ओडिशा में 16 मार्च को 4 सीटों के लिए हुए राज्यसभा चुनाव में कांग्रेस को बड़ा झटका लगा। बाराबती-कटक सीट से कांग्रेस की विधायक सोफिया फिरदौस समेत तीन कांग्रेस विधायकों ने खुली बगावत करते हुए पार्टी के संयुक्त उम्मीदवार डॉ. दत्तेश्वर होता के खिलाफ भाजपा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप राय को वोट डाला। कांग्रेस ने बीजु जनता दल (BJD) के साथ मिलकर उम्मीदवार खड़ा किया था। लेकिन कांग्रेस की मुस्लिम विधायक सोफिया फिरदौस ने उन्हें वोट नहीं डाला।
कौन हैं सोफिया फिरदौस?
सोफिया फिरदौस ओडिशा की कटक-बाराबती विधानसभा सीट से भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (INC) की मौजूदा विधायक हैं। वे ओडिशा की पहली मुस्लिम महिला विधायक हैं। उनके पिता मोहम्मद मोकीम 2019-2024 तक इसी सीट से विधायक थे, लेकिन धोखाधड़ी के मामलों में उनकी सदस्यता रद्द हो गई। सोफिया ने 2024 के विधानसभा चुनाव में पिता की विरासत संभाली और BJP के पूर्ण चंद्र महापात्र को 8,001 वोटों के अंतर से हराकर जीत दर्ज की।
बगावत की शुरुआत और सोफिया की नाराजगी
राज्यसभा चुनाव की वोटिंग से ठीक पहले सोफिया फिरदौस ने मीडिया के सामने आकर अपनी ही पार्टी के खिलाफ खुलकर नाराजगी जाहिर की थी। उनकी बगावत के कई कारण थे। ओडिशा में चौथी राज्यसभा सीट के लिए कांग्रेस ने बीजू जनता दल (BJD) के उम्मीदवार दत्तेश्वर होता को अपना समर्थन देने का ऐलान किया था। सोफिया का आरोप था कि पार्टी आलाकमान ने इस फैसले से पहले विधायकों से कोई चर्चा नहीं की और न ही उनकी राय ली।
BJD को बताया BJP की ‘B-टीम’
सोफिया ने सवाल उठाया कि कांग्रेस उस BJD का समर्थन कैसे कर सकती है जो संसद में हर बार (जैसे वक्फ बिल के मुद्दे पर) बीजेपी का समर्थन करती आई है। उन्होंने नवीन पटनायक की पार्टी को बीजेपी की ‘B-टीम’ करार दिया। चुनाव से पहले जब कांग्रेस ने अपने कई विधायकों को ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ से बचाने के लिए कर्नाटक (बेंगलुरु) के एक रिसॉर्ट में भेज दिया था, तब सोफिया को इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई थी। इससे वे खुद को पार्टी में हाशिए पर महसूस कर रही थीं।
राज्यसभा चुनाव के दिन क्या ‘खेला’ हुआ?
16 मार्च को जब 4 राज्यसभा सीटों के लिए मतदान हुआ, तो 5 उम्मीदवार मैदान में थे। चौथी सीट पर मुख्य मुकाबला BJD-कांग्रेस के संयुक्त उम्मीदवार दत्तेश्वर होता और बीजेपी द्वारा समर्थित निर्दलीय उम्मीदवार दिलीप रे के बीच था। इसी दौरान सोफिया फिरदौस ने अपनी खुली बगावत को अंजाम दिया। उन्होंने पार्टी व्हिप की परवाह न करते हुए दो अन्य कांग्रेस विधायकों- रमेश जेना और दाशरथी गोमांगो के साथ मिलकर क्रॉस वोटिंग की। इन तीनों ने BJD-कांग्रेस के साझा उम्मीदवार के बजाय बीजेपी समर्थित दिलीप रे को वोट दे दिया।
नतीजा: कांग्रेस के इन 3 विधायकों और BJD के 8 विधायकों की क्रॉस वोटिंग के कारण, बीजेपी समर्थित दिलीप रे ने बाजी मार ली और दत्तेश्वर होता चुनाव हार गए।
इस खुली बगावत के बाद कांग्रेस में भारी आक्रोश है। ओडिशा प्रदेश कांग्रेस कमेटी (OPCC) के अध्यक्ष भक्त चरण दास ने इस घटना पर गहरी निराशा व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि उन्हें रमेश जेना और गोमांगो से ऐसी उम्मीद नहीं थी, लेकिन सबसे ज्यादा हैरानी सोफिया फिरदौस के कदम से हुई है। भक्त चरण दास ने कहा कि सोफिया एक बहुत ही विद्वान नेता हैं और उनका राजनीतिक भविष्य बहुत उज्ज्वल था। लेकिन क्रॉस वोटिंग करके उन्होंने कटक में अपनी आगे की संभावनाएं खत्म कर ली हैं।
पार्टी अब इस मामले को कांग्रेस हाईकमान के पास भेज चुकी है और 10वीं अनुसूची (दल-बदल कानून) के तहत इन बागी विधायकों की विधानसभा सदस्यता रद्द कराने के लिए कानूनी कदम उठाने की तैयारी कर रही है। कुल मिलाकर, सोफिया फिरदौस की यह बगावत ओडिशा में कांग्रेस के लिए एक बड़ा झटका है, जिसने न सिर्फ राज्यसभा चुनाव के नतीजे पलट दिए बल्कि राज्य में पार्टी के आंतरिक कलह को भी पूरी तरह से उजागर कर दिया है।