इसे मैं युद्ध नहीं कहूंगा: ईरान को लेकर डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणी, फिर अपनी तारीफ करने लगे

वाशिंगटन

दुनियाभर में आठ युद्ध रुकवाने का दावा करने वाले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान मामले को युद्ध मानने से ही इनकार कर दिया है। उन्होंने कहा है कि अमेरिका के अभियान के बाद ईरान की नौसेना और थल सेना कमजोर हो गई है और अब वे समझौता करने के लिए गिड़गिड़ा रहे हैं। ईरान की सैन्य क्षमता पर बात करते हुए ट्रंप ने कहा कि उनकी ड्रोन फैक्ट्रियों को भारी नुकसान हुआ है। इसके अलावा ईरान की परमाणु क्षमता को भी धराशायी कर दिया गया है।

बता दें कि डोनाल्ड ट्रंप ने भारत और पाकिस्तान के बीच युद्ध रुकवाने का भी दावा किया था। उन्होंने कहा था कि टैरिफ का दबाव बनाकर उन्होंने युद्ध रुकवाया था। युद्ध रुकवाने के दावे करके वह कई बार नोबेल पुरस्कार की भी इच्छा जता चुके हैं। इस बार का शांति का नोबेल पुरस्कार उन्हें नहीं मिला तो वह काफी भड़के हुए थे।

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युद्ध को लेकर क्या कह रहे डोनाल्ड ट्रंप
डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि जब तक ईरान परमाणु समझौते की शर्तें मानने को तैयार नहीं होता तब तक नाकेबंदी जारी रहेगी। ट्रंप ने कहा कि यदि ईरान परमाणु हथियार बनाना जारी रखता है, तो उसके साथ 'कभी कोई समझौता नहीं' होगा। दूसरी ओर, ईरान का कहना है कि उसका परमाणु कार्यक्रम केवल नागरिक उद्देश्यों के लिए है।

अमेरिकी राष्ट्रपति और उनकी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम ईरान के ताजा प्रस्ताव पर चर्चा कर रही है, जिसमें ईरान ने पहले होर्मुज जलडमरूमध्य को खोलने और नाकेबंदी हटाने का सुझाव दिया है, जबकि परमाणु वार्ता को स्थगित करने की बात कही है। नाकेबंदी जारी रखने के श्री ट्रंप के फैसले से वैश्विक तेल बेंचमार्क 'ब्रेंट क्रूड' की कीमतें गुरुवार को 125 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गईं। अमेरिकी राष्ट्रपति ने इस रणनीति का बचाव करते हुए कहा कि नाकेबंदी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई से अधिक प्रभावी हो सकती है। उन्होंने ईरान से जल्द कार्रवाई करने का आग्रह किया और कहा कि अधिकारी जरूरत पड़ने पर महीनों तक नाकेबंदी जारी रखने के तरीके खोज रहे हैं।

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अमेरिकी नीति निर्माताओं का मानना है कि लंबे समय तक लगे प्रतिबंध अंततः ईरान को तेल उत्पादन रोकने के लिए मजबूर कर सकते हैं। यह संघर्ष अब दसवें सप्ताह में प्रवेश कर चुका है, जबकि इसके चार से छह सप्ताह में सुलझने की उम्मीद थी। होर्मुज जलडमरूमध्य के प्रतिबंधित रहने से वैश्विक आपूर्ति से प्रतिदिन लगभग दो करोड़ बैरल तेल कम हो रहा है। अमेरिका की इस लंबी नाकेबंदी की तैयारी से एशियाई अर्थव्यवस्थाएं प्रभावित हो रही हैं। क्षेत्र के कई देश ऊर्जा आपूर्ति के लिए इस जलडमरूमध्य पर निर्भर हैं और कच्चे तेल, प्राकृतिक गैस, प्लास्टिक तथा उर्वरकों की आपूर्ति में कमी महसूस की जा रही है।