छत्तीसगढ़ की सरकार ने अपने राज्य में दुधारू पशु प्रदाय योजना की शुरूआत की है। इस योजना के माध्यम से किसानों को उन्नत नस्लों की गाय दी जाएगी और इसके लिए अनुदान भी दिया जाएगा। राज्य सरकार की यह मंशा है कि इस योजना के माध्यम से डेयरी व्यापार को बढ़ावा मिलेगा।
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगारों के सृजन के साथ ही किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार द्वारा पशुपालन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए केंद्र एवं राज्य सरकारों के द्वारा कई योजनाएँ चलाई जा रही हैं। इस कड़ी में छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा डेयरी व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए “दुधारू पशु प्रदाय योजना” की शुरुआत की गई है। योजना के तहत लाभार्थियों को पशुपालन के लिए अनुदान पर उन्नत नस्लों की गाय दी जाएँगी।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कोण्डागांव जिले के भोंगापाल गांव से डेयरी समग्र विकास योजना अंतर्गत दुधारू पशु प्रदाय योजना का शुभारंभ किया। जनजातीय समुदाय के 08 चयनित हितग्राहियों को दुधारू पशु का वितरण कर इस महती योजना का राज्य स्तरीय आगाज हुआ। राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड की मदद से दुधारू पशु प्रदाय योजना का क्रियान्वयन छत्तीसगढ़ राज्य सहकारी दुग्ध महासंघ मर्यादित के माध्यम से पायलट प्रोजेक्ट के तहत 6 जिलों क्रमशः जशपुर, बलरामपुर, कांकेर, कोंडागांव, महासमुंद और सारंगढ़ बिलाईगढ़ में किया जाएगा।
योजना के अंतर्गत 325 अनुसूचित जनजाति परिवारों की महिला हितग्राहियों को कुल 650 दुधारू पशु प्रदान किए जाएंगे। इस योजना के तहत अनुसूचित क्षेत्रों में डेयरी उद्यमिता को बढ़ावा देने और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ते हुए अनुसूचित जनजाति परिवारों के आर्थिक एवं सामाजिक जीवन स्तर में सुधार होगा। इससे दुग्ध उत्पादन में भी वृद्धि होगी। योजना के माध्यम से दुग्ध और दुग्ध उत्पादों के वितरण में सुधार, पशु प्रजनन, पशु स्वास्थ्य, पशु पोषण से उत्पादकता में वृद्धि, दुग्ध प्रसंस्करण अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण और प्रशिक्षण व क्षमता निर्माण का कार्य पायलट प्रोजेक्ट के लिए चयनित जिलों में प्रारम्भ किया जा रहा हैं। योजना अंतर्गत किसानों और पशुपालकों को उन्नत नस्ल के दुधारू गायों का वितरण किया जाएगा।
- उद्देश्य: ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देना, पोषण सुरक्षा सुनिश्चित करना और दुग्ध उत्पादन बढ़ाना।
- सब्सिडी: 90% तक अनुदान या सब्सिडी।
- पात्रता: छत्तीसगढ़ का निवासी होना, आदिवासी महिला, लघु/सीमांत किसान, बीपीएल परिवार, महिला स्वयं सहायता समूह या दुग्ध सहकारी समिति के सदस्य।
- लाभ: 2 दुधारू पशु (गायों के लिए 7 लीटर/दिन, भैंसों के लिए 8 लीटर/दिन की न्यूनतम दूध क्षमता)।
- पशुओं का चयन: उत्तम नस्ल की गायें (जैसे साहिवाल, गिर)।
- अतिरिक्त सुविधाएं: पशुओं का बीमा, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन।
- आवेदन: जिला पशुपालन विभाग या पंचायत के माध्यम से।