NCERT की किताब में ‘40% नेता अपराधी’ दावा, न्यायपालिका में भ्रष्टाचार अध्याय पर वकीलों का विरोध

नई दिल्ली
एनसीईआरटी की आठवीं क्लास की किताब में ज्यूडिशियरी में भ्रष्टाचार वाले चैप्टर पर विवाद छिड़ गया है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इस मामले में काफी नाराजगी दिखाई, जिसके बाद सरकारी सूत्रों ने कहा है कि यह किताब से यह पोर्शन हटा दिया जाएगा। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के वकील भी काफी नाराज हैं। सीनियर एडवोकेट और सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष विकास सिंह ने नेताओं पर हमला बोल दिया है। उन्होंने दावा किया कि 40 फीसदी नेता क्रिमिनल बैकग्राउंड के हैं, तो ऐसे में इस बारे में सिखाना चाहिए।

न्यूज एजेंसी से बात करते हुए, सीनियर एडवोकेट विकास सिंह ने कहा, "ठीक है, जहां तक आर्टिकल की बात है, मुझे लगता है कि यह चौंकाने वाला है कि एनसीईआरटी ने टेक्स्टबुक में ऐसा कुछ शामिल किया है। टेक्स्टबुक बच्चों को हमारे समाज के बारे में सिखाने के लिए होती हैं। अगर वे सच में सिखाना चाहते हैं, तो उन्हें इस बात पर ध्यान देना चाहिए कि लगभग 40 फीसदी नेताओं का क्रिमिनल बैकग्राउंड है। यह कुछ ऐसा है जिसकी हमने आजादी मिलने पर बिल्कुल उम्मीद नहीं की थी, कि जो लोग इस देश पर राज करेंगे, वे कानून तोड़ने वाले हो सकते हैं, जो आखिर में कानून बनाने वाले बनेंगे। लेकिन ज्यूडिशियरी में करप्शन के बारे में बात करना, मुझे लगता है, सच में इंस्टीट्यूशन को कमजोर करता है।''

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'जिम्मेदार पर कंटेम्प्ट नोटिस जारी करना चाहिए'
उन्होंने आगे कहा कि करप्शन हर जगह है, लेकिन मैं आपको यकीन दिला सकता हूं कि ज्यूडिशियरी में करप्शन एग्जीक्यूटिव या पॉलिटिक्स से कहीं, कहीं कम है। इसलिए मुझे यह बिल्कुल साफ नहीं है कि इस चैप्टर को शामिल करने का मकसद क्या था। लेकिन मुझे यकीन है कि जस्टिस सूर्यकांत को एनसीईआरटी के उन अधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करनी चाहिए, जिन्होंने इसे शामिल करने का फैसला किया, और उन्हें कंटेम्प्ट नोटिस जारी करना चाहिए, जिसमें पूछा जाए कि उन्हें क्रिमिनल कंटेम्प्ट के लिए जिम्मेदार क्यों न ठहराया जाए।"

'बच्चों को ज्यूडिशियरी में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जा रहा'
सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) की आठवीं कक्षा की किताब में न्यायपालिका में भ्रष्टाचार विषय से संबंधित सामग्री का स्वतः संज्ञान लिया और इसे गंभीर चिंता का विषय बताया। भारत के प्रधान न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्य बागची तथा न्यायमूर्ति विपुल एम पंचोली की पीठ के समक्ष वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिबल ने यह दलील दी कि कक्षा आठ के बच्चों को न्यायपालिका में भ्रष्टाचार के बारे में पढ़ाया जाता है। यह एक गंभीर चिंता का विषय है।

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'संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा'
सीजेआई सूर्यकांत ने कहा, ''मैं किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। कानून अपना काम करेगा।'' उन्होंने कहा, ''संस्था के प्रमुख के रूप में मैंने अपना कर्तव्य निभाया है और संज्ञान लिया है… यह एक सोचा-समझा कदम प्रतीत होता है। मैं ज्यादा कुछ नहीं कहूंगा।'' न्यायमूर्ति बागची ने कहा कि यह पुस्तक संविधान की मूल संरचना के विरुद्ध प्रतीत होती है। सीजेआई ने कहा, ''कृपया कुछ दिनों तक प्रतीक्षा करें। अधिवक्ता और न्यायाधीश सभी परेशान हैं। सभी उच्च न्यायालय के न्यायाधीश परेशान हैं। मैं इस मामले को स्वतः संज्ञान के तहत लूंगा। मैं किसी को भी संस्था को बदनाम करने की अनुमति नहीं दूंगा। कानून अपना काम करेगा।'' बाद में न्यायमूर्ति कांत ने कहा कि शीर्ष अदालत ने इस मामले का स्वतः संज्ञान लिया है।