छत्तीसगढ़ विधानसभा में प्रस्तुत बजट की थीम “ज्ञान के उत्थान, गति की शक्ति से, संकल्प के साथ आगे बढ़ते हुए…” पर राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (NHM) कर्मचारी संघ ने कड़ी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। संघ ने बजट में NHM स्वास्थ्य कर्मचारियों की मांगों की पूर्ण उपेक्षा पर गहरा रोष जताते हुए सरकार की मंशा पर सवाल उठाए हैं।
संकल्प और हकीकत में भारी अंतर: डॉ. अमित मिरी
NHM कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अमित मिरी एवं रायगढ़ जिलाध्यक्ष सुश्री शकुंतला एक्का ने बजट पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “बजट की थीम सुनने में बहुत आकर्षक है और राज्य के विकास का संदेश देती है, लेकिन धरातल पर NHM के हजारों संविदा कर्मचारी आज भी उपेक्षित हैं। स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ माने जाने वाले इन कर्मचारियों के लिए बजट में किसी ठोस पहल या विशेष घोषणा का न होना अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है।”
कोविड के नायकों को मिली सिर्फ अनदेखी: प्रांतीय प्रवक्ता पूरन दास ने बताया कि प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को हर कठिन परिस्थिति और कोविड काल में संभालने वाले NHM कर्मचारी वर्षों से सीमित वेतन और अनिश्चित भविष्य के बीच कार्य कर रहे हैं। बजट में उनके हितों की अनदेखी करना प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था को कमजोर करने जैसा है।
‘ मोदी की गारंटी’ और वादों की याद दिलाई: प्रांतीय महासचिव कौशलेस तिवारी ने सरकार को याद दिलाते हुए कहा कि “मोदी की गारंटी” में संविदा कर्मचारियों की समस्याओं के समाधान का स्पष्ट संकल्प था। उन्होंने सवाल किया कि क्या 19 सितंबर 2025 को माननीय स्वास्थ्य मंत्री जी द्वारा 3 माह के भीतर चिकित्सा बीमा, ग्रेड पे, एचआर पॉलिसी में सुधार और अनुकम्पा नियुक्ति जैसी मांगों को पूरा करने का वादा केवल कागजी था?
NHM कर्मचारी संघ की प्रमुख मांगें:
- राज्य सरकार से संघ ने निम्नलिखित बिंदुओं पर शीघ्र निर्णय लेने का आग्रह किया है:
- नियमितीकरण: NHM संविदा कर्मचारियों के लिए स्पष्ट और ठोस नियमितीकरण नीति बनाई जाए।
- समयबद्ध सुधार: स्वास्थ्य मंत्री की घोषणा के अनुरूप ग्रेड पे, एचआर पॉलिसी और चिकित्सा बीमा को तत्काल लागू किया जाए।
- सामाजिक सुरक्षा: 17,500 कार्यरत कर्मचारियों को अनुकम्पा नियुक्ति और सेवा स्थिरता प्रदान की जाए।
अंतिम प्रश्न:
NHM कर्मचारी संघ ने सरकार से सीधा सवाल किया है— क्या यही है “ज्ञान के उत्थान और गति की शक्ति का संकल्प”, जब स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने वाले प्रदेश के 17,500 कर्मचारियों की ही अनदेखी की जाए? संघ को उम्मीद है कि सरकार जल्द ही इस विषय पर न्यायपूर्ण निर्णय लेकर कर्मचारियों की उम्मीदों पर खरी उतरेगी।