मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भारत की बड़ी आर्थिक बढ़त, चीन की अर्थव्यवस्था पर बढ़ा दबाव

नई दिल्ली
दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन की रफ्तार एक बार फिर धीमी पड़ गई है. साल 2026 की दूसरी तिमाही (अप्रैल-जून) में चीन की जीडीपी ग्रोथ घटकर 4.3% रह गई, जो 2022 के आखिर के बाद सबसे कम है. इससे पहले पहली तिमाही में चीन की अर्थव्यवस्था 5% की दर से बढ़ी थी. हालांकि, मार्केट को पहले से ही ग्रोथ में नरमी की उम्मीद थी, लेकिन ताजा आंकड़े यह दिखाते हैं कि चीन की अर्थव्यवस्था अभी भी कई चुनौतियों से जूझ रही है. लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी की भारत की जीडीपी अभी भी स्थिर है। 

वैसे तो चीन की सरकार लगातार अर्थव्यवस्था को संभालने की कोशिश कर रही है, लेकिन कमजोर घरेलू मांग, प्रॉपर्टी सेक्टर की परेशानी और ग्लोबल अनिश्चितताओं का असर अब भी साफ दिखाई दे रहा है. इसका असर सिर्फ चीन तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि भारत समेत दुनिया के कई देशों पर भी पड़ सकता है। 

क्यों धीमी हुई चीन की अर्थव्यवस्था?
चीन में सबसे बड़ी चिंता घरेलू मांग की कमजोरी है. लोग पहले की तुलना में कम खर्च कर रहे हैं, जिससे कंपनियों की सेल्स पर असर पड़ा है. वहीं, निजी निवेश भी उम्मीद के मुताबिक नहीं बढ़ रहा है. लंबे समय से प्रॉपर्टी सेक्टर संकट का सामना कर रहा है, जिससे निर्माण और निवेश दोनों प्रभावित हुए हैं। 

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इसके अलावा, ग्लोबल लेवल पर बढ़ती अनिश्चितता और कुछ सेक्टर्स में बढ़ी लागत ने भी आर्थिक गतिविधियों पर दबाव बनाया है. हालांकि, चीन के निर्यात ने कुछ राहत जरूर दी है. खासकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), इलेक्ट्रॉनिक्स और हाई-टेक प्रोडक्ट्स की मांग बनी रहने से निर्यात में मजबूती देखने को मिली है, लेकिन यह घरेलू कमजोरी की पूरी भरपाई नहीं कर सका। 

भारत की जीडीपी कितनी?
जुलाई 2026 MPC मीटिंग की बैठक में भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.6% कर दिया. RBI के अनुसार, ग्लोबल सप्लाई चेन में रुकावट, जियो-पॉलिटिकल टेंशन और कच्चे तेल व गैस की बढ़ती कीमतों का असर आर्थिक वृद्धि पर पड़ सकता है. केंद्रीय बैंक का अनुमान है कि जून 2026 तिमाही में GDP ग्रोथ 6.6%, सितंबर तिमाही में 6.3%, दिसंबर तिमाही में 6.5% और मार्च 2027 तिमाही में 6.8% रह सकती है। 

भारत ने चीन को दी मात
इन चुनौतियों के बावजूद भारत की आर्थिक वृद्धि चीन की तुलना में मजबूत बनी हुई दिखाई दे रही है. हाल ही में चीन की दूसरी तिमाही की GDP ग्रोथ 4.3% रही, जो 2022 के अंत के बाद सबसे धीमी है. वहीं भारत ने भी ईरान-इजरायल और अमेरिका से जुड़े जियो-पॉलिटिकल टेंशन के कारण तेल और गैस की सप्लाई में अनिश्चितता का सामना किया, लेकिन इसके बावजूद RBI का मानना है कि भारतीय अर्थव्यवस्था अपेक्षा बेहतर स्थिति में बनी हुई है। 

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चीन की इकोनॉमी का भारत पर पड़ेगा असर?
चीन भारत का बड़ा व्यापारिक साझेदार है. भारत इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, केमिकल और कई इंडस्ट्रियल सामान चीन से आयात करता है. अगर चीन की अर्थव्यवस्था धीमी रहती है और वहां मांग कमजोर बनी रहती है, तो कई उत्पादों की कीमतों में नरमी आ सकती है. इससे भारतीय कंपनियों को कुछ कच्चा माल और सामान सस्ती कीमत पर मिल सकता है। 

दूसरी तरफ, अगर चीन की आर्थिक सुस्ती लंबे समय तक बनी रहती है, तो ग्लोबल ट्रेड और मांग पर भी असर पड़ सकता है. इससे भारतीय निर्यातकों को कुछ बाजारों में चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है. हालांकि, कई एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह भारत के लिए मैन्युफैक्चरिंग और सप्लाई चेन के सेक्टर में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने का भी मौका हो सकता है। 

आगे चीन के सामने क्या चुनौती?
कई मार्केट एक्सपर्ट्स का मानना है कि चीन के लिए सबसे बड़ी चुनौती डोमेस्टिक डिमांड और निजी निवेश को फिर से मजबूत करना है. अगर लोग ज्यादा खर्च करेंगे और कंपनियां निवेश बढ़ाएंगी, तभी आर्थिक रफ्तार तेज हो सकेगी. सरकार पहले भी अर्थव्यवस्था को सहारा देने के लिए कई प्रोत्साहन कदम उठा चुकी है, लेकिन उनका असर अभी सीमित नजर आ रहा है। 

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आने वाले महीनों में चीन की आर्थिक नीतियों, ग्लोबल व्यापार की स्थिति और घरेलू मांग पर सभी की नजर रहेगी. अगर चीन की ग्रोथ लंबे समय तक कमजोर रहती है, तो इसका असर दुनिया की अर्थव्यवस्था, कमोडिटी बाजार और इंटरनेशनल ट्रेड पर भी देखने को मिल सकता है।