जांजगीर जिला के अकलतरा जनपद पंचायत के ग्राम पंचायत झलमला में निरिक्षण के दौरान हुए बवंडर को देखकर नोडल अधिकारी बिना किसी निष्कर्ष के मौके से भागना पड़ा| जिसके कारण जाँच की प्रक्रिया अधूरी ही रह गई | वहीं दोनों पक्षों द्वारा एक दूसरे पर ही आरोप लगाए |
ग्राम पंचायत झलमला के पंचों द्वारा तालाब की सफाई और सामुदायिक मंच को लेकर की गई शिकायत के निरीक्षण के लिए तीन सदस्यों की टीम गुरुवार को गांव पहुंची थी। टीम ने निरीक्षण के दौरान पाया कि तालाब में गंदगी पसरी हुई है। तालाब लोगों के नहाने लायक नहीं है। जबकि सरपंच तालाब को सफाई करने में 96 हजार रुपए लगा चुके हैं लेकिन गंदगी को हटाया नहीं जा सका है।
ग्राम पंचायत झलमला के कुछ पंचों ने जनपद पंचायत में शिकायत दर्ज कराई थी गांव के झिलमिली तालाब में पूरी तरह से गंदगी और जलकुंभी से भरी हुई है। तालाब नहाने लायक नहीं है। कई बार सरपंच काशीराम निर्मलकर से इस संबंध में गुहार लगाई जा चुकी है लेकिन उन्होंने इस कोई ध्यान नहीं दिया। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया है कि चबूतरा निर्माण में भ्रष्टाचारी की गई है।
दोनों शिकायतों को लेकर निरीक्षण टीम गुरुवार की दोपहर गांव पहुंची थी। जिसमें नोडल अधिकारी देवेंद्र कुमार ध्रुव, सहायक नोडल अधिकारी लव कुमार यादव और सहायक रमे सिंह शामिल थे। निरीक्षण अधिकारी भारी गहमागहमी के बीच निरीक्षण स्थल पर पहुंचे। पहले उन्होंने सांस्कृतिक मंच का निरीक्षण किया जहां पर 8 कालम पर छठ खड़ा हुआ पाया। लेकिन इंजिनियर मौके पर नहीं थी जिसके कारण स्टीमेट की जानकारी नहीं मिल पाई| इसके बाद सभी तालाब पहुंचे। जहां तालाब के चारों तरफ जलकुंभी फैली हुई थी। निरीक्षण करने के बाद अधिकारी पंचायत भवन पहुंची। पंचायत भवन में पंचों के अलावा ग्रामीणों की भीड़ उमड़ी हुई थी। काफी हंगामा के बाद निरीक्षण टीम किसी फैसले पर नहीं पहुँच पाई और वापस चली गई।
मिडिया से बचते रहे नोडल अधिकारी
नोडल अधिकारी देवेंद्र कुमार ध्रुव के बाहर निकलने पर मीडिया टीम ने निरीक्षण के संबंध में पूछना चाहा तो वे असहज महसूस करने लगे। पहले तो मीडिया के सामने कुछ भी बोलते से ऐतराज करने लगे। उनका कहना है कि जांच पूरा करने नहीं दिया गया । ज्यादा दबाव बनाने पर उन्होंने बताया कि दो जगह का निरीक्षण किया गया है। तालाब में पूरी तरह कैसे गंदगी फैली हुई है वही सामुदायिक मंच आठ पिलरों पर खड़ा हुआ है। इंजिनियर के ट्रेनिंग से लौटने पर स्टीमेट चेक कर लेंगे।
निरीक्षण के दौरान हुई झूमाझटकी
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार सामुदायिक मंच के निरीक्षण के दौरान दोनों पक्षों में झूमाझटकी की नौबत आ गई। इस घटना के बाद शिकायतकर्ता अक्षय यादव के चेहरे से खून निकलने लगा। हालांकि इस संबंध में जब अक्षय से पूछा गया तो वह बात को टाल दिए। लेकिन मौके पर मौजूद लोगों ने सारी बातें बताई |
सचिव के प्रस्ताव रजिस्टर नहीं देने पर हुआ बवाल
बैठक के दौरान पंच श्रवण निर्मलकर द्वारा बैठक और प्रस्ताव संबंधी जानकारी मांगी गई। जिस पर सचिव रमेश यादव ने बैठक में प्रस्ताव होने का दावा किया गया। लेकिन जब प्रस्ताव रजिस्टर मांगी गई तब उन्होंने दिखाने से इनकार कर दिया। जिस पर पंच श्रवण ने टेबल पर जोर से हाथ पटकते हुए कहां की आपको दिखाना पड़ेगा। इसके बाद उपस्थित लोगों ने सभा कक्ष में हंगामा करना शुरू कर दिया। हंगामा को बढ़ता देख जांच अधिकारी वहां से निकल गए।
सचिव पर गैर जिम्मेदार जवाब देने का आरोप
शिकायतकर्ता अक्षय यादव ने सचिव पर गैर जिम्मेदार ढंग से जवाब देने का आरोप लगाते हुए कहा कि सचिव फोन नहीं उठाते | उनका कहना है कि सरकार उन्हें मोबाइल नहीं दी है इसलिए वे इन लोगों का फोन नहीं उठाते हैं। शिकायतकर्ता ने सचिन पर 15वें वित से 1 लाख 75 हजार रुपए बिना किसी स्टीमेट और प्रस्ताव के निकलने का आरोप लगाया है। सचिव पर सारे प्रस्ताव और स्टीमेट घर में बैठकर ही करने का आरोप लगाया है|
तालाब में गंदगी होने से ग्रामीणों को हो रही समस्या
गांव के अधिकांश लोगों का कहना है कि तालाब में गंदगी होने के कारण लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि तालाब की सफाई पिछले 10 सालों में अभी तक नहीं हुई है। लेकिन सफाई को लेकर कई तरह की चर्चाएं लोगों द्वारा कहीं जा रही है। कुछ लोगों का कहना है कि गर्मी की फसल लेने की वजह से तालाब में पानी भर गया जिसकी वजह से इस वर्ष सफाई नहीं हो पाई है। वहीं सरपंच का कहना है कि 96 हजार रुपए की राशि सफाई कार्य में खर्च की जा चुकी है।
सरपंच ने कहा केवल जलकुंभी, ग्रामीणों ने कहा गटर
सरपंच ने मिडिया को बताया की तालाब पूरी तरह साफ है केवल उसमें जलकुम्भी भरी पड़ी हैं, लेकिन ग्रामीणों ने बताया की गाँव में सड़क के दोनों तरफ नाली बनी हुई है| घर से निस्तारी वाला पानी नाली में जाता है| नाली के गंदे पानी को तालाब में ही बहा दिया जाता है| जिसके कारण तालाब का पानी पूरी तरह से गन्दा हो चूका है|
26 जनवरी और 15 अगस्त में सरपंच ने बाटा 50 -50 हजार की मिठाई
सरपंच का कहना है कि गांव में पांच स्कूल और आंगनबाड़ी है| जिसमें 15 अगस्त और 26 जनवरी के दिन 50-50 हजार की मिठाइयां दी गई है। लेकिन विपक्षी पंचों ने बताया कि सरपंच द्वारा कभी किसी स्कूल में या आंगनवाड़ी में मिठाइयों का वितरण नहीं किया गया है। गांव में पांच आंगनबाड़ी केंद्र हैं| जिसमें 5-5 किलो के हिसाब से बूंदी दी जाती है। वही ग्राम पंचायत भवन प्रांगण में मौजूद स्कूल में लगभग 30 किलो बूंदी, ताड़ स्कूल में लगभग 20 किलो बूंदी, हाई स्कूल में 30 किलो बूंदी और सरस्वती शिशु मंदिर में 10 किलो बूंदी से ज्यादा नहीं दी जाती। इन सभी को मिला ले तो इनका खर्च 2 हजार से भी कम का है। जबकि पंचों को केवल एक-एक पाव मिठाई दी जाती है।
पंच पतियों की भारी दखल ने बिगाड़ा खेल