दिल्ली हाई कोर्ट का बड़ा फैसला: सिर्फ लोन न चुकाने पर नहीं जारी होगा LOC, बैंकों को झटका

नई दिल्ली

 दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि सिर्फ कर्ज न चुकाने के आधार पर किसी व्यक्ति के विरुद्ध लुक आउट सर्कुलर (एलओसी) जारी नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति पुरुषेंद्र कुमार कौरव की पीठ ने कहा कि एलओसी एक अंतिम कार्रवाई के रूप में की जाने वाली दंडात्मक कार्यवाही है और बैंक ऋण अदा करने में चूक या व्यावसायिक उद्देश्यों के लिए लिए गए ऋण के हर मामले में एलओसी जारी नहीं किया जा सकता।

कोर्ट ने कहा कि जहां एलओसी जारी करने वाले व्यक्ति को गबन या हेराफेरी के किसी अपराध में आरोपित नहीं बनाया गया है, वहां एलओसी मान्य नहीं हो सकता। इसके साथ ही पीठ ने अलग-अलग मामलों में वित्तीय संस्थानों, बैंकों व जांच एजेंसियों के अनुरोध पर 23 याचिकाकर्ताओं के खिलाफ जारी किए गए एलओसी को रद कर दिया।

48 घंटे पहले देनी होगी विदेश यात्रा की सूचना
अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ताओं को कोर्ट की पहले से अनुमति लिए बिना विदेश यात्रा करने का अधिकार होगा, लेकिन उन्हें अपनी रवानगी से कम से कम 48 घंटे पहले संबंधित विभाग या एजेंसी को इसकी सूचना व अपना यात्रा का पूरा ब्योरा देना होगा। पीठ ने स्पष्ट किया कि कानून में किसी बदलाव या कोर्ट के आदेश सहित किसी अन्य अप्रत्याशित घटना के तहत जांच एजेंसी एलओसी जारी करने की मांग करने के लिए स्वतंत्र होगी।

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सभी याचिकाकर्ता को राहत देते हुए पीठ ने स्पष्ट किया कि एलओसी की जरूरत, उसकी कानूनी वैधता को सही ठहराने की जिम्मेदारी पूरी तरह से उसे जारी करने वाली एजेंसी की होती है। पीठ ने कहा कि एलओसी अनिश्चित काल के लिए जारी नहीं किया जा सकता और इसकी समय-समय पर समीक्षा होनी चाहिए, ताकि जब इसका मकसद पूरा हो जाए, तो इसे वापस ले लेना चाहिए।

पीठ ने कहा कि एलओसी जारी करने वाले अधिकारी को जांच एजेंसी के हथियार के तौर पर काम नहीं करने के बजाय ठोस और विश्वसनीय जानकारी के आधार पर एक स्पष्ट आदेश जारी किया जाना चाहिए।

तीन श्रेणियों में बांटा गया
विभिन्न मामलों में फंसे 23 लोगों के खिलाफ ईडी, सीबीआइ, एसफआइओ व विभिन्न बैंकों के कहने पर एलओसी जारी किया गया था। इन सभी ने एलओसी को चुनौती दी है। अदालत ने 23 याचिकाओं को तीन मुख्य श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया था। इसमें ए श्रेणी में कुछ मामले ऐसे थे जिसमें केवल वित्तीय संस्थानों के अनुरोध पर एलओसी जारी किया गया था, जबकि बी श्रेणी में जांच एजेंसियों के अनुरोध पर एलओसी जारी किया था।

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वहीं, सी श्रेणी में याचिकाकर्ता को एलओसी जारी करने वाले फोरम के पास भेज दिया गया था। प्रत्येक श्रेणी कुछ अलग, लेकिन आपस में जुड़े हुए कानूनी मुद्दे को उठाती है और सभी का समाधान इस निर्णय में उचित क्रम में किया जाएगा।