प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मार्च को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन करेंगे, जानिए 10 खास बातें

 नोएडा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 28 मार्च 2026 को नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) का उद्घाटन करेंगे. यूपी सरकार ने कहा है कि जेवर में बना नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए गेम चेंजर साबित होगा. यह एयरपोर्ट कृषि, उद्योग, लॉजिस्टिक्स और रोजगार के क्षेत्र में व्यापक असर डालेगा.

नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का उद्घाटन काल यानी 28 मार्च को हो रहा है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश के इस सबसे बड़े हवाई अड्डे का उद्घाटन करेंगे। इससे न केवल हवाई सफर करने वालों को फायदा होगा बल्कि दिल्ली-एनसीआर के रियल एस्टेट सेक्टर को भी बूस्ट मिलेगा।

जेवर हवाई अड्डा एनसीआर के विकास में बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके शुरू होने से यहां के इलाकों में कनेक्टिविटी मजबूत होगी और रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। अभी तक ज्यादातर लोग दिल्ली उसके आसपास रहना ज्यादा पसंद करते थे। इस हवाई अड्डे के शुरू होने के बाद यमुना एक्सप्रेसवे, ग्रेटर नोएडा और जेवर जैसे इलाकों में रहने का ट्रेंड बढ़ सकता है। यहां के इलाकों में सड़कें बेहतर की जा रही, मेट्रो और रैपिड रेल जैसी सुविधाएं बढ़ाई जा रही हैं, जिससे यहां रहना और ज्यादा आसान हो जाएगा।

जेवर एयरपोर्ट शुरू में (फेज-1) प्रति वर्ष 1.2 करोड़ यात्रियों (12 मिलियन पैसेंजर्स) को हैंडल करने की क्षमता रखता है. पूरी तरह विकसित होने के बाद इसकी क्षमता बढ़ाकर 7 करोड़ यात्रियों प्रति वर्ष (70 मिलियन पैसेंजर्स) तक की जा सकेगी। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के विजन के तहत विकसित यह एयरपोर्ट राज्य की भौगोलिक सीमाओं को तोड़कर वैश्विक बाजार से जोड़ेगा. इससे कृषि उत्पादों, छोटे उद्योगों (MSMEs), पर्यटन और अन्य क्षेत्रों को सीधा फायदा होगा. जेवर एयरपोर्ट के उद्घाटन समारोह की तैयारियां अंतिम चरण में हैं. सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट, पार्किंग, मेडिकल सुविधाएं और सीसीटीवी निगरानी को मजबूत किया गया है. वीवीआईपी मूवमेंट और आम लोगों की सुविधा का पूरा ध्यान रखा जा रहा है। 

इन्वेस्ट करने वालों को एक्सपर्ट की सलाह
एक्सपर्ट की मानना है कि बेशक नोएडा एयरपोर्ट शुरू हो गया है और इसके आसपास कई बड़े हाउसिंग और बिजनेस प्रोजेक्ट्स शुरू हो रहे हैं या शुरू हो चुके हैं लेकिन फिर भी आपको इन्वेस्ट के मामले में सतर्क रहना चाहिए। कोई भी प्रॉपर्टी खरीदने से पहले उसकी कानूनी स्थिति की जांच जरूर करें। यह जरूर चेक करें कि वो प्रोजेक्ट RERA एक्ट 2016 के तहत रजिस्टर् है या नहीं। केवल लोकेशन के आधार पर फैसला न लें बल्कि वहां हो रहे वास्तविक विकास और सुविधाओं को भी समझें।

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ताज से लेकर कुंभ तक… सफर होगा आसान

ये हवाई अड्डा एक बड़े ‘गेटवे’ यानी प्रवेश द्वार का काम करेगा. भारत अपनी संस्कृति और अध्यात्म के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है. अब तक विदेशी या घरेलू पर्यटकों को आगरा का ताजमहल देखने, मथुरा और वृंदावन के दर्शन करने, प्रयागराज के कुंभ मेले में जाने या फिर श्रावस्ती और कुशीनगर जैसे प्रमुख बौद्ध स्थलों तक पहुंचने के लिए काफी हद तक दिल्ली एयरपोर्ट पर निर्भर रहना पड़ता था. जेवर एयरपोर्ट के शुरू होने से इन सभी ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्थलों की दूरी काफी कम हो जाएगी. जिससे पर्यटन को एक नई रफ्तार मिलेगी और यात्रियों के समय और पैसे दोनों की बचत होगी। 

यूपी की इकॉनमी के लिए गेम चेंजर है जेवर एयरपोर्ट
मनोज गौड़, सीएमडी, गौड़ ग्रुप के अनुसार, जेवर एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के पूरे इकॉनोमिक सिस्टम के लिए एक बड़ा कदम है। इसके शुरू होने से इस पूरी बेल्ट पर मैन्युफैक्चरिंग, लॉजिस्टिक्स और सर्विस सेक्टर से जुड़े कई प्रोजेक्ट्स शुरू होंगे। कनेक्टिविटी और इंडस्ट्री बढ़ने से सीधे तौर पर रोजगार के अवसर पैदा होंगे। जाहिर है यहां जॉब करने वालों को किफायती घरों की जरूरत होगी जिससे हाउसिंग की डिमांड बढ़ेगी। यह एयरपोर्ट सिर्फ नोएडा या ग्रेटर नोएडा ही नहीं बल्कि पूरे उत्तर प्रदेश के लिए एक मजबूत 'गेटवे' का काम करेगा।

 

आइए जानते हैं जेवर एयरपोर्ट से जुड़ी 10 खास बातें…

  • – नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट भारत को वैश्विक एविएशन हब बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है. दिल्ली-एनसीआर के लिए दूसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट बनकर यह क्षेत्र की कनेक्टिविटी को और मजबूत करेगा। 
  • – यह एयरपोर्ट दिल्ली-एनसीआर का दूसरा बड़ा अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट होगा, जो दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर बढ़ते बोझ को कम करेगा. एक रनवे के साथ शुरू होने वाला यह एयरपोर्ट 3900 मीटर लंबा रनवे, आधुनिक टर्मिनल और कार्गो सुविधाओं से लैस है। 
  • – शुरू में (फेज-1) यह एयरपोर्ट सालाना 1.2 करोड़ (12 मिलियन) यात्रियों को हैंडल करेगा. पूरा विकसित होने पर क्षमता 7 करोड़ यात्रियों और लगभग 10 लाख टन कार्गो तक पहुंच जाएगी। 
  • – 3900 मीटर लंबा रनवे, आधुनिक नेविगेशन सिस्टम, ऑल-वेदर ऑपरेशन और 40 एकड़ का एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर) फेसिलिटी है. कार्गो टर्मिनल 2.5 लाख टन से शुरू होकर 18 लाख टन तक बढ़ाया जा सकेगा।
  • – एयरपोर्ट को नेट-जीरो एमिशन बनाने का लक्ष्य है. भारतीय विरासत से प्रेरित डिजाइन (घाट और हवेली जैसी शैली) में बनाया गया है। 
  • – यमुना एक्सप्रेसवे पर स्थित यह एयरपोर्ट सड़क, रेल, मेट्रो और अन्य परिवहन से जुड़ेगा. इससे यात्रियों और कार्गो की सुविधा बढ़ेगी। 
  • – फल, सब्जी, डेयरी उत्पाद और फूल जैसे जल्द खराब होने वाले सामान आसानी से अंतरराष्ट्रीय बाजार पहुंचेंगे. इससे किसानों की आय बढ़ेगी और 'फार्म टू ग्लोबल मार्केट' मॉडल मजबूत होगा। 
  • – राज्य के करीब 1 करोड़ छोटे-मध्यम उद्योगों को वैश्विक बाजार से जोड़ने में मदद मिलेगी. निर्यात बढ़ेगा, लागत घटेगी और प्रतिस्पर्धा क्षमता मजबूत होगी। 
  • – एयरपोर्ट, लॉजिस्टिक्स, होटल, कृषि और सप्लाई चेन सेक्टर में लाखों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार पैदा होंगे. आसपास के इलाकों में औद्योगिक विकास तेज होगा। 
  • – फेज-1 पर करीब 11,200 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं. यह पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर विकसित किया जा रहा है। 
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वास्तुकला में दिखेगी यूपी, उत्तराखंड और राजस्थान की झलक
अक्सर एयरपोर्ट का मतलब कांच और कंक्रीट की बड़ी और नीरस इमारतें माना जाता है. लेकिन, नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के डिजाइन को बेहद खास तरीके से तैयार किया गया है. अधिकारियों के मुताबिक, इसकी वास्तुकला में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की साफ झलक देखने को मिलेगी। 

टर्मिनल की छत को एक सफेद रंग के पारदर्शी कैनोपी (छतरी) का आकार दिया गया है, जो गंगा, यमुना और हिंडन नदियों की उठती-गिरती लहरों का अहसास कराती है. इसके चेक-इन हॉल के फर्श पर लाल पत्थर का काम किया गया है और हवा व प्राकृतिक रोशनी अंदर आने के लिए पारंपरिक जालीदार स्क्रीन लगाई गई हैं. पर्यावरण का ध्यान रखते हुए इसके निर्माण में स्थानीय सामग्री और चूना पत्थर के कैल्सीन्ड क्ले सीमेंट का इस्तेमाल किया गया है। 

इसका लक्ष्य पूरी तरह से ‘कार्बन नेट-जीरो’ (यानी पर्यावरण को बिल्कुल नुकसान न पहुंचाने वाला) एयरपोर्ट बनना है. नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट के सीईओ क्रिस्टोफ श्नेलमैन ने इसे ‘स्विस कार्यकुशलता और भारतीय मेहमाननवाजी’ का बेहतरीन संगम बताया है, जिसका लेआउट इतना आसान रखा गया है कि यात्रियों को रास्ता खोजने में कोई परेशानी न हो। 

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पहले चरण पर ही 11,200 करोड़ का निवेश
यह एक विशाल इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट है जिसे पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया गया है. इसके पहले चरण पर ही 11,200 करोड़ रुपये का निवेश किया गया है. ग्रेटर नोएडा के परी चौक से करीब 40 किलोमीटर दूर और यमुना एक्सप्रेसवे से सटा यह एयरपोर्ट 1,334 हेक्टेयर जमीन पर फैला है। 

यात्रियों की क्षमता की बात करें, तो शुरुआत में यह एयरपोर्ट हर साल 1.2 करोड़ (12 मिलियन) यात्रियों को अपनी सेवाएं देगा. जैसे-जैसे इसके बाकी चरण (फेज) पूरे होंगे, यह क्षमता बढ़कर सालाना 7 करोड़ (70 मिलियन) यात्रियों तक पहुंच जाएगी. फिलहाल इसका टर्मिनल-1 (T1) करीब 1,38,000 वर्ग मीटर के बड़े इलाके में फैला है, जो चौथे चरण के अंत तक बढ़कर 5,00,000 वर्ग मीटर के करीब हो जाएगा. इसके पहले रनवे की लंबाई 3,900 मीटर और चौड़ाई 45 मीटर है. यह रनवे सभी मौसमों में काम करने वाले आधुनिक नेविगेशन सिस्टम से लैस है और बड़े आकार के (वाइड-बॉडी) विमानों को संभालने में पूरी तरह सक्षम है। 

सिर्फ यात्री नहीं, व्यापार का भी नया केंद्र
कोई भी बड़ा हवाई अड्डा सिर्फ यात्रियों को नहीं लाता, बल्कि वह अपने साथ रोजगार और व्यापार के बड़े अवसर भी पैदा करता है. जेवर एयरपोर्ट में 80 एकड़ जमीन पर एक विशाल कार्गो (माल ढुलाई) हब तैयार किया गया है. शुरुआत में इसकी क्षमता सालाना 2.5 लाख मीट्रिक टन माल संभालने की होगी, जिसे भविष्य में 18 लाख मीट्रिक टन तक बढ़ाया जा सकेगा। 

इसके अलावा, यहां 40 एकड़ में विमानों के रखरखाव और मरम्मत (MRO – Maintenance, Repair, and Overhaul) के लिए एक समर्पित सुविधा भी विकसित की गई है. इससे देश के मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और उद्योगों को तेज और सुगम कनेक्टिविटी मिलेगी, जो अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाएगा।