अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद ओम बिरला का बयान: सदन से ऊपर नहीं नेता प्रतिपक्ष, PM भी नहीं

नई दिल्ली
लोकसभा के स्पीकर ओम बिरला पर विपक्ष के द्वारा अविश्वास प्रस्ताव लाया गया था। इसपर दो दिनों तक सुनवाई हुई। इसके बाद संसद ने इसे ध्वनि मत से खारिज कर दिया। इसके बाद आज उन्होंने पहली बार संसद को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए आरोप सही नहीं है, उन्होंने सत्ता पक्ष हो या विपक्ष, सभी को बराबर मौका दिया। उन्होंने कहा कि जब कोई सांसद संसद की मर्यादा को भंग करते हैं तो तब उन्हें कठोर कदम उठाते हैं। आपको बता दें कि ओम बिरला इस पूरे अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई के दौरान खुद को स्पीकर की कुर्सी से दूर रखा था। आज जब वह बोल रहे थे तो उन्होंने हर उन आरोपों के जवाब देने की कोशिश की, जो उनके खिलाफ लगाए गए थे।

ओम बिरला ने कहा, 'सबको बराबर बोलने का मौका दिया। अविश्वास प्रस्ताव पर दो दिनों तक चर्चा हुई। यह 140 करोड़ जनता का सदन है। सदन को नियमों से चलाने की कोशिश की। निष्पक्षता का ध्यान रखा। मेरे पर विपक्ष की आवाज दबाने के आरोप लगे। संसदीय व्यवस्था में मेरा अटूट भरोसा रहा है। सदन में सहमति और असहमति की परंपरा रही है। मैंने प्रत्येक सदस्य की बात को गंभीरता से सुना। मैं समर्थन और आलोचना करने वाले सभी सांसदों का आभार प्रकट करता हूं। यह आसन किसी व्यक्ति का नहीं है।

See also  ई-रिक्शा विवाद पर सरकार का बड़ा एक्शन, Google Play Store से हटाया गया BAT-BMS App

निष्पक्षता से चलाया संसद
अपने संबोधन की शुरुआत में उन्होंने कहा, मैंने हमेशा यह प्रयास किया है कि लोकसभा में प्रत्येक सदस्य नियमों के अनुसार अपने विचार रखें, इसके लिए सभी को समय देने का प्रयास किया है। मैंने हमेशा यह प्रयास किया कि सदन की कार्यवाही निष्पक्षता, अनुशासन, संतुलन और नियमों के साथ संचालित हो। मैंने अपने नैतिक कर्तव्य का पालन करते हुए अपने खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव का नोटिस दिए जाने के साथ ही लोकसभा की कार्यवाही के संचालन से खुद को अलग कर लिया।

सदन से ऊपर नहीं नेता प्रतिपक्ष
ओम बिरला ने कहा, ''कुछ सदस्यों का मानना था कि नेता प्रतिपक्ष सदन से ऊपर हैं और किसी भी विषय पर बोल सकते हैं, लेकिन ऐसा विशेषाधिकार किसी को नहीं है और चाहे प्रधानमंत्री हों, मंत्री हों, विपक्ष के नेता हों या अन्य सदस्य, सभी को नियम के अनुसार ही बोलने का अधिकार है। ये नियम सदन ने ही बनाए हैं और मुझे विरासत में मिले हैं।'' स्पीकर ने कहा कि सदन द्वारा मुझ पर व्यक्त किए गए विश्वास के लिए सभी का आभार व्यक्त करता हूं, इस विश्वास को अपनी जिम्मेदारी मानते हुए पूरी निष्ठा, निष्पक्षता और संवैधानिक मर्यादा के साथ निभाऊंगा।

See also  गणतंत्र दिवस पर भारत आमंत्रित कर रहा यूरोपीय नेताओं को: लेयेन और कोस्टा होंगे मुख्य अतिथि