बच्चे को स्तनपान करा रही महिला पर आपत्तिजनक टिप्पणी, युवक ने महिला के सामने ही अपने दोस्तों से पूछा कि क्या उन्हें “दूध पीना है”

सोशल मीडिया पर एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें डी-मार्ट का एक कर्मचारी कथित तौर पर बच्चे को दूध पिला रही महिला का मजाक उड़ाता नजर आता है. वीडियो में देखा जा सकता है कि एक व्यक्ति उस कर्मचारी से सवाल करता है, क्योंकि उसने महिला के सामने ही अपने दोस्तों से मजाक में पूछा कि क्या उन्हें “दूध पीना है”. यह टिप्पणी सीधे उस महिला की ओर इशारा करते हुए कही गई थी, जो अपने बच्चे को स्तनपान करा रही थी. इस घटना ने इंटरनेट पर लोगों को गुस्से से भर दिया और कई लोगों ने इसे बेहद आपत्तिजनक बताया.

 

भारत में भी कई बार ऐसे मामले सामने आए हैं जहां स्तनपान को या तो गलत तरीके से पेश किया गया या इसे सामाजिक वर्जना बना दिया गया. इस वायरल वीडियो ने एक बार फिर इसी सोच पर सवाल खड़े कर दिए हैं. लोगों का कहना है कि किसी मां का अपने बच्चे को दूध पिलाना बिल्कुल सामान्य बात है और इसका मजाक बनाना गलत है.

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वीडियो में आरोपी की प्रतिक्रिया कैसी थी?

वीडियो में सबसे ज्यादा लोगों को जिस बात ने नाराज किया, वह यह थी कि जब एक व्यक्ति उस कर्मचारी को टोक रहा था, तब भी वह मुस्कुराता हुआ दिखाई दे रहा था. ऐसा लगा जैसे उसे अपनी हरकत पर कोई पछतावा नहीं है. यही वजह है कि सोशल मीडिया पर कई लोगों ने इसे और भी ज्यादा आपत्तिजनक माना. कई यूजर्स ने कहा कि अगर किसी को अपनी गलती का एहसास ही नहीं है, तो यह समस्या और गंभीर हो जाती है.

 

 

सोशल मीडिया पर कैसी प्रतिक्रियाएं आईं?

यह वीडियो इंस्टाग्राम पर ‘लिबर्टी वायर’ नाम के अकाउंट से शेयर किया गया था और कुछ ही समय में इसे हजारों लोगों ने देख लिया. इसके बाद कमेंट सेक्शन में लोगों ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की. एक यूजर ने लिखा कि जब पुरुष खुले में खड़े होकर पेशाब करते हैं तो कोई उन्हें रोकता नहीं, लेकिन महिलाओं को हमेशा शर्मिंदा किया जाता है. वहीं एक अन्य यूजर ने सवाल उठाया कि आखिर मैनेजर उस कर्मचारी का बचाव क्यों कर रहा है.

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लोगों ने समाज की सोच पर क्या कहा?

कुछ यूजर्स ने इस घटना को समाज की मानसिकता से जोड़कर देखा. उनका कहना था कि बचपन से ही बच्चों को सिखाया जाना चाहिए कि हर चीज मजाक नहीं होती. डबल मीनिंग और अश्लील मजाक को सामान्य मान लेने से ऐसी सोच पैदा होती है. कई लोगों ने यह भी कहा कि अगर समाज में शुरुआत से ही सम्मान और संवेदनशीलता की शिक्षा दी जाए तो ऐसी घटनाएं कम हो सकती हैं.

 

 

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