आरसमेटा ठेकेदार हत्याकाण्ड : हत्यारे ने पश्याताप में की आत्महत्या, पेंड्रा में मिली लाश 

Johar36garh (Web Desk)|पेंड्रा जिला बिलासपुर जिला जांजगीर जिला कुछ दिनों पहले फदहा खार में मिले लाफार्ज कंपनी के ठेकेदार की हत्या के मामले में बहुत बड़ा मोड़ आया है। मूलमुला में रहने वाले टॉमी मैथ्यू को 14 जून की शाम किसी का फोन आया जिसके बाद वे हड़बड़ी में अपनी कार लेकर घर से निकल गए । उसके बाद उनका कुछ पता नहीं चला। मोबाइल नंबर ट्रेस करते हुए पुलिस सिरगिट्टी थाना क्षेत्र के फदहाखार जंगल में पहुंची तो वहां सड़क किनारे उनकी कार खड़ी थी और जंगल में 100 मीटर भीतर उनकी लाश पड़ी थी । किसी ने गला रेत कर उनकी जान ले ली थी। जब टॉमी मैथ्यू का मोबाइल खंगाला गया तो कॉल करने वाले संदिग्ध गंगाराम यादव की तलाश पुलिस ने शुरू की लेकिन महमंद में रहने वाला गंगा राम यादव घटना के दिन से ही फरार था। पता चला कि हत्या के बाद टॉमी मैथ्यू का सोने का लॉकेट ,सोने का चेन, सोने का ब्रेसलेट और सोने की अंगूठी भी वह अपने साथ ले गया था

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इधर पुलिस लगातार उसे तलाश रही थी कि इसी बीच बुधवार को पुलिस को सूचना मिली कि पेंड्रा थाना क्षेत्र के ग्राम कोटमी में किसी ने कीटनाशक पीकर खुदकुशी कर ली है,उसके पास मिले सुसाइड नोट में पूरे मामले का खुलासा हो गया। कोटमी के जंगल में मिला मिली लाश किसी और की नहीं बल्कि फरार गंगाराम यादव की ही थी। पता चला कि टॉमी मैथ्यू की हत्या करने के बाद उसके पास से लूटे गए जेवर की मदद से उसने गुरुनानक चौक स्थित आईसीआईसीआई बैंक की शाखा से गोल्ड लोन लिया था ।जांच के दौरान पता चला कि गंगाराम यादव ने आईसीआईसीआई बैंक से 1 लाख 82 हज़ार रुपये का लोन लिया था। पुलिस ने जांच के दौरान गंगाराम की पत्नी के माध्यम से डेढ़ लाख रुपये जप्त किया । वहीं पुलिस ने टॉमी मैथ्यू के पहने हुए गहने भी बरामद कर लिये है।

गंगाराम यादव को पैसों की जरूरत थी इसलिए उसने टॉमी मैथ्यू की उस रात जान लेकर उसके गहने लूट लिए थे। टॉमी मैथ्यू का सोने के गहनों का शौक उसकी मौत की वजह बना। लेकिन उसे लूटने के बाद मनचाही रकम हासिल करने के बावजूद गंगाराम यादव की आत्मग्लानि ने उसे भी जीने नहीं दिया । अपने किए के लिए उसने अपने सुसाइड नोट में अपने परिवार से माफी मांगी है शायद इस घटना को अंजाम देने के बाद वह पश्चाताप की अग्नि में भीतर ही भीतर जल रहा था। साथ ही साथ पुलिस से भागते भागते भी वह बुरी तरह टूट चुका था। सुसाइड नोट में उसने अपने परिवार से जरूर माफी मांगी है लेकिन वह असल में टॉमी मैथ्यू और उसके परिवार का गुनाहगार है। पता चला कि लूटे गए जेवरात को उसने बुधवारी बाजार के एक सराफा दुकान में बेचने का भी प्रयास किया था लेकिन उसमें वह सफल नहीं हो पाया। जिसके बाद उसने बैंक में उन गहनों को गिरवी रख कर लोन ले लिया। इस पूरेमामले में बैंक की कार्यप्रणाली पर भी बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं। किस तरह बैंक किसी की हत्या कर लूट गए जेवर को भी गिरवी रखकर लोन दे रहा है। उसके इस भूमिका की जांच होनी चाहिए। 14 जून को टॉमी अपने घर से निकला था और ठीक 10 दिन बाद उसके हत्यारे ने भी अपनी इह लीला समाप्त कर ली । लूटे गए जेवरात बरामद कर लिए गए। यानी इतना सब कुछ हो जाने के बाद भी किसी के हाथ कुछ भी नहीं लगा और बेवजह दो जाने चली गई। लालच और बिना मेहनत के अमीर बनने की चाहत इंसान से ऐसे गुनाह कराती है, जिसके नतीजे इसी तरह के खौफनाक होते हैं , क्योंकि गुनाह की कमाई कभी सुख और संतोष नहीं दे सकती।

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