GDP में गिरावट के संकेत, फिर भी भारत की रफ्तार बरकरार; अर्थव्यवस्था से जुड़ी आई मिश्रित खबर

नईदिल्ली 
विदेश से भारत के लिए एक साथ दो खबरें आई हैं, इनमें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक अच्छी और एक बुरी खबर शामिल है. यूनाइटेड नेशंस यानी UN के डिपार्टमेंट ऑफ इकोनॉमिक्स एंड सोशल अफेयर्स (UN DESA) ने एक रिपोर्ट जारी कर भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान में कटौती कर झटका दिया है, तो वहीं कहा है कि कटौती के बावजूद भारत दुनिया की सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुई अर्थव्यवस्थाओं में बना रहेगा।

अब इस रफ्तार से भागेगी इकोनॉमी
पीटीआई के मुताबिक, यूएन की रिपोर्ट में मिडिल ईस्ट संकट (Middle East Crisis) का हवाला देते हुए भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान में कटौती की गई है. इसे 20 बेसिस पॉइंट कम करते हुए FY26 के लिए 6.4 फीसदी कर दिया गया है. इससे पहले UN ने भारतीय इकोनॉमी के 6.6 फीसदी की रफ्तार से आगे बढ़ने का अनुमान जताया था। 

इसमें एनालिस्ट ने बताया है कि अमेरिका-इजरायल और ईरान युद्ध से पैदा हुए पश्चिम एशिया संकट ने ग्लोबल अनिश्चितता पैदा कर दी है, इससे लगने वाले आर्थिक झटकों के मद्देनजर जीडीपी ग्रोथ का अनुमान घटाया गया है। 

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UN DESA की रिपोर्ट के मुताबिक, मिडिल ईस्ट टेंशन वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए एक बहुत बड़ा झटका साबित हुई है. इससे जहां आर्थिक वृद्धि धीमी हुई है, तो महंगाई का दबाव लगातार बढ़ा है. प्रमुख अर्थशास्त्री इंगो पिटर्ले ने कहा कि इस ग्लोबल झटके से भारत भी अछूता नहीं है. ऊर्जा आयात पर निर्भरता के चलते ये प्रभावित हो रहा है। 

UN ने दी ये बड़ी खुशखबरी
भले ही यूएन ने भारत के जीडीपी ग्रोथ अनुमान को घटा दिया है, लेकिन इसके साथ ही एक गुड न्यूज भी दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि जीडीपी में गिरावट के बाद भी भारत सबसे तेजी से आगे बढ़ती हुईं दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में से एक बना रहेगा। 

पिटर्ले का कहना है कि हमने भारत में संरचनात्मक रूप से बहुत मजबूत ग्रोथ देखी है, जो कंज्यूमर डिमांड, सार्वजनिक निवेश और सर्विस एक्सपोर्ट में मजबूत प्रदर्शन के चलते है. सबसे तेज इकोनॉमी की लिस्ट में भारत को आगे रखने के में ये प्रमुख कारक होंगे। 

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चुनौतियां बहुत, फिर भी भारत में दम 
यूनाइटेड नेशंस के अर्थशास्त्रियों का कहना है कि भारत में दम है और देश के उत्पादन में अभी भी 6.4 फीसदी की ग्रोथ का अनुमान है. हालांकि, यह आंकड़ा बीते साल 2025 में 7.5 फीसदी की तुलना में कम है, जो स्पष्ट तस्वीर पेश करता है कि एनर्जी इंपोर्ट की लागत में तगड़ा उछाल, कठिन वित्तीय परिस्थितियां पैदा कर रहा है। 

रिपोर्ट में ये अनुमान भी जाहिर किया गया है कि अगर वित्त वर्ष 2027 में India's Economic Growth Rate फिर बढ़कर 6.6 फीसदी हो सकती है।