राउत नाचा में दिखती है छत्तीसगढ़ की झलक, बच्चों को देखे थिरकते हुए 

पकरिया – छत्तीसगढ़ राज्य में कई त्यौहार स्थानीय है जिसको बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है इनके पीछे कुछ ना कुछ कहानी छिपी होती है इसी कड़ी में आजकल राउत नाचा को बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा हैं देवउठनी एकादशी पर्व के दिन से यादव बंधु द्वारा टोली बनाकर गांव गली मोहल्ले में रंग बिरंगे कपड़े पहनकर सिर पर सुंदर पगड़ी जिसमें मोर पंख लगा कर पैरों में मौजा के ऊपर घुंघरू एवं अपने लाठी को विभिन्न रंगों से सजा कर गड़वा बाजा के साथ हाना बोलकर कर नाचते नजर आते हैं जिसमें बड़ी संख्या में युवा बुजुर्ग शामिल होकर नाचते हैं वहीं इनके साथ एक लड़का औरत की वेशभूषा पहनकर उनके साथ नृत्य करता है ।
छत्तीसगढ़, एक ऐसा गढ़ है. जहाँ लोकगीतों लोककथाओं और लोक नाचाओ की भरमार है। जैसे आज व्यक्ति कोई काम करते समय रेडियो , मोबाइल या ध्वनि उपकरण द्वारा गाना सुनते- सुनते काम करना पसंद करते है , शायद ऐसे ही प्रविति हमारे पूर्वजो की भी रही होगी , जो हर एक पारमपरिक कार्य हेतु लोकगीतों लोकनाचाओ का निर्माण किया गया है। ये लोक गीत हमारे जीवनशैली के बारे में बताते है।

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छत्तीसगढ़ में सभी प्रकार के लोकनाचा के लिए एक विशेष प्रकार का व वेषभूषा होता है , जो एक अलग महत्त्व रखता है और उस लोकनाचा को अलग पहचान देता है। राउत नाचा में भी राउत एक अलग पोशाक पहनते है , इसमें धोती चितकबरे रंग का कुर्ता और सर पर साफा बांधा जाता है , नाचने वाले राउत अपने पीठ पर मंजुर पंख से बने एक विशेष प्रकार के सजावट को सोहाई से बांधे रहते है , साथ ही पैरो में बड़े बड़े घुघरू बांधा जाता है इन सब के अलावा राउत नाचा में लाठी का विशेष महत्व होता है जिसे मयूर पंख या अन्य कई तरीके से सजाया जाता है। इन सब साजो सज्जा और गाजे बाजे के साथ जब ग्वालो का समूह दोहा लगाते हुये गली में चलते है तो ये संस्कृति छत्तीसगढ़ में देखते ही बनती है।

पकरिया के यादव बंधु अपने-अपने किसानों के घरों में जाकर करने के बाद गाय भैंस बैल अपने हाथों से बनाई हुई सुहाई बांधते हैं बदले में उनको किसानों द्वारा धान चावल रुपया पैसा दिया जाता है साथ ही इस बीच क्षेत्र में मड़ाई मेला का भी आयोजन किया जाता है जिसमें दूरदराज के व्यापारी गण शामिल होते हैं वहीं इस बीच पकरिया रावत नाचा आयोजक समिति के मनहरण यादव रामकुमार यादव, कलेसर यादव, जुगत यादव, राजू यादव, मेला राम, साहेब लाल यादव, राजकुमार विक्की यादव, सूरज यादव, यादव, जनी यादव, धनी यादव, अमित यादव, ज्वाला यादव, गोपी यादव, सहित यादव समाज के छोटे बच्चे भी नाचा में शामिल होकर नाचा को चार चांद लगा रहे है।

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