भारी माथापच्ची के विजय ने छू लिया जादुई आंकड़ा, अब सरकार बनाने के लिए नहीं कोई दिक्कत, जाने कैसे हुआ ये करिश्मा

तमिलनाडु की राजनीति में एक नए युग की शुरुआत हो गई है। बीते 4 दिनों से चल रही सियासी उठापटक और रिजॉर्ट पॉलिटिक्स के दांव-पेंच के बाद आखिरकार थलपति विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) ने सरकार बनाने के लिए बहुमत के आंकड़ा जुटा लिया है।

 

रिपोर्ट्स के मुताबिक गुरुवार को लेफ्ट और VCK ने TVK को समर्थन देने पर सहमति जताई है। इसके साथ ही राज्य में दशकों से काबिज DMK-AIADMK का द्रविड़ियन किला ढह गया है।

 

गौरतलब है कि 234 सीटो वाली तमिलनाडु विधानसभा में बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत होती है। 4 मई को आए नतीजों में विजय की TVK सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी लेकिन बहुमत के आंकड़े से दूर रह गई। TVK ने 108 सीटें जीती थीं। वहीं विजय दो सीटों, पेरम्बूर और त्रिची ईस्ट से चुनाव जीता है। ऐसे में एक सीट छोड़ने के बाद पार्टी की प्रभावी संख्या 107 रहने वाली थी। कांग्रेस के 5 विधायकों के समर्थन के बाद भी यह आंकड़ा 112 तक पहुंचा था। इस तरह बहुमत साबित करने के लिए विजय को और 6 विधायकों की जरूरत थी, जो अब पूरी हो गई है।

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इन पार्टियों का मिला साथ

 

विजय को VCK, CPI और CPIM का साथ मिला है। इससे पहले विदुथलाई चिरुथइगल काची यानी VCK ने गुरुवार को व्हाट्सएप पर समर्थन मांगने को लेकर विजय से नाराजगी जताई थी। हालांकि अब पार्टी ने विजय को समर्थन देने का फैसला किया है। VCK ने 2 सीटें जीती हैं। इसके अलावा CPI और CPIM ने भी विजय को समर्थन दिया है, जिनके पास 2-2 सीटें हैं। इस तरह 6 सीटें मिलते ही विजय के पास बहुमत का आंकड़ा जुट गया है।

 

विजय ने कैसे जुटाया नंबर?

 

कांग्रेस को साथ लाने के लिए विजय को ज्यादा मेहनत नहीं करनी पड़ी। कांग्रेस ने पहले दिन ही द्रमुक से अलग होकर अपने 5 विधायकों के साथ TVK को समर्थन देने का ऐलान कर दिया। हालांकि सरकार बनाने के लिए नम्बर अब भी कम थे। यहां राज्य की क्षेत्रीय व वामपंथी पार्टियों की भूमिका अहम हो गई। जैसे-जैसे अनिश्चितता बढ़ी, द्रमुक के साथ लंबे समय से जुड़े दलों ने भी अपने रुख पर दोबारा विचार करना शुरू कर दिया। इस बीच यह चर्चा भी होने लगी कि DMK और AIADMK विजय को रोकने के लिए हाथ मिला सकते हैं और बीजेपी भी इसका हिस्सा होगी। वहीं राज्यपाल ने दो बार मुलाकात के बाद भी विजय को सरकार बनाने का न्योता नहीं दिया, जिस पर CPI और VCK भड़क उठे और खुलकर विरोध जताया। तब विजय ने पर्दे के पीछे से इन पार्टियों से सहयोग मांगा।

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इसके बाद VCK ने एक अहम बैठक बुलाई। काफी सोच-विचार के बाद पार्टी ने विजय को समर्थन देने का फैसला किया। इसी तरह, भाकपा और माकपा ने भी पार्टी की आंतरिक बैठक बुलाई और अंत को विजय को समर्थन दे दिया। इससे पहले माकपा के राज्य नेता पी शन्मुगम ने पुष्टि की थी कि उन्हें विजय की ओर से समर्थन मांगने के लिए एक औपचारिक पत्र मिला है। उन्होंने यह भी कहा था कि संवैधानिक परंपरा के अनुसार त्रिशंकु विधानसभा की स्थिति में सबसे बड़ी पार्टी को ही सरकार बनाने के लिए बुलाया जाना चाहिए।