छत्तीसगढ़ के बहुचर्चित राम अवतार जग्गी हत्याकांड मामले में अमित जोगी को हाईकोर्ट से बड़ा झटका लगा है। कोर्ट ने उन्हें तीन हफ्ते में सरेंडर करने का आदेश दिया है। वहीं इस मामले में अमित जोगी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा है कि आज उच्च न्यायालय ने बिना सुनवाई का अवसर दिए मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया। मुझे खेद है कि जिस व्यक्ति को अदालत ने दोषमुक्त किया था, उसे बिना सुनवाई का एक भी अवसर दिए दोषी करार दिया गया। यह अप्रत्याशित है।
अमित जोगी ने कहा, अदालत ने मुझे 3 सप्ताह के अंदर सरेंडर करने का समय दिया है। मुझे लगता है कि मेरे साथ गंभीर अन्याय हुआ है। मुझे पूरा विश्वास है कि सर्वोच्च न्यायालय से मुझे न्याय अवश्य मिलेगा। मैं न्याय व्यवस्था पर पूरा विश्वास रखता हूं। मैं पूर्ण शांति, आस्था और धैर्य के साथ आगे बढ़ रहा हूं। सत्य की जीत अवश्य होगी।
4 जून 2003 को एनसीपी नेता रामावतार जग्गी की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में 31 अभियुक्त बनाए गए थे, जिनमें से बल्टू पाठक और सुरेंद्र सिंह सरकारी गवाह बन गए थे। अमित जोगी को छोड़कर बाकी 28 लोगों को सजा मिली थी। हालांकि 31 मई 2007 को रायपुर की विशेष अदालत ने सबूतों के अभाव में अमित जोगी को बरी कर दिया था। रामअवतार जग्गी के बेटे सतीश जग्गी ने अमित जोगी को बरी करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की थी, जिस पर अमित के पक्ष में स्टे लगा था। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने केस को हाईकोर्ट भेज दिया।
कारोबारी बैकग्राउंड वाले रामावतार जग्गी देश के बड़े नेताओं में शुमार पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल के बेहद करीबी थे। जब शुक्ल कांग्रेस छोड़कर NCP में शामिल हुए तो जग्गी भी उनके साथ गए। विद्याचरण ने जग्गी को छत्तीसगढ़ में NCP का कोषाध्यक्ष बना दिया था।
जग्गी हत्याकांड में अभय गोयल, याहया ढेबर, वीके पांडे, फिरोज सिद्दीकी, राकेश चंद्र त्रिवेदी, अवनीश सिंह लल्लन, सूर्यकांत तिवारी, अमरीक सिंह गिल, चिमन सिंह, सुनील गुप्ता, राजू भदौरिया, अनिल पचौरी, रविंद्र सिंह, रवि सिंह, लल्ला भदौरिया, धर्मेंद्र, सत्येंद्र सिंह, शिवेंद्र सिंह परिहार, विनोद सिंह राठौर, संजय सिंह कुशवाहा, राकेश कुमार शर्मा, (मृत) विक्रम शर्मा, जबवंत, विश्वनाथ राजभर दोषी पाए गए थे।
प्रिय मित्रों और शुभचिंतकों 🙏
आज माननीय उच्च न्यायालय ने मेरे विरुद्ध CBI की अपील को मात्र 40 मिनट में स्वीकार कर लिया- बिना सुनवाई का अवसर दिए।
मुझे खेद है कि जिस व्यक्ति को अदालत ने दोषमुक्त किया था, उसे बिना सुनवाई का एक भी अवसर दिए दोषी करार दिया गया। यह अप्रत्याशित है।… pic.twitter.com/t70pLdLTJ7
— 𝐀𝐦𝐢𝐭 𝐀𝐣𝐢𝐭 𝐉𝐨𝐠𝐢 (@AmitJogi) April 2, 2026
क्या हुआ था पूर्व के फैसले में
अमित जोगी के ख़िलाफ सीबीआई जांच चल रही थी और अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि सीबीआई ने पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं कराए हैं जिसकी वजह से जोगी को बरी किया जा रहा है. इस हत्याकांड में 28 अन्य लोगों को दोषी पाया गया है.
अदालत ने जिन लोगों को दोषी पाया है उसमें कुछ पुलिस अधिकारी भी शामिल हैं जिनके ख़िलाफ़ सीबीआई ने राम अवतार जग्गी हत्याकांड का मामला दर्ज न करने के कारण षडयंत्र में शामिल होने का मामला दायर किया था.
अमित जोगी के वकील एसके फरहान ने कहा कि सीबीआई ने अमित जोगी के ख़िलाफ इस हत्याकांड का षडयंत्र रचने का जो आरोप लगाया था उसे साबित करने के लिए साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए.
राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के उम्मीदवार जग्गी की 2003 में राज्य में होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले हत्या कर दी गई थी. अजित जोगी उस समय छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री थे. राज्य में पार्टी की सरकार बदलने के बाद इस मामले ने तूल पकड़ा था. बाद में अमित जोगी को गिरफ्तार किया गया और उन्होंने करीब दस माह जेल में बिताए.
हाइकोर्ट के एक फ़ैसले के बाद अमित को जमानत मिली लेकिन उच्चतम न्यायालय के आदेश पर उन्हें दोबारा गिरफ्तार कर लिया गया था. रामअवतार जग्गी के परिवारजनों का कहना है कि वो इस मामले में ऊपरी अदालत में अपील करेंगे.