अमरनाथ यात्रा 2026: श्रद्धालुओं की सुरक्षा के लिए पहली बार लॉन्च हुआ ‘पहचान’ ऐप

श्रीनगर
इस साल अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से 28 अगस्त तक चलेगी. इस बार दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालुओं के लिए जम्मू-कश्मीर पुलिस ने सुरक्षा के बेहद कड़े और आधुनिक इंतजाम किए हैं. अमरनाथ यात्रा को पूरी तरह सुरक्षित बनाने के लिए सुरक्षाबलों की भारी तैनाती की जा रही है.

इतिहास में पहली बार, अमरनाथ यात्रा मार्ग पर सेवा देने वाले सभी टट्टू वालों (घोड़े वाले), कुलियों, दुकानदारों और टैक्सी ड्राइवरों को एक विशेष 'पहचान' ऐप (Pehchan App) से जोड़ा गया है.

'पहचान' ऐप के तहत, पुलिस वेरिफिकेशन के बाद इन सभी सेवा देने वालों को एक विशेष क्यूआर कोड जारी किया जा रहा है. यात्रा पर आने वाला कोई भी श्रद्धालु अपने मोबाइल से इस कोड को स्कैन करके उस व्यक्ति की सही पहचान कर सकता है.

क्या है 'पहचान' ऐप और कैसे करेगा काम?
अनंतनाग के SSP आमोद अशोक नागपुरे ने बताया कि इस साल की सुरक्षा व्यवस्था में सबसे अहम बदलाव 'पहचान' ऐप की शुरुआत है. उन्होंने कहा, ये एक बहुत एडवांस और अनोखी पहल है. इसके जरिए यात्रा मार्ग पर काम करने वाले सभी सेवा प्रदाताओं- जैसे घोड़े वाले, पिट्ठू (कुली) और टैक्सी ड्राइवरों का ऐप आधारित वेरिफिकेशन किया जा रहा है.

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एसएसपी ने आगे कहा, जांच पूरी होने के बाद पुलिस की तरफ से उन्हें एक खास क्यूआर कोड दिया जाता है. इस क्यूआर कोड की सबसे बड़ी खासियत ये है कि कोई भी पर्यटक, श्रद्धालु या सुरक्षाकर्मी अपने साधारण मोबाइल फोन से इसे स्कैन कर सकता है. स्कैन करते ही उस सेवा प्रदाता की पूरी क्रेडेंशियल सामने आ जाएगी. इससे यात्री पूरी तरह आश्वस्त हो सकेंगे कि उनके साथ मौजूद व्यक्ति पुलिस की ओर से वेरिफाइड है.

तैनात होंगी केंद्रीय बलों की 140 कंपनियां
SSP आमोद अशोक नागपुरे ने सुरक्षा तैयारियों की जानकारी दी. उन्होंने बताया कि इस साल तीर्थयात्रा की सुरक्षा के लिए अकेले पूरे जिले में CAPF की 140 कंपनियां तैनात की जा रही हैं. इसके साथ ही, सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए कई नए और कड़े कदम भी उठाए गए हैं.

श्रद्धालुओं को मिलेगा डर से छुटकारा
जम्मू-कश्मीर पुलिस के इस हाई-टेक कदम से अमरनाथ यात्रा पर आने वाले लाखों श्रद्धालुओं की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाएगी. पहले यात्रा के दौरान अनजान सेवा प्रदाताओं पर भरोसा करना यात्रियों के लिए एक बड़ी चुनौती होता था. लेकिन अब 'पहचान' ऐप और क्यूआर कोड तकनीक के आने से किसी भी संदिग्ध व्यक्ति की पहचान करना बेहद आसान हो जाएगा.

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स्थानीय प्रशासन को उम्मीद है कि इस तकनीक की मदद से न सिर्फ सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि यात्रियों और स्थानीय सेवा प्रदाताओं के बीच भरोसा भी बढ़ेगा. फिलहाल, प्रशासन यात्रा शुरू होने से पहले सभी दुकानदारों और मजदूरों का वेरिफिकेशन काम तेजी से पूरा करने में जुटा है.