H-1B Visa Fraud Case: Cognizant जांच के घेरे में, भारतीय IT प्रोफेशनल्स पर क्या होगा असर?

नई दिल्ली
अमेरिका में नौकरी कर डॉलर में कमाने का सपना देखने वाले भारतीय टेक प्रोफेशनल्स के लिए एक अहम खबर सामने आई है. अमेरिकी सरकार ने H-1B और PERM (ग्रीन कार्ड प्रक्रिया का शुरुआती चरण) वर्क वीजा कार्यक्रमों में कथित धोखाधड़ी और नियमों के दुरुपयोग की जांच तेज कर दी है. इस जांच के दौरान जिन बड़ी कंपनियों का नाम सार्वजनिक रूप से सामने आया है, उनमें आईटी दिग्गज Cognizant भी शामिल है। 

यह कार्रवाई अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की अगुवाई वाली टास्क फोर्स टू एल‍िमिनेट फ्रॉड के तहत की जा रही है. अमेरिकी श्रम विभाग ( के इंस्पेक्टर जनरल एंथनी डी'एस्पोसिटो ने बताया कि जांच एजेंसियों को कई व्हिसलब्लोअर्स से जानकारी मिली है. उन्होंने कहा कि Cognizant जैसी कुछ बड़ी कंपनियों से जुड़े मामलों की भी जांच की जा रही है और कई समन (Subpoenas) जारी किए जा चुके हैं। 

अमेरिकी सरकार क्या जांच कर रही है?

अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार जांच का फोकस उन मामलों पर है, जहां H-1B और PERM वीजा प्रक्रिया का कथित तौर पर गलत इस्तेमाल किया गया. इसमें फर्जी आवेदन, वेज-किकबैक (कर्मचारियों से वेतन का हिस्सा वापस लेने के आरोप), विदेशी कर्मचारियों के कथित शोषण और अमेरिकी श्रमिकों की जगह कम लागत वाले विदेशी कर्मचारियों को प्राथमिकता देने जैसे आरोपों की जांच की जा रही है। 

See also  मोदीनगर की आदर्श नगर कॉलोनी स्थित मस्जिद में एक धमकी भरा पत्र मिलने से हड़कंप मचा

हालांकि, यह स्पष्ट करना जरूरी है कि फिलहाल कॉग्नीजेंट के खिलाफ कोई औपचारिक आरोप तय नहीं हुए हैं और न ही किसी अदालत ने कंपनी को किसी भी मामले में दोषी ठहराया है. जांच अभी शुरुआती चरण में है। 

भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए यह मामला क्यों अहम है?
अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन से जुड़े हालिया सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024 में स्वीकृत H-1B लाभार्थियों में 70 प्रतिशत से अधिक भारतीय नागरिक थे. यानी अमेरिका के टेक सेक्टर में भारतीय इंजीनियरों और आईटी प्रोफेशनल्स की हिस्सेदारी सबसे अधिक है। 

वीजा ट्रेंड्स से जुड़े सार्वजनिक डेटाबेस बताते हैं कि Cognizant H-1B वीजा स्पॉन्सर करने वाली प्रमुख कंपनियों में शामिल रही है. इसलिए कंपनी से जुड़ी किसी भी बड़ी जांच पर भारतीय आईटी सेक्टर की नजर स्वाभाविक रूप से रहती है। 

कॉग्नीजेंट पहले भी रही है चर्चा में
पिछले कुछ वर्षों में Cognizant वैश्विक स्तर पर लागत घटाने, रीस्ट्रक्चरिंग और कर्मचारियों की छंटनी को लेकर भी चर्चा में रही है. ऐसे में यदि H-1B और PERM मामलों में नियामकीय जांच और सख्त होती है तो कंपनी समेत अन्य आईटी कंपनियों को भी वीजा प्रक्रियाओं में अतिरिक्त सावधानी बरतनी पड़ सकती है। 

See also  घूसखोर लेखपाल गिरफ्तार: एंटी करप्शन टीम ने धरदबोचा

भारत के IT सेक्टर और नौकरियों पर क्या असर पड़ सकता है?
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि H-1B वीजा पर निगरानी और कड़ी होती है तो इसके कई संभावित प्रभाव देखने को मिल सकते हैं। 

1. ऑनसाइट अवसर सीमित हो सकते हैं
कंपनियां नए H-1B वीजा स्पॉन्सर करने में पहले से अधिक सतर्क रुख अपना सकती हैं. इससे अमेरिका में काम करने के अवसर कुछ हद तक प्रभावित हो सकते हैं। 

2. भारत में ऑफशोर हायरिंग बढ़ सकती है
यदि अमेरिका में विदेशी कर्मचारियों की नियुक्ति जटिल होती है, तो कंपनियां भारत जैसे देशों से रिमोट या ऑफशोर मॉडल पर अधिक काम कराने की रणनीति अपना सकती हैं। 

3. हाई-स्किल और हाई-सैलरी प्रोफाइल को मिल सकता है फायदा
अमेरिकी श्रम विभाग वेतन और भर्ती प्रक्रिया पर विशेष नजर रख रहा है. ऐसे में अधिक कौशल और बेहतर वेतन वाले पदों पर H-1B स्पॉन्सरशिप की संभावना अपेक्षाकृत मजबूत रह सकती है। 

See also  छात्रों पर हिंसा विवाद के बीच CRPF चीफ का बड़ा बयान, बोले- 'मैं जिम्मेदारी लूंगा, डरने की जरूरत नहीं'

फिलहाल जांच शुरुआती चरण में है. आने वाले महीनों में अमेरिकी एजेंसियों की जांच और संभावित कानूनी कार्रवाई के आधार पर ही यह स्पष्ट होगा कि इसका कॉग्नीजेंट, अन्य आईटी कंपनियों और भारतीय टेक प्रोफेशनल्स पर वास्तविक प्रभाव कितना पड़ता है।