धर्मांतरण के मामलों पर CM योगी सख्त, बोले- हिंदुओं को मुस्लिम बनाने वालों पर होगी कड़ी कार्रवाई

 लखनऊ

सीएम योगी आदित्यनाथ ने हिंदू से मुस्लिम बनवाने (धर्मांतरण) वाले और भूमि अतिक्रमण जैसे मुद्दों पर एक बार फिर सख्त रुख दिखाया है. लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि समाज को ऐसी नकारात्मक प्रवृत्तियों के प्रति जागरूक और सतर्क रहने की आवश्यकता है, जो सामाजिक संतुलन और सांस्कृतिक मूल्यों को प्रभावित करने का प्रयास करती हैं। 

मुख्यमंत्री ने रामायण के प्रसंगों का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय समाज के सामने आने वाली कई चुनौतियों के समाधान हमारे सांस्कृतिक ग्रंथों और परंपराओं में मौजूद हैं. उन्होंने माता सीता के अपहरण और भगवान राम के संघर्ष का उदाहरण देते हुए कहा कि यह केवल एक धार्मिक कथा नहीं, बल्कि समाज को जागरूक करने वाला संदेश भी है। 

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि जब रावण ने माता जानकी का अपहरण किया था, तब भगवान राम ने उनकी खोज और सम्मान की रक्षा के लिए उत्तर से दक्षिण तक समाज को एकजुट किया था. उनके मुताबिक यह प्रसंग केवल इतिहास या आस्था का विषय नहीं है, बल्कि समाज को संगठित रहने और गलत प्रवृत्तियों के खिलाफ खड़े होने की प्रेरणा भी देता है. उन्होंने कहा कि महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा भारतीय संस्कृति के केंद्र में रही है. ऐसे में किसी भी प्रकार के छल, दबाव या प्रलोभन के जरिए किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता और पहचान को प्रभावित करने की कोशिश को गंभीरता से लिया जाना चाहिए। 

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धर्मांतरण पर कानून और जागरूकता दोनों जरूरी
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार ने वर्ष 2020 में अवैध धर्मांतरण रोकने के लिए सख्त कानून बनाया था. उनका कहना था कि कानून अपनी जगह महत्वपूर्ण है, लेकिन केवल कानून बना देने से समस्या का पूरी तरह समाधान नहीं होता. उन्होंने जोर देकर कहा कि समाज में व्यापक जनजागरूकता की आवश्यकता है. लोगों को अपने अधिकारों, कानूनी प्रावधानों और सामाजिक जिम्मेदारियों के प्रति जागरूक होना चाहिए. यदि समाज सजग रहेगा तो किसी भी प्रकार की संदिग्ध गतिविधि को समय रहते रोका जा सकता है. योगी आदित्यनाथ ने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था में जनता की भागीदारी सबसे महत्वपूर्ण होती है. इसलिए केवल सरकार नहीं, बल्कि समाज को भी अपनी भूमिका निभानी होगी। 

अदालतों की टिप्पणियों का किया जिक्र
मुख्यमंत्री ने अपने भाषण में कहा कि धर्मांतरण से जुड़े मामलों पर वर्षों पहले भी चिंता जताई जा चुकी है. उन्होंने कहा कि विभिन्न न्यायिक टिप्पणियों और सामाजिक बहसों में इस विषय पर चर्चा होती रही है, लेकिन लंबे समय तक इसे गंभीरता से नहीं लिया गया. उनका कहना था कि जब किसी मुद्दे के सामाजिक प्रभाव दूरगामी हों, तो उस पर समय रहते संवाद और जागरूकता आवश्यक हो जाती है. इसी सोच के साथ उत्तर प्रदेश सरकार ने कानून और जनजागरूकता दोनों पर समान रूप से ध्यान देने का प्रयास किया है। 

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नकारात्मक ताकतें हर दौर में आती हैं
मुख्यमंत्री ने कहा कि इतिहास गवाह है कि हर कालखंड में ऐसी ताकतें सामने आती रही हैं, जो समाज में भ्रम, विभाजन या असंतुलन पैदा करने का प्रयास करती हैं. उन्होंने कहा कि चुनौती यह नहीं है कि ऐसी प्रवृत्तियां मौजूद हैं, बल्कि यह है कि समाज उनके प्रति कितना जागरूक है. यदि समाज संगठित और सजग रहेगा तो किसी भी नकारात्मक गतिविधि को सफल होने का अवसर नहीं मिलेगा. मुख्यमंत्री ने लोगों से सामाजिक एकता और सांस्कृतिक चेतना को मजबूत करने की अपील करते हुए कहा कि परिवार और समाज दोनों स्तर पर संवाद और जागरूकता जरूरी है। 

भूमि अतिक्रमण के मुद्दे पर भी बोले
धर्मांतरण के साथ-साथ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भूमि अतिक्रमण और अवैध कब्जों के मुद्दे पर भी अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि सार्वजनिक और धार्मिक महत्व की जमीनों की सुरक्षा सुनिश्चित करना प्रशासन और समाज दोनों की जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार के अवैध कब्जे या अतिक्रमण को स्वीकार नहीं किया जा सकता. राज्य सरकार इस दिशा में लगातार कार्रवाई कर रही है और आगे भी कानून के अनुसार कार्रवाई जारी रहेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि भूमि से जुड़े विवाद केवल कानूनी विषय नहीं होते, बल्कि उनका सामाजिक और सांस्कृतिक प्रभाव भी होता है. इसलिए ऐसे मामलों में संवेदनशीलता और सतर्कता दोनों आवश्यक हैं। 

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सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि भारत की पहचान उसकी संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक विरासत से है. यदि समाज अपनी जड़ों से जुड़ा रहेगा तो किसी भी प्रकार की चुनौती का सामना अधिक मजबूती से कर सकेगा. उन्होंने युवाओं से विशेष रूप से अपील की कि वे भारतीय इतिहास, संस्कृति और परंपराओं के बारे में पढ़ें और समझें. उनका कहना था कि जागरूक नागरिक ही मजबूत समाज का निर्माण करते हैं. मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्तमान समय सूचना और तकनीक का युग है. ऐसे में सही और गलत जानकारी के बीच अंतर समझना भी उतना ही जरूरी हो गया है. समाज को अफवाहों से बचते हुए तथ्यों और कानून के आधार पर आगे बढ़ना चाहिए।