाई (जैसे हमलावर को चोट पहुँचाना) अपराध नहीं मानी जाएगी, बशर्ते वह आत्मरक्षा के उद्देश्य से की गई हो।