निजीकरण के कारण हो रही कोयला खदानों में दुर्घटनाएँ  : अजाक्स

Johar36garh (Web Desk)|कोरबा जिले की कुसमुंडा कोयला खान में बढ़ती दुर्घटनाओं के लिए अजाक्स ने निजीकरण को जिम्मेदार ठहराया है । ठेका मजदूरों से असुरक्षित ढंग से काम लिया जा रहा है । जिससे मजदूरों को बेवजह अपनी जान गंवानी पड़ रही है। छत्तीसगढ़ अनुसूचित जाति जनजाति अधिकारी एवं कर्मचारी संघ के प्रांत अध्यक्ष डॉ लक्ष्मण कुमार भारती, प्रांतीय महामंत्री के आर डहरिया, प्रांतीय सचिव डॉ अमित मिरी, कोरबा जिला अध्यक्ष के डी पात्रे एवं जिला प्रवक्ता सह विकास खंड शाखा कटघोरा अध्यक्ष सुरेंद्र कुमार खुटे ने अपने संयुक्त बयान में कहा कि एसईसीएल कोयला खदान इकाइयों में अनेक कार्य को निजी कंपनियों को ठेके पर दिया जाता है ।

हाल ही में कुसमुण्डा की कोयला खदान में तीन ठेका श्रमिकों की दुर्घटना में मौत हो गई इसकी असली वजह खदानों में निजी करण किया जाना है। 30 जुलाई को कटघोरा विकास खण्ड अंतर्गत गेवराबस्ती निवासी अनुसूचित जाति वर्ग के नवयुवक  मुकेश कुमार दिवाकर की 26 वर्ष की अल्पायु में ही एस ई सी एल प्रबंधन की लापरवाही के कारण खान दुर्घटना में मृत्यु हो गई।  दक्षिण पूर्वी कोयला क्षेत्र सहित देश के सभी कोयला खदानों में निजी कंपनियों को उत्खनन कार्य सहित अन्य कार्यों में ठेका दिया जा रहा है।

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निजी ठेका कंपनियों द्वारा अप्रशिक्षित तथा अकुशल मजदूरों की भर्ती कम मजदूरी दर पर कर लिया जाता है । तथा बिना प्रशिक्षण दिए सीधे-सीधे कार्य पर नियोजित कर दिया जा रहा है। तकनीकी जानकारी के अभाव में अकुशल- अप्रशिक्षित मजदूर बिना सुरक्षा संसाधन के अपनी जान जोखिम में डालकर कार्य करने को मजबूर हैं। यदि कार्य के दौरान ठेका श्रमिक की मृत्यु हुई तो पांच – दस हजार रुपये  कफन दफन हेतु कंपनियों द्वारा मृतक के आश्रित को दे दिया जा रहा है । कोई  पर्याप्त मुआवजा भी नहीं दिया जाता।  यदि यही कर्मचारी एसईसीएल द्वारा नियुक्त होता तो घायल श्रमिकों का उपचार अच्छे अस्पताल में हो पाता तथा अधिकांश घायल मजदूरों की जान बच जाती । श्रमिकों की दुर्घटना मृत्यु पर मुआवजा के साथ आश्रित को नौकरी भी प्राप्त हो पाती । लेकिन सरकार द्वारा किए जा रहे निजी करण का दुष्परिणाम यह है कि भविष्य का सपना संजोए युवा वर्ग को अपनी जान देकर निजीकरण की कीमत चुकानी पड़ रही है । अवगत हो कि निजी कंपनी को सामाजिक सरोकार से कोई मतलब नहीं है। उसका एकमात्र उद्देश्य मुनाफा कमाना है। सरकार को निजीकरण को बंद कर ठेका मजदूरी के स्थान पर युवाओं को नियमित रोजगार उपलब्ध कराना चाहिए।

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अजाक्स ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा कि आरक्षण की व्यवस्था को समाप्त करने के लिए सरकार द्वारा निजीकरण को बढ़ावा दिया जा रहा है ।  सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम को निजी हाथों में दिया जा रहा है। लेकिन इसका दुष्परिणाम समाज पर पड़ रहा है। अजाक्स ने  यह भी कहा कि निजीकरण की नीति के कारण  निजी कंपनियों द्वारा कम मजदूरी पर कर्मचारी नियोजित किए जाने से बाजार में पर्याप्त मात्रा में धन नहीं जा रहा है , जिससे कि वस्तुओं की मांग उत्पन्न नहीं हो रही है । फलस्वरूप बाजार में मंदी छा गई है। बाजार में  मंदी का मुख्य कारण निजी करण ही है। निजीकरण के खतरे को देखते हुए सरकार को तत्काल निजीकरण पर रोक लगानी चाहिए तथा लाभ वंचित वर्ग अनुसूचित जाति , जनजाति तथा पिछड़े वर्ग को पर्याप्त प्रतिनिधित्व प्रदान करना चाहिए।