NEET Success: खेत से मेडिकल कॉलेज तक, किसान के बेटे सहित 23 छात्रों ने हासिल की सफलता

भोपाल

महंगी कोचिंग के दौर में सरकारी स्कूल से मेडिकल कॉलेज (Medical college) में जाने का रास्ता खुला है। कोई खेतों में काम करने के बाद यहां पहुंचेगा तो किसी ने सेल्फ वर्क के दम पर सफलता हासिल की है। सुभाष स्कूल से 23 बच्चों ने नीट (NEET) पास की है। सही गाइडेंस, टाइम मैनेजमेंट और लगातार मेहनत को बच्चों ने सफलता का मंत्र बताया है। परीक्षा पास करने के बाद अब दा​खिले की बारी है। स्कूल के छात्र आदर्श को सबसे ज्यादा 680 अंक मिले। ऑल इंडिया रैंक 304 प्राप्त की है। वहीं, सलमान को 640 अंक और गीतांजलि को 603 अंक मिले हैं।

खेत से मेडिकल कॉलेज तक
— आदर्श (680 अंक, एआईआर- 304)

आदर्श ने बताया कि घर में खेती किसानी का काम होता है। नियमित तैयारी और स्कूल के गाइडेंस से दम पर सफलता मिली है। लगातार पढ़ाई की। पहले लगा दिक्कत होगी लेकिन ​शिक्षकों ने मनोबल बढाया। अब मेडिकल में दा​खिले के लिए पिता के साथ में जाउगा।

सलमान (640 अंक):
— मैंने अपनी तैयारी के लिए कोई बाहरी कोचिंग नहीं ली। मेरी सफलता का सबसे बड़ा राज सही समय प्रबंधन और स्कूल में कराई गई पढ़ाई पर पूरा भरोसा रखना रहा।

See also  MP में UCC विधेयक की तैयारी तेज, मतांतरित आदिवासियों को लेकर समिति कर रही कानूनी मंथन

शुभि सिंह (600 अंक):
— तैयारी के दौरान मैंने टाइम मैनेजमेंट पर सबसे ज़्यादा फोकस किया। बीच में जब परीक्षा निरस्त हुई थी, तो थोड़ी निराशा ज़रूर हुई, लेकिन मैंने हिम्मत नहीं हारी। दोगुनी मेहनत के साथ मैं फिर से जुट गई। सही सिलेबस और टाइम-टेबल को फॉलो करने से ही आज यह कामयाबी मिली है।

गीतांजलि पवार (603 अंक):
— सीमित संसाधनों और सामान्य पारिवारिक पृष्ठभूमि के बावजूद गीतांजलि ने अपनी नियमित पढ़ाई से 603 अंक बटोरे। उन्होंने साबित कर दिया कि अगर खुद पर अटूट भरोसा और दृढ़ संकल्प हो, तो किसी भी मुश्किल परीक्षा को पास किया जा सकता है।

सुपर 100 के तहत बच्चों का एडमिशन
ये वे बच्चे जिनका एडमिशन सुपर 100 के तहत हुआ था। प्रदेश के अलग-अलग जिलों से एक्सीलेंस स्कूल भोपाल पहुंचे। संस्था के प्राचार्य सुधाकर पाराशर के मुताबिक ये होनहार बच्चों के लिए पढ़ाई का एक प्लेटफार्म है। खासकर वे जो महंगी कोचिंग अफोर्ड नहीं कर सकते।

See also  मानसून में खतरे की जद में इंदौर, खतरनाक मकानों पर कार्रवाई अब भी अधूरी