AWS की गड़बड़ी से यूजर को दिखा 130 लाख करोड़ का बिल, मचा हड़कंप

अगर आपके फोन या लैपटॉप पर अचानक 1.5 ट्रिलियन डॉलर यानी करीब 130 लाख करोड़ रुपये का बिल आ जाए तो क्या होगा? ऐसा ही कुछ ऐमेजॉन वेब सर्विसेज (AWS) के एक भारतीय यूजर के साथ हुआ. ये ऐमेजॉन की क्लाउड सर्विस है.

जब यूजर ने AWS बिल देखा तो उसे यकीन ही नहीं हुआ. उसने सोशल मीडिया पर लिखा, 'My soul left my body', यानी बिल देखकर ऐसा लगा जैसे जान ही निकल गई हो. यह पोस्ट देखते ही देखते वायरल हो गई.

दरअसल हाल ही में दुनिया भर में कई AWS कस्टमर्स को अचानक अरबों और ट्रिलियन डॉलर के बिल दिखाई देने लगे. किसी को 22 अरब डॉलर का बिल दिखा, तो किसी के अकाउंट में 245 अरब डॉलर से लेकर 7.1 ट्रिलियन डॉलर तक की रकम नजर आई. इन स्क्रीनशॉट्स ने सोशल मीडिया पर हड़कंप मचा दिया.

वायरल हुए भारतीय यूजर के स्क्रीनशॉट में अनुमानित मंथली खर्च 1.5 ट्रिलियन डॉलर दिख रहा था. इतना ही नहीं, AWS डैशबोर्ड में उसके इस्तेमाल में 745,728,201,771% की बढ़ोतरी भी दिखाई गई. यह देखकर यूजर ने मजाक में लिखा कि बिल देखकर उसकी आत्मा शरीर छोड़कर चली गई. कुछ ही घंटों में यह पोस्ट लाखों लोगों तक पहुंच गई.

See also  कल से बंद हो जाएगा mAadhaar App, जानें नया ऐप कैसे डाउनलोड करें और क्या है पूरा प्रोसेस

बाद में Amazon ने साफ किया कि यह कोई असली बिल नहीं था. कंपनी के मुताबिक AWS के इस्टिमेटेड बिलिंग सिस्टम में तकनीकी गड़बड़ी आ गई थी. इसी वजह से कस्टमर्स को गलत अनुमानित बिल दिखाई दे रहे थे. कंपनी ने कहा कि यूजर्स से असल में इतनी रकम नहीं मांगी गई थी और किसी को पेमेंट करने की जरूरत नहीं है.

AWS ने बताया कि समस्या इस्टिमेटेड बिलिंग कंप्यूटेशन सिस्टम में हुई थी, जहां यूनिट प्राइस की काउंटिंग में तकनीकी गड़बड़ी आ गई थी. इसके बाद कंपनी ने प्रभावित सिस्टम को कुछ समय तक के लिए बंद किया और समस्या ठीक करने का काम शुरू कर दिया.

बता दें कि, ऐमेजॉन ने कस्टमर्स से माफी भी मांगी और भरोसा दिलाया कि फाइनल बिल सही होंगे. कंपनी ने कहा कि यह सिर्फ एक्सपेक्टेड खर्च दिखाने वाले सिस्टम की गलती थी. इसका असर यूजर्स के असली बिल या AWS सर्विसेज पर नहीं पड़ा.

See also  एप्पल इवेंट 2024 - iPhone 16 सीरीज का लॉन्च 9 सितंबर को

सोशल मीडिया पर मीम्स और मजेदार प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई. कई यूजर्स ने लिखा कि अगर सच में इतना बिल भरना पड़ता, तो पूरी दुनिया की संपत्ति भी कम पड़ जाती. क्योंकि खुद दुनिया की कई बड़ी कंपनियों का मार्केट कैप भी 1 ट्रिलियन डॉलर नहीं है.