AIIMS Bhopal: OPD में ‘पर्चा’ बनवाने का तरीका बदला, अब नहीं लगेगी लाइन

भोपाल 

एम्स में इलाज कराने वाले मरीजों को बड़ी राहत मिलने वाली है। उपचार और जांच के लिए एम्स की ओपीडी से लेकर इमरजेंसी तक मरीजों की कतार और भटकाव से मुक्ति मिलने वाली है। संस्थान ने अपनी सेवाओं को डिजिटलाइजेशन करने के लिए नई तकनीक अपनाने जा रहा है। इसके तहत व्हाट्सएप से ही डॉक्टर का अपॉइंटमेंट और जांच का भुगतान किया जा सकेगा। उसी व्हाट्सएप पर जांच रिपोर्ट भी प्राप्त होगी। इसका पायलट प्रोजेक्ट इस सप्ताह के अंत या अप्रेल के प्रारंभ में शुरू होने वाला है। यह सेवा जून तक लागू होगी। ओपीडी की लाइन में लगने वाले लोगों को राहत मिलेगी।

ऑनलाइन भुगतान और तुरंत रिफंड
आइआइटी इंदौर इस तकनीक को तैयार कर रहा है। इस प्रणाली में जांच और अन्य सेवाओं का भुगतान ऑनलाइन होगा। भूल से यदि मरीज अधिक राशि जमा कर देगा, तो अतिरिक्त धनराशि उसे उसी प्लेटफॉर्म के जरिए मिल जाएगा। इससे काउंटर पर भीड़ कम होगी और प्रक्रिया पारदर्शी बनेगी।

See also  भोपाल सहित पूरे कंपनी कार्यक्षेत्र में अब तक 06 लाख, 57 हजार से अधिक स्मार्ट मीटर स्थापित

मरीजों को मिलेंगी ये स्मार्ट सुविधाएं

    व्हाट्सएप पर अपॉइंटमेंट स्लॉट चुनने की सुविधा
    डिस्प्ले बोर्ड पर विभागवार प्रतीक्षा समय दिखेगा
    नेविगेशन फीचर से विभाग तक पहुंचना आसान
    जांच रिपोर्ट की पीडीएफ व्हाट्सएप पर प्राप्त होगी
    ओपीडी में क्यू मैनेजमेंट ऐप से टोकन नंबर मिलेगा
    डिजिटल ट्रैकिंग से हर प्रक्रिया पर नजर रखी जाएगी

सिस्टम बताएगा कहां है कौन विभाग
इस तकनीक के नेविगेशन फीचर से यह पता चलेगा कि परिसर में कौन विभाग कहां हैं और कहां कौन सी जांच होती है। ए्स के एक हिस्से में इसका पायलट प्रोजेक्ट चलाया जाएगा। सफल होने पर इसे पूरे परिसर में लागू किया जाएगा।

हम इसका पायलट प्रोजेक्ट मार्च के अंत तक शुरू करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन इसे पूरी तरह से लागू करने में तीन महीना लगेगा। इससे कामकाज अधिक व्यवस्थित होगा, मरीजों और उनके परिजन परेशानी से बचेंगे। – डॉ. केतन मेहरा, एसोसिएट प्रोफेसर, यूरोलॉजी विभाग और प्रवक्ता, एम्स भोपाल

See also  MP में सोलर पंप योजना अधूरी: 52 हजार का लक्ष्य, 40,662 पर ही अटकी रफ्तार

बच्चों के किडनी ट्रांसप्लांट की तैयारी
एम्स में पीडियाट्रिक किडनी ट्रांसप्लांट शुरू करने की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। संस्थान के अनुसार तीन बच्चों को चिन्हित किया गया है और उनके डोनर की जांच व प्री-वर्कअप जारी है। सब कुछ अनुकूल रहा तो अगले माह प्रदेश का पहला बाल किडनी प्रत्यारोपण संभव हो सकेगा।