गुप्त रोग चिकित्सा की आड़ में देह व्यापार, दबिस पर मिली इलाज के बजाय अय्याशी का सामान और आपत्तिजनक सामग्री, डॉक्टर दंपति गिरफ्तार

मेरठ के पॉश इलाके शास्त्री नगर (लोहिया नगर थाना क्षेत्र) से एक ऐसी घटना सामने आई है जिसने पूरे शहर को झकझोर कर रख दिया है। यहाँ एक बुजुर्ग डॉक्टर दंपति ने चिकित्सा सेवा की आड़ में अनैतिक देह व्यापार का नेटवर्क फैला रखा था। यह मामला केवल एक अपराध नहीं है, बल्कि उस विश्वास की हत्या है जो समाज एक सफेद कोट पहनने वाले डॉक्टर पर करता है।  इस खुलासे ने पुलिस प्रशासन और स्थानीय निवासियों के बीच हड़कंप मचा दिया है।

सेक्स रोग से पीड़ित युवाओं को ‘सेक्स ट्रीटमेंट थेरेपी’ देने के लिए यहां बनाएं गए रूम्स मे महिला डॉक्टर व मरीज ही घंटे भऱ तक रुकते थे। इस थेरेपी की कीमत हज़ारो ₹ तक वसूली जाती थी। फिलहाल डॉक्टर दम्पति कपिल कुमार गुप्ता, हेमलता गुप्ता, थेरेपी देने वाली सेक्सोलोजिस्ट 3 युवती व ग्राहक दीपक, मुईन व सोनू अरेस्ट है। VIP ट्रीटमेंट देने वाली लड़कियों को उनकी फैमिली को बुलाकर उन्हें सौंप दिया गया है। ग्राहक व डॉक्टर्स जेल जा रहे है।

 

इस पूरे गोरखधंधे की योजना इतनी सटीक थी कि किसी को कानों-कान खबर नहीं होती, अगर मोहल्ले वालों की सतर्कता काम न आती। डॉक्टर दंपति ने क्लीनिक को एक ‘कवच’ की तरह इस्तेमाल किया, जहाँ आने वाले ‘ग्राहकों’ को मरीज बताया जाता था और पकड़े जाने की स्थिति में फर्जी मेडिकल पर्चे (Prescriptions) को ढाल बनाया जाता था। आज के इस विस्तृत लेख में हम इस पूरी घटना, इसके पीछे के मास्टरमाइंड, काम करने के तरीके और कानूनी पहलुओं का विश्लेषण करेंगे।

पूरी घटना: शनिवार की दोपहर जब खुला राज

लोहिया नगर थाना क्षेत्र के एल ब्लॉक में अनिल गोयल का एक मकान है। उन्होंने अपने मकान का निचला हिस्सा दिसंबर 2025 में डॉक्टर केके गुप्ता और उनकी पत्नी हेमा गुप्ता को किराए पर दिया था। ऊपर की मंजिल पर एक शिक्षिका रहती थी। शनिवार, 21 मार्च 2026 की दोपहर को कॉलोनी के लोगों को कुछ संदिग्ध गतिविधियां दिखाई दीं।

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कॉलोनी के लोगों ने देखा कि कुछ युवक और युवतियां अलग-अलग समय पर मकान के अंदर जा रहे हैं, लेकिन उनके बाहर निकलने का कोई निश्चित समय नहीं था। शक होने पर मोहल्ले वालों ने मकान मालिक को बुलाया और जबरन क्लीनिक के अंदर दाखिल हो गए। अंदर का नजारा देखकर सबकी आँखें फटी रह गई। वहाँ मरीजों के इलाज के बजाय अय्याशी का सामान और आपत्तिजनक सामग्री बिखरी पड़ी थी।

Meerut Sex Racket in Doctor Clinic की सूचना तुरंत स्थानीय पुलिस को दी गई। मौके पर पहुँची लोहिया नगर पुलिस ने जब सघन तलाशी ली, तो एक कमरा अंदर से बंद मिला। दरवाजा तोड़ा गया तो अंदर तीन युवतियां छिपी हुई मिलीं। पुलिस ने मौके से डॉक्टर दंपति, उनके दो सहायकों (दीपक और मोहसिन) और युवतियों को हिरासत में ले लिया।

कैसे चलता था ‘फर्जी पर्चे’ का खेल? (The Modus Operandi)

इस रैकेट की सबसे हैरान करने वाली बात इसका ‘ऑपरेशनल मॉडल’ था। डॉक्टर दंपति ने कानूनी कार्रवाई से बचने के लिए एक फुल-प्रूफ प्लान तैयार किया था:

  1. पंजीकरण का दिखावा: जैसे ही कोई ग्राहक अंदर आता, ओपीडी रजिस्टर में उसकी एंट्री एक मरीज के तौर पर की जाती थी।
  2. फर्जी प्रिसक्रिप्शन: डॉक्टर तुरंत एक पर्चा तैयार कर देते थे, जिस पर ग्राहक का नाम और कल्पित बीमारी (अक्सर गुप्त रोग) लिखी होती थी।
  3. पार्टनर का नाम: पर्चे पर उस युवती का नाम भी ‘अटेंडेंट’ या ‘पार्टनर’ के रूप में लिख दिया जाता था, जो पहले से अंदर मौजूद होती थी।
  4. पकड़े जाने पर बचाव: यदि कभी पुलिस की रेड पड़ती, तो डॉक्टर और ग्राहक दोनों यह दावा करते कि वे ‘ट्रीटमेंट’ के लिए आए हैं। इस बार भी पकड़े जाने के बाद युवतियों ने वही फर्जी पर्चे पुलिस को दिखाए थे।
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रेट कार्ड और बिजनेस मॉडल: 600 रुपये का ‘डेली पैसेंजर’

पुलिस पूछताछ में सामने आया है कि यह कोई छोटा-मोटा काम नहीं था। इसे एक प्रोफेशनल बिजनेस की तरह चलाया जा रहा था।

  • किराया और निवेश: डॉक्टर दंपति ने ₹17,000 प्रति माह पर यह फ्लैट लिया था।
  • एजेंटों की भूमिका: दीपक और मोहसिन नाम के दो युवक मुख्य एजेंट के रूप में काम करते थे। उनका काम ग्राहकों को खोजना और उन्हें क्लीनिक तक सुरक्षित पहुँचाना था।
  • चार्जेस: ग्राहकों से प्रति घंटे के हिसाब से ₹600 से ₹1500 तक चार्ज किए जाते थे। इसमें से एक हिस्सा युवतियों को मिलता था और बाकी डॉक्टर दंपति और एजेंटों के बीच बंटता था।
  • सुविधाएं: क्लीनिक के अंदर ही शराब, शक्तिवर्धक दवाएं और अन्य आपत्तिजनक सामग्री उपलब्ध कराई जाती थी।

मोहल्ले वालों की सतर्कता: कैसे हुआ शक?

शास्त्री नगर एक शांतिपूर्ण और संभ्रांत इलाका माना जाता है। यहाँ डॉक्टर केके गुप्ता ने जब ‘सेक्सोलॉजिस्ट’ का बोर्ड लगाया, तो लोगों को लगा कि बुजुर्ग डॉक्टर हैं, शायद लोगों का भला होगा। लेकिन धीरे-धीरे कुछ बातें खटकने लगीं:

  • क्लीनिक पर आने वाले लोग बीमार नहीं लगते थे।
  • लड़कियों का आना-जाना बहुत ज्यादा था, जबकि स्टाफ के नाम पर केवल दो युवक थे।
  • अक्सर देर रात तक संदिग्ध गाड़ियाँ वहाँ खड़ी रहती थीं।
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शनिवार को जब तीन लड़कियों को चोरी-छिपे अंदर जाते देखा गया, तो स्थानीय निवासियों का सब्र टूट गया। उन्होंने संगठित होकर इस Meerut Sex Racket in Doctor Clinic का पर्दाफाश करने का निर्णय लिया।

कानूनी कार्रवाई और पुलिस की भूमिका

मेरठ पुलिस ने इस मामले में ‘अनैतिक व्यापार निवारण अधिनियम’ (PITA Act) के तहत मामला दर्ज किया है।

  • धाराएं: आरोपियों पर देह व्यापार के लिए घर का उपयोग करने, दलाली करने और अनैतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की धाराओं में केस दर्ज किया गया है।
  • हिस्ट्री खंगालना: पुलिस अब यह जाँच कर रही है कि क्या डॉक्टर दंपति पहले भी किसी ऐसे मामले में संलिप्त रहे हैं। उनके पुराने रिकॉर्ड्स और बैंक ट्रांजैक्शंस की जाँच की जा रही है।
  • युवतियों की स्थिति: पकड़ी गई युवतियों को काउंसलिंग के बाद परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया है। पुलिस यह भी पता लगा रही है कि क्या उन्हें किसी मजबूरी में इस धंधे में धकेला गया था।

मकान मालिकों के लिए एक बड़ी चेतावनी

यह घटना मेरठ के उन सभी मकान मालिकों के लिए एक सबक है जो बिना उचित सत्यापन (Verification) के अपना घर किराए पर दे देते हैं।

  1. पुलिस वेरिफिकेशन अनिवार्य: अनिल गोयल ने बताया कि उन्होंने डॉक्टर समझकर भरोसा कर लिया था। लेकिन अगर पुलिस वेरिफिकेशन कराया गया होता, तो शायद उनकी पिछली गतिविधियों का पता चल जाता।
  2. किराएदारों की गतिविधि पर नजर: केवल किराया लेना ही काफी नहीं है, मकान में क्या चल रहा है, इसकी समय-समय पर जानकारी रखना मकान मालिक की नैतिक और कानूनी जिम्मेदारी है।
  3. बोर्ड पर न जाएं: कोई क्या बोर्ड लगा रहा है (डॉक्टर, वकील, सीए), उससे उसकी नीयत साफ नहीं होती।