Rupee Rally: डॉलर के मुकाबले 12 साल में सबसे बड़ी तेजी, RBI के कड़े कदमों से मिली बड़ी उछाल

नई दिल्ली

रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) के सख्त कदमों के बाद रुपये ने 12 साल की सबसे बड़ी तेजी दर्ज की है, जिससे बाजार में नई हलचल पैदा हो गई है। आज 6 अप्रैल को रुपया 0.3% मजबूत होकर 92.83 प्रति डॉलर पर पहुंच गया। इससे पहले गुरुवार को इसमें 1.8% की तेज छलांग दर्ज की गई थी, जो सितंबर 2013 के बाद सबसे बड़ी एक दिन की बढ़त है।

ब्लूमबर्ग ने सीआर फॉरेक्स के प्रबंध निदेशक अमित पबारी के हवाले से बताया है कि 10 अप्रैल की समयसीमा से पहले बैंक अपनी डॉलर की स्थिति समाप्त करेंगे, जिससे रुपया और मजबूत होकर 91.50 से 92 के दायरे में पहुंच सकता है। शुक्रवार को गुड फ्राइडे के कारण स्थानीय बाजार बंद थे।

RBI के सख्त फैसलों से बदला खेल
रुपये की मजबूती के पीछे सबसे बड़ा कारण RBI के हालिया कड़े कदम हैं। केंद्रीय रिजर्व बैंक ने बैंकों की डॉलर पोजीशन $100 मिलियन तक सीमित की और ऑफशोर ट्रेडिंग के बड़े माध्यम NDF पर रोक लगाई साथ ही सट्टेबाजी वाले सौदों पर भी सख्ती बढ़ाई। आरबीआई के इन कदमों से बाजार में डॉलर की मांग घटी और रुपया मजबूत हुआ।

See also  PM मोदी बंगाल दौरे पर, 17 जनवरी को हरी झंडी दिखाएंगे देश की पहली Sleeper Vande Bharat को

ईरान युद्ध का असर अब भी बना खतरा
हालांकि, पश्चिम एशिया में जारी अमेरिका-ईरान तनाव अभी भी रुपये के लिए बड़ा जोखिम बना हुआ है। तेल की कीमतों में तेजी, भारत का बढ़ता आयात बिल और देशी निवेशकों की बिकवाली, जैसे ये सभी फैक्टर रुपये पर दबाव बना सकते हैं।

पिछले एक साल में कितना कमजोर हुआ रुपया
तेजी के बावजूद, रुपया पिछले एक साल में करीब 8.2% गिर चुका है और एशिया की कमजोर मुद्राओं में शामिल रहा है। रुपये को सपोर्ट देने के लिए RBI को भारी हस्तक्षेप करना पड़ा, जिससे विदेशी मुद्रा भंडार में भी गिरावट आई है।

RBI की बैठक पर टिकी बाजार की नजर
अब निवेशकों की नजर RBI की आगामी मौद्रिक नीति बैठक पर है। खास तौर पर गवर्नर संजय मल्होत्रा के बयान महत्वपूर्ण होंगे। यह तय करेगा कि रुपया आगे और मजबूत होगा या दबाव में आएगा। समिति की बैठक सोमवार से शुरू होगी और बुधवार को इसके नतीजे की घोषणा की जाएगी।

See also  Big Breaking : VIDEO: मंत्री स्मृति ईरानी के काफिले का वाराणसी में किया घेराव

क्या फिर कमजोर होगा रुपया?
विशेषज्ञों के अनुसार, अगर ईरान युद्ध लंबा चलता है तो रुपया फिर दबाव में आ सकता है। मुथूट फिनकॉर्प लिमिटेड की मुख्य अर्थशास्त्री अपूर्व जावडेकर का कहना है, "मुझे उम्मीद है कि अगर ईरान युद्ध लंबा चलता है, जिससे कम से कम एक तिमाही तक तेल की कीमतें ऊंची रहेंगी, तो रुपया 96 प्रति डॉलर के स्तर तक कमजोर हो जाएगा, जब तक कि आरबीआई और हस्तक्षेप न करे।"

एशियाई देशों की करेंसी पर दबाव
भारत अकेला नहीं है। थाईलैंड, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर जैसे देश भी ऊर्जा आयात पर निर्भर हैं, जिससे उनकी मुद्राएं भी दबाव में हैं। RBI के सख्त कदमों से रुपये को मजबूती जरूर मिली है, लेकिन वैश्विक हालात, खासकर तेल और युद्ध आगे की दिशा तय करेंगे। निवेशकों को अभी सतर्क रहने की जरूरत है।