कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर मोर्चा खोला हुआ है। सीजेपी ने ‘इलेक्शन कमीशन ठीक करो’ नाम का अभियान चलाते हुए साफ कहा है कि अगर ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो सीजेपी जंतर-मंतर की तरह एक बार फिर आंदोलन करेगी। लेकिन क्या इस बार भी सोनम वांगचुक सीजेपी के समर्थन के लिए आगे आएंगे। इस बात का जवाब उन्होंने खुद दिया है। उन्होंने कहा है कि ऐसे मुद्दे उठाने वाले संगठनों को वे समर्थन करते हैं लेकिन हर आंदोलन में निजी तौर पर जुड़ना उनके लिए मुमकीन नहीं है।
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न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए सोनम वांगचुक ने कहा, मैं हमेशा उन सभी संगठनों और नेताओं का नैतिक समर्थन करता हूं जो ऐसे मुद्दे उठाते हैं। जैसे चुनाव प्रक्रिया को साफ़-सुथरा बनाना और जवाबदेही तय करना, जो पूरी तरह से सही हैं। हालांकि, मेरे लिए हर आंदोलन में व्यक्तिगत रूप से शामिल होना संभव नहीं है। जब ऐसे आंदोलन की जड़े नई होती हैं, तब मैं उनका समर्थन करता हूं लेकिन जब मजबूत हो जाती हैं तो वे अपने आप चल पाएंगी, इसी उम्मीद के साथ मैं कई आंदोलन को समर्थन देता हूं। उन्होंने आगे कहा, मुझे उम्मीद है कि एक साफ़-सुथरा और पारदर्शी लोकतंत्र बनाने के लिए जवाबदेही की इस माँग में पूरा देश शामिल होगा।
अभिजीत दीपके ने क्यों किया राष्ट्रव्यापी आंदोलन का ऐलान?
इससे पहले सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आरोप लगाया था कि चुनावी प्रक्रिया में धांधली की गई है और नागरिकों से मतदान का अधिकार छीना जा रहा है। इस अवसर पर पार्टी के सह-संयोजक सौरव दास और आशुतोष रांका भी मौजूद थे। दीपके ने कहा, अगर ज्ञानेश कुमार 48 घंटे के भीतर इस्तीफा नहीं देते हैं तो हम दिल्ली में प्रदर्शन करने से पहले राष्ट्रव्यापी विरोध प्रदर्शन शुरू करेंगे। उन्होंने कहा कि अगर सीईसी इस्तीफा नहीं देते हैं तो निश्चित रूप से जंतर-मंतर 2.0 होगा। सीजेपी ने कहा कि अगर सीईसी ज्ञानेश कुमार इस्तीफा नहीं देते हैं तो पार्टी राष्ट्रव्यापी आंदोलन शुरू करेगी और इसके बाद दिल्ली में अनिश्चितकालीन धरना देगी।
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ये टिप्पणियां ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की उस खबर के एक दिन बाद आई थीं, जिसमें कहा गया था कि तीन-सदस्यीय निर्वाचन आयोग (ईसी) के भीतर विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को लेकर दो निर्वाचन आयुक्तों -सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी- ने बार-बार सवाल उठाए थे। सीजेपी ने एसआईआर के दौरान कई राज्यों में मतदाता सूची से नाम हटाए जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि महाराष्ट्र में दो करोड़ से अधिक, उत्तर प्रदेश में दो करोड़ से अधिक, कर्नाटक में करीब एक करोड़, तमिलनाडु में 97 लाख, पश्चिम बंगाल में 90 लाख, तेलंगाना में 73 लाख, दिल्ली में 47 लाख और केरलम में 24 लाख नाम हटाए गए हैं।
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दीपके ने कहा, ‘लोकतंत्र का अर्थ है कि लोग अपनी सरकार चुनते हैं। (लेकिन) यह लोकतंत्र नहीं, बल्कि निरंकुशता है। ज्ञानेश कुमार के नेतृत्व में हम ऐसी चुनावी व्यवस्था देख रहे हैं, जिसमें निर्वाचन आयोग यह तय कर रहा है कि मतदाता सूची में कौन रहेगा और कौन नहीं। जब प्रारूप मतदाता सूची से लाखों नाम गायब हो सकते हैं तो आयोग की जिम्मेदारी है कि वह यह साबित करे कि हर नाम हटाने की कार्रवाई कानूनी, पारदर्शी है और उसकी ठीक से समीक्षा की गई है।