पटनाः पिछले दिनों सोशल मीडिया पर खबर सामने आई थी कि खान सर कोईलवर में बड़ी मात्रा में जमीन खरीदकर वहां यूनिवर्सिटी बनाने की योजना बना रहे हैं. रजिस्ट्री करवाने के लिए वे खुद ऑफिस भी पहुंचे थे. कुछ एकड़ जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी भी हो गई थी. लेकिन अब स्थिति बदल गई है. खान सर खरीदी हुई जमीन खुद ही बेच रहे हैं.
उनका कहना है कि यूनिवर्सिटी बनाने का सपना पूरी तरह टूट गया. उन्होंने सोचा था कि इस इलाके में यूनिवर्सिटी खुलने से क्षेत्र का काफी विकास होगा, क्योंकि यह पटना से सटा हुआ है. यहां की कनेक्टिविटी भी अच्छी है. लेकिन परिस्थितियां ऐसी बन गईं कि उनका सपना चकनाचूर हो गया. उनका आरोप है कि लोगों ने इतना टॉर्चर किया कि खरीदी हुई जमीन तक बेचनी पड़ रही है.
1000 एकड़ जमीन खरीदने का था प्लान
बिहार के चर्चित शिक्षक खान सर का कोईलवर में विशाल यूनिवर्सिटी स्थापित करने का सपना फिलहाल अधूरा रह गया है. इस बारे में उन्होंने विस्तार से बताया कि यह प्रोजेक्ट केवल एक शैक्षणिक संस्थान नहीं बल्कि पूरे इलाके के विकास का विज़न था. लगभग 1000 एकड़ जमीन में एक आधुनिक, आत्मनिर्भर और विश्वस्तरीय सुविधाओं से लैस कैंपस बनाना चाहता था. शुरुआती चरण में कई जमीन मालिकों से बातचीत हो चुकी थी और उन्होंने मार्केट रेट से अधिक कीमत पर सौदा भी तय कर लिया था. सभी मालिकों को को एडवांस राशि भी दे दी गई थी. 10-15 एकड़ जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया पूरी भी हो चुकी थी.
अब बेचना क्यों पड़ रहा है
लेकिन स्थिति तब बदल गई जब स्थानीय स्तर पर यह खबर फैल गई कि कोईलवर में एक बड़ी यूनिवर्सिटी बनने वाली है. इस खबर के वायरल होते ही जमीन मालिकों ने कीमतें अचानक कई गुना बढ़ा दीं. एडवांस लेने के बावजूद जमीन रजिस्ट्री से इनकार कर दिया. खान सर का कहना है कि जैसे ही जमीन मालिकों को यह पता चला कि उनके जमीन पर यूनिवर्सिटी बनेगा तो उन्होंने जमीन के रेट को दस गुणा तक बढ़ा दिया. हमलोग पहले ही मार्केट रेट से कई गुना अधिक कीमत दे रहे थे. सारा कुछ फाइनल हो गया था. बस समय के अभाव में रजिस्ट्री होना बाकी था. लेकिन, इस मजबूरी का जमीन मालिकों ने फायदा उठाना चाहा और तय रेट पर रजिस्ट्री करने मना कर दिया. उनका आरोप है कि हालात इतने जटिल हो गए कि उन्हें पहले से खरीदी गई जमीन भी बेचने का फैसला करना पड़ा.
खान सर के अनुसार प्रस्तावित यूनिवर्सिटी पूरी तरह आधुनिक मॉडल पर आधारित होती. इसमें 25 हजार छात्रों के रहने की व्यवस्था, खुद की बिजली उत्पादन
करने वाला सिस्टम और एमबीए छात्रों द्वारा संचालित मॉल जैसी प्रैक्टिकल लर्निंग सुविधाएं शामिल थीं. उनका उद्देश्य था कि छात्र केवल किताबों तक सीमित न रहें बल्कि वास्तविक बिज़नेस और टेक्निकल सिस्टम को कैंपस के भीतर ही समझ सकें. लेकिन उनका सोना चकनाचूर हो गया. यह सारी बातें उन्होंने बड़े ही दुखी मन से बताई.
अब दूसरी जगह बनेगा, इस बार भनक तक नहीं
हालांकि कोईलवर में प्लान रद्द होने के बाद भी उन्होंने साफ किया कि उनका सपना खत्म नहीं हुआ है. अब वे नई जगह पर प्रोजेक्ट शिफ्ट कर रहे हैं, लेकिन इस बार लोकेशन सार्वजनिक नहीं करेंगे. जमीन खरीद की प्रक्रिया भी सीधे अपने नाम से नहीं करेंगे ताकि भविष्य में ऐसी स्थिति दोबारा न बने. उन्होंने बताया कि इस बार जमीन की रजिस्ट्री अलग अलग लोगों के नाम पर होगी. बाद में उनसे मैं खुद के नाम पर ट्रांसफर करवा लूंगा. इस तरीके से रजिस्ट्री और ट्रांसफर का खर्च बढ़ेगा, लेकिन प्रोजेक्ट सुरक्षित रहेगा.