पंजाबी इंफ्लूएंसर मंजीत कौर की मौत के मामले में चंडीगढ़ पुलिस ने अपहरण कर हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। मामले में पंजाब पुलिस, खासकर खरड़ सदर थाना पुलिस की बड़ी लापरवाही सामने आई है। आरोप है कि घटना के बाद से खरड़ पुलिस ने न तो हत्या के प्रयास का मामला दर्ज किया और न ही मंजीत कौर के होश में आने के बाद उसके बयान दर्ज किए।
मंजीत कौर ने पीजीआई में इलाज के दौरान बयान दर्ज कराने के लिए पुलिस को बुलाया था। पीजीआई चौकी की ओर से भी खरड़ सदर थाना पुलिस को बताया गया था कि मंजीत कौर को होश आ गया है और उसके बयान दर्ज कर लिए जाएं। इसके लिए जांच अधिकारी एएसआई लखविंदर सिंह को बकायदा फोन पर सूचना दी गई, लेकिन वह बयान दर्ज करने अस्पताल नहीं पहुंचे। पीजीआई चौकी में इसकी डीडीआर भी दर्ज है।
11 माह की बेटी को यमुना में फेंका फिर पत्नी को फेंकने की कोशिश, शोरशराबा सुनकर बचाने पहुंचे राहगीर, आक्रोशित लोगों ने पिता को पीटा
अपहरण के बाद हत्या का मुकदमा दर्ज
अब मंजीत कौर की मौत के बाद चंडीगढ़ पुलिस ने उसकी मां कांता देवी के बयान पर तुरंत अपहरण कर हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। मृतका की मां का आरोप है कि मंजीत कौर को दो जानकारों ने सेक्टर-34 स्थित शराब के ठेके के पास बुलाया और वहां से अपहरण कर मोरिंडा ले गए। आरोपितों ने उसे स्तूत के पेड़ से बांधकर आग लगा दी।
घटना 3 जुलाई की देर रात की है। मंजीत कौर लंबे समय तक जिंदगी और मौत की लड़ाई लड़ती रही थी । 9 जुलाई को उसे पीजीआई में भर्ती कराया गया। 5 अगस्त को उसे होश आया, लेकिन इसके बाद भी खरड़ पुलिस उसके बयान दर्ज करने नहीं पहुंची। करीब दो महीने तक गंभीर हालत में रहने के बाद 26 अगस्त को इलाज के दौरान मंजीत कौर की मौत हो गई।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि मंजीत कौर सन्नी एंक्लेव में रहती थी, जबकि उसकी मां और भाई पंचकूला के सेक्टर-19 में रहते हैं। पंजाब पुलिस ने अब तक हत्या के प्रयास का मामला तक दर्ज नहीं किया था।
चंडीगढ़ पुलिस अब यह भी जांच करेगी कि मंजीत कौर की मां ने इससे पहले पंजाब पुलिस को अपहरण कर आग लगाने के संबंध में बयान दिए थे या नहीं। यदि बयान दिए गए थे तो पंजाब पुलिस ने कार्रवाई क्यों नहीं की।
पीजीआई में हुआ पोस्टमार्टम
शिकायत मिलने के बाद बुधवार रात सेक्टर-34 थाना प्रभारी एसएचओ शादी लाल ने तुरंत एफआईआर दर्ज कर ली। वीरवार को मंजीत कौर के शव का पोस्टमार्टम कराकर शव परिजनों को सौंप दिया गया। पोस्टमार्टम के दौरान एसएचओ शादी लाल खुद मोर्चरी में मौजूद रहे।
शुभी और पिंदा की तलाश में जुटी पुलिस
मृतका की मां कांता देवी ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि मंजीत कौर को उसके दो जानकार शुभी और पिंदा ने कॉल कर सेक्टर-34 में बुलाया था। 3 और 4 जुलाई की रात दोनों ने मंजीत कौर के साथ मारपीट की और उसे गाड़ी में अगवा कर मोरिंडा के जंगल क्षेत्र में ले गए। वहां उसे स्तूत के पेड़ से बांधकर आग लगा दी।
कांता देवी के अनुसार आग लगाने के बाद आरोपित फरार हो गए। इसी दौरान मंजीत कौर का एक जानकार वहां अचानक पहुंचा और कंबल डालकर आग बुझाई। इसके बाद उसे मोरिंडा अस्पताल पहुंचाया गया, जहां से उसे पीजीआई रेफर कर दिया गया। इस दौरान मंजीत कौर को मोहाली के मैक्स अस्पताल भी ले जाया गया, जहां वह कुछ दिन तक भर्ती रही और इलाज चलता रहा। वहां से बाद में उसे पीजीआई रेफर किया गया।
पुलिस ने खंगाले सीसीटीवी कैमरे
चंडीगढ़ पुलिस अब यह भी जांच करेगी कि मंजीत कौर सेक्टर-34 किस काम से आई थी, उसे किस गाड़ी में अगवा किया गया और घटना के पीछे की पूरी वजह क्या थी।
सेक्टर-34 और आसपास के सीसीटीवी कैमरे खंगाले जा रहे हैं। पुलिस अपहरण के लिए इस्तेमाल वाहन का पता लगाने के लिए टोल प्लाजा के कैमरे भी खंगालेगी। सूत्रों के अनुसार खरड़ सदर थाने के जांच अधिकारी पर लापरवाही के मामले में कार्रवाई की गाज गिर सकती है।
CG : खाना खाने के बाद तीन मासूम सगी बहनों की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत, उल्टी-दस्त और फूड पॉइजनिंग की आशंका
अस्पतालों से किसे दी गई जानकारी, होगी जांच
चंडीगढ़ पुलिस अब यह जांच करेगी कि मोरिंडा अस्पताल और मोहाली के मैक्स अस्पताल से पुलिस को मंजीत कौर के एमएलसी मामले की जानकारी दी गई थी या नहीं। यदि जानकारी दी गई थी तो संबंधित पुलिस वहां क्यों नहीं पहुंची। अगर पुलिस पहुंची थी तो कार्रवाई क्यों नहीं की गई।
एमएलसी केस में अस्पताल की ओर से पुलिस को सूचना देना जरूरी होता है। सभी अस्पतालों को इस संबंध में निर्देश भी हैं। चंडीगढ़ पुलिस इस पूरे क्रम की जांच करेगी कि मंजीत कौर को मोरिंडा अस्पताल, मैक्स अस्पताल और बाद में पीजीआई में भर्ती कराने के दौरान पुलिस को किस-किस स्तर पर सूचना दी गई और उस पर क्या कार्रवाई हुई।
पीजीआई से बयान दर्ज कराने के लिए की थी कॉल
पुलिस सूत्रों के अनुसार, मंजीत कौर या उसके किसी जानकार की ओर से पीजीआई से पुलिस को काल की गई थी कि मंजीत कौर अपने बयान दर्ज करवाना चाहती है।
सूचना के बाद सेक्टर-11 थाना क्षेत्र से जांच अधिकारी मौके पर पहुंचा था और खरड़ सदर थाने के एएसआई लखविंदर सिंह को भी जानकारी दी गई थी, लेकिन एएसआई लखविंदर बयान दर्ज करने नहीं पहुंचे।
5 अगस्त को मंजीत कौर को होश आने के बाद पीजीआई चौकी की ओर से भी खरड़ सदर थाना पुलिस को सूचना दी गई थी कि वह बयान देने की हालत में है और उसके बयान दर्ज किए जाएं। लेकिन पुलिस अस्पताल नहीं पहुंची। पीजीआई चौकी में इसकी डीडीआर दर्ज है।
पत्नी बॉयफ्रेंड संग ठेले में खा रही थी मोमोस, दोस्तों के साथ आ धमका पति, फिर बीच सड़क मचा तांडव, पति ने पत्नी को तो दोस्तो ने प्रेमी की जमकर की धुनाई
दो महीने तक हत्या के प्रयास का मामला तक नहीं हुआ दर्ज
सबसे हैरानी की बात यह है कि घटना 3 जुलाई की देर रात हुई थी और मंजीत कौर को जिंदा जलाने का आरोप होने के बावजूद पंजाब पुलिस ने करीब दो महीने तक हत्या के प्रयास का मामला तक दर्ज नहीं किया। मंजीत कौर ने पीजीआई से अपने बयान दर्ज कराने के लिए मदद मांगी, लेकिन उसके बयान तक दर्ज नहीं किए गए।
26 अगस्त को मंजीत कौर की मौत के बाद फिर पीजीआई चौकी की ओर से रुक्का भेजा गया। इसके बाद खरड़ सदर थाना से जांच अधिकारी पीजीआई पहुंचे, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। इसके बाद मृतका की मां को लेकर खरड़ पुलिस के जांच अधिकारी एएसआई लखविंदर सिंह सेक्टर-34 थाने पहुंचे, जहां मां के बयान पर अपहरण कर हत्या का मामला दर्ज किया गया।
एसएसपी कंवरदीप कौर का वर्जन
मृतका की मां की शिकायत मिलने के तुरंत बाद अपहरण कर हत्या का मामला दर्ज किया गया है। मां ने अपने बयान में दो लोगों पर आरोप लगाया है कि उन्होंने मंजीत कौर का सेक्टर-34 से अपहरण किया और मोरिंडा ले जाकर आग लगा दी। आरोपित कौन थे और घटना के पीछे क्या कारण था, इसकी जांच की जा रही है। मामले में सीसीटीवी कैमरे खंगाले जा रहे हैं और अन्य सभी तथ्यों की जांच की जाएगी।