ईरान ने अमेरिका की ‘आंख’ फोड़ी, युद्ध के बीच वार्निंग सिस्टम किया तबाह, क्यों है बड़ा नुकसान?

वाशिंगटन

ईरान पर अमेरिका और इजरायली हमलों के बाद युद्ध ने भयावह मोड़ के लिया है। जहां एक तरफ ईरान ने खाड़ी देशों पर लगातार हमले जारी रखे हैं, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका ने हिंद महासागर में एक ईरानी पोत को डुबो दिया है, जिसमें 80 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई है। इस बीच अब यह खबर सामने आई है कि ईरान ने अमेरिका को एक गहरा जख्म दे दिया है। जानकारी के मुताबिक ईरान के हमले में कतर में मौजूद अमेरिका की एक अहम मिसाइल चेतावनी प्रणाली को नुकसान पहुंचने की खबर सामने आई है। इसे इस क्षेत्र में अमेरिका का आंख भी कहा जाता था।

जानकारी के मुताबिक करीब 1.1 अरब डॉलर की लागत वाला यह रडार सिस्टम अमेरिकी सेना के मिसाइल रक्षा नेटवर्क का महत्वपूर्ण हिस्सा था। हमले से क्षेत्र में तैनात मिसाइल रक्षा तंत्र को बड़ा झटका लगा है और इससे संभावित मिसाइल हमलों का समय रहते पता लगाने की क्षमता कमजोर हो सकती है।

See also  ईरान के हमले से दहला दुबई एयरपोर्ट, सायरन बजते ही यात्रियों में मची भगदड़

सैटेलाइट तस्वीरों में खुलासा
अमेरिकी सैन्य ढांचे को हुए नुकसान की पुष्टि सैटेलाइट तस्वीरों से भी हुई है। प्लैनेट लैब्स द्वारा जारी सैटेलाइट इमेज में अमेरिकी स्पेस फोर्स के AN/FPS-132 (ब्लॉक 5) बैलिस्टिक मिसाइल अर्ली वार्निंग रडार सिस्टम के आसपास क्षति और आग बुझाने की गतिविधियां दिखाई दी हैं। यह रडार सिस्टम मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना द्वारा संचालित सबसे बड़ा मिसाइल चेतावनी रडार माना जाता है।

ईरान ने कैसे फोड़ी आंख?
ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने इसे सटीक मिसाइल हमला बताया है। कुछ विशेषज्ञों का कहना है कि यह हमला संभवत: कम लागत वाले हमलावर ड्रोन से किया गया होगा, जो शायद शाहेद प्रकार का था। रिपोर्ट्स के अनुसार मिसाइलों और ड्रोन के एक साथ बड़े हमले के दौरान यह ड्रोन रक्षा तंत्र को भेदने में सफल रहा।

क्यों है बड़ा नुकसान?
इस रडार सिस्टम को अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथियॉन ने अपग्रेडेड अर्ली वार्निंग रडार (UEWR) कार्यक्रम के तहत बनाया था। यह प्रणाली 5000 किलोमीटर तक की दूरी पर बैलिस्टिक मिसाइलों और अन्य हवाई खतरों को ट्रैक करने में सक्षम है और पूरे मध्य पूर्व क्षेत्र में मिसाइल लॉन्च का शुरुआती अलर्ट देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। कतर में इसकी लोकेशन रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है। यहां से यह रडार ईरान, इराक, सीरिया, तुर्किये, मध्य एशिया के कुछ हिस्सों और हिंद महासागर तक की निगरानी कर सकता है।

See also  अमेरिका का ईरान को ‘अंतिम प्रस्ताव’, बातचीत टूटने के बाद कूटनीतिक संकट गहराया

विशेषज्ञों का कहना है कि इस हमले का असर सिर्फ एक सैन्य ठिकाने को नुकसान तक सीमित नहीं है। अमेरिका के पूर्व सैन्य अधिकारी और पेंटागन के पूर्व सलाहकार कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर कहा कि इस हमले में अमेरिका की “आंखें” निशाना बनी हैं। उनके अनुसार यह सिस्टम अमेरिकी मिसाइल रक्षा तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण था। भू-राजनीति विशेषज्ञ ब्रायन एलन ने कहा कि इस हमले के रणनीतिक असर भी हो सकते हैं।

बदलने में लग जाएगा समय
सैन्य विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका के पास सैटेलाइट और अन्य रडार सहित वैश्विक सेंसर नेटवर्क मौजूद है, लेकिन AN/FPS-132 जैसे बड़े और स्थायी रडार सिस्टम को नुकसान पहुंचने से क्षेत्रीय निगरानी में अंतर आ सकता है। ऐसे बड़े रडार सिस्टम को जल्दी बदलना या दोबारा स्थापित करना आसान नहीं होता, इसलिए इससे कुछ समय के लिए मिसाइल निगरानी और ट्रैकिंग क्षमता कमजोर हो सकती है। यह स्थिति इसलिए भी अहम है क्योंकि इस क्षेत्र में अमेरिका के कई महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने और दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति से जुड़े प्रमुख समुद्री मार्ग मौजूद हैं।

See also  एलन मस्क का अगले 20 साल में मंगल पर बस्ती बसाने का टारगेट